नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा किया, कच्चे तेल की तेजी बनी वजह
सारांश
मुख्य बातें
निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 4 अक्टूबर 2026 (शनिवार) से देशभर में अपने पेट्रोल पंप नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमत ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दी है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी की वजह से की गई है।
मूल्य वृद्धि की वजह
नायरा एनर्जी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नई कीमतों का मकसद बढ़ी हुई उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को कम करना है। वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल के दाम लगातार ऊपर जाने से पेट्रोल और डीजल की इनपुट लागत तेज़ी से बढ़ी है, जिससे निजी कंपनी के लिए पुरानी कीमतें बनाए रखना व्यावसायिक रूप से संभव नहीं रह गया था।
इस साल दूसरी बार बढ़े दाम
देश में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप संचालित करने वाली नायरा एनर्जी के लिए यह 2026 में दूसरी ईंधन मूल्य वृद्धि है। इससे पहले मार्च में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधा के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए थे। हालाँकि, जुलाई में कच्चे तेल की कीमतें नरम होने पर वह बढ़ोतरी वापस ले ली गई थी। ताज़ा मूल्य वृद्धि इस बात का संकेत है कि कच्चे तेल पर ऊपरी दबाव एक बार फिर तीव्र हो गया है।
सरकारी कंपनियों की अलग रणनीति
यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय में आई है जब सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ — जो भारत के 1,04,000 से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा का संचालन करती हैं — ने वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा ईंधन कीमतें काफी हद तक स्थिर रखी हैं। इस अंतर ने निजी और सरकारी खुदरा विक्रेताओं के बीच मूल्य प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस हफ्ते की शुरुआत में सरकार ने स्पष्ट किया था कि निजी ईंधन विक्रेताओं को पेट्रोल-डीजल की बिक्री बंद नहीं करनी चाहिए।
अन्य ईंधनों पर भी असर
ईंधन क्षेत्र में व्यापक मूल्य बदलाव के तहत सरकारी कंपनियों ने 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹62.50 की वृद्धि की है। हालाँकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹942 पर यथावत रखी गई है। इसके साथ ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत ₹16 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹121 से ₹137 प्रति लीटर कर दी गई है, जिसका सीधा असर घरेलू हवाई किराए पर पड़ सकता है।
आम उपभोक्ता पर असर
नायरा एनर्जी के पंपों पर ईंधन भरवाने वाले उपभोक्ताओं को अब प्रति लीटर अधिक चुकाना होगा, जबकि सरकारी पंपों पर कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। यह अंतर उपभोक्ताओं को सरकारी पंपों की ओर खींच सकता है। गौरतलब है कि डीजल की बढ़ी कीमत माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र की लागत पर भी दबाव डालती है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकारी तेल कंपनियाँ भी मूल्य समीक्षा करती हैं।