पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और ACSIR में MoU: 10 संस्थानों में संयुक्त PhD कार्यक्रम शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी (ACSIR) ने 19 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत मंत्रालय के सभी 10 अनुसंधान संस्थानों को ACSIR से संबद्ध संस्थानों के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इस साझेदारी से वायुमंडलीय, महासागरीय और ध्रुवीय विज्ञान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त डॉक्टरेट (PhD) कार्यक्रम संचालित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
इस संस्थागत सहयोग के अंतर्गत MoES की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को ACSIR के लचीले शैक्षणिक ढाँचे के साथ एकीकृत किया गया है। पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के कई विशिष्ट क्षेत्रों में PhD कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनमें मौसम पूर्वानुमान एवं जलवायु सेवाएँ, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान, ध्रुवीय क्षेत्र एवं हिममंडल अनुसंधान, महासागर अवलोकन एवं समुद्री रोबोटिक्स, गहरे समुद्र में खनन एवं विलवणीकरण, भूकंप विज्ञान एवं भूकंप संबंधी जोखिम आकलन, तटीय प्रक्रियाएँ, समुद्री जीवित संसाधन तथा पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के अनुप्रयोग प्रमुख हैं।
छात्रों के लिए अनुसंधान व्यवस्था
ACSIR के PhD कार्यक्रम में चयनित छात्र MoES के संस्थानों में अनुसंधान कर सकेंगे और उन्हें ऐसे वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिलेगा, जिन्हें ACSIR के संकाय सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है। डॉक्टरेट की डिग्री ACSIR प्रदान करेगा तथा डिग्री प्रमाणपत्र पर संबंधित मेजबान संस्थान का उल्लेख भी स्पष्ट रूप से होगा। यह व्यवस्था छात्रों को संस्थागत पहचान के साथ-साथ ACSIR की अकादमिक मान्यता दोनों का लाभ एक साथ प्रदान करती है।
समन्वय तंत्र और बौद्धिक संपदा
सुचारू शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रत्येक 10 संस्थान में ACSIR के नोडल समन्वयक नियुक्त किए गए हैं, और MoES में एक केंद्रीय समन्वयक भी तैनात किया गया है। सभी 10 संस्थान ACSIR के नवीनतम PhD प्रवेश चक्र में पहले से भाग ले रहे हैं। अनुसंधान से उत्पन्न बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के तहत छात्र को आविष्कारक के रूप में श्रेय दिया जाएगा, जबकि संयुक्त बौद्धिक संपदा को आपसी सहमति से साझा किया जाएगा।
सरकार की मंशा और विशेषज्ञ दृष्टिकोण
MoES के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने कहा कि इस साझेदारी से मंत्रालय को काफी लाभ होगा और यह सहयोग भविष्य में पृथ्वी विज्ञान के शिक्षकों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं के लिए एक बेहतरीन साझेदारी साबित होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत जलवायु परिवर्तन, समुद्र स्तर वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जोखिम प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है। गौरतलब है कि पृथ्वी प्रणाली विज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भारत में उच्च प्रशिक्षित शोधकर्ताओं की माँग लगातार बढ़ रही है।
आगे की राह
यह सहयोग समुद्र विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, जल विज्ञान और ग्रहीय प्रणालियों के क्षेत्रों में उन्नत शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता निर्माण के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य विषयों के बीच अनुसंधान को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में संसाधन एवं बुनियादी ढाँचा साझा करना और शुरुआती करियर वाले वैज्ञानिकों तथा छात्रों को बेहतर अकादमिक अवसर उपलब्ध कराना है। यह साझेदारी भारत के पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान पारितंत्र को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस संस्थागत कदम है।