24 अक्टूबर 2026
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NSE CEO आशीष चौहान की चेतावनी: AI साइबर हमलों से पूंजी बाज़ार खतरे में, ब्रोकरों को तत्काल कार्रवाई ज़रूरी

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NSE CEO आशीष चौहान की चेतावनी: AI साइबर हमलों से पूंजी बाज़ार खतरे में, ब्रोकरों को तत्काल कार्रवाई ज़रूरी

सारांश

NSE के CEO आशीष कुमार चौहान ने मुंबई में खुलकर कहा — AI-आधारित साइबर हमले पूंजी बाज़ार के लिए अस्तित्व का सवाल बन सकते हैं। एक सदस्य की कमज़ोरी पूरे नेटवर्क को तोड़ सकती है। SBI में 3,897 ग्राहकों के डेटा ब्रीच के बाद यह चेतावनी महज़ औपचारिकता नहीं है।

मुख्य बातें

NSE CEO आशीष कुमार चौहान ने 24 अक्टूबर 2026 को ANMI कन्वेंशन, मुंबई में AI साइबर हमलों पर गंभीर चेतावनी दी।
चौहान ने कहा कि किसी एक बाज़ार सदस्य की सुरक्षा में कमज़ोरी पूरे पूंजी बाज़ार नेटवर्क की अखंडता को प्रभावित कर सकती है।
ANMI को एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया गया जो साइबर खतरों की पहचान और समन्वय करे।
NSE कार्यशालाओं और नियामकों के सहयोग से ब्रोकरों के सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत बनाने में सहायता देगा।
क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की दीर्घकालिक चुनौती बताया; मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों पर खतरे की आशंका।
इसी माह SBI में कथित तौर पर 3,897 ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर मिला; PNB ने भी AI फ्रॉड को लेकर ग्राहकों को आगाह किया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित ANMI इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन 2026 में AI-आधारित साइबर हमलों के तेज़ी से बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने देशभर के स्टॉकब्रोकरों से अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को तत्काल सुदृढ़ करने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि किसी एक बाज़ार सदस्य की सुरक्षा प्रणाली में कमज़ोरी पूरे पूंजी बाज़ार नेटवर्क की विश्वसनीयता और अखंडता को खतरे में डाल सकती है।

मुख्य चेतावनी: AI खतरों से पूरा नेटवर्क संकट में

चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर हमलों का जोखिम असाधारण गति से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए तमाम बाज़ार सहभागियों को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, NSE अपने पूरे नेटवर्क की व्यापक सुरक्षा समीक्षा कर रहा है ताकि संभावित खामियों की समय रहते पहचान हो सके।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रत्येक ब्रोकर और बाज़ार सदस्य को साइबर सुरक्षा को अपने मूल व्यावसायिक कार्यों में सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, ताकि देशभर की ट्रेडिंग प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता अक्षुण्ण रहे।

ANMI को विशेष टास्क फोर्स बनाने का सुझाव

चौहान ने सम्मेलन में ANMI (एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज़ मेंबर्स ऑफ इंडिया) से एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार यह टास्क फोर्स संभावित साइबर खतरों की पहचान करे, विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करे और बाज़ार सहभागियों को उभरते जोखिमों से निपटने में व्यावहारिक सहायता प्रदान करे।

यह ऐसे समय में आया है जब वित्तीय क्षेत्र में साइबर हमले न केवल संख्या में, बल्कि परिष्कार में भी बढ़ रहे हैं। इस वर्ष की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर कई बड़े वित्तीय संस्थानों को AI-सक्षम हमलों का सामना करना पड़ा था।

NSE की भूमिका: कार्यशालाएँ और नियामक सहयोग

चौहान ने आश्वस्त किया कि NSE कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ब्रोकरों को सक्रिय सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज नियामक निकायों के साथ मिलकर बाज़ार सदस्यों के सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत बनाने में मदद करेगा।

जिन ब्रोकरों के पास पर्याप्त आंतरिक तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है, उनके लिए चौहान ने दो विकल्प सुझाए — या तो अपनी आंतरिक क्षमता विकसित करें, या प्रमाणित बाहरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सेवाएँ लें।

क्वांटम कंप्यूटिंग: भविष्य की बड़ी चुनौती

एआई से आगे बढ़ते हुए चौहान ने क्वांटम कंप्यूटिंग को पूंजी बाज़ारों के लिए एक दीर्घकालिक खतरे के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार क्वांटम तकनीक मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा प्रणालियों और सुरक्षित संचार तंत्र को भविष्य में बाधित कर सकती है। उन्होंने कहा कि बाज़ार सहभागियों को केवल आज के खतरों के लिए नहीं, बल्कि कल की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी अभी से तैयारी करनी होगी।

व्यापक संदर्भ: SBI और PNB की घटनाएँ

गौरतलब है कि इसी माह भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में एक डेटा ब्रीच की घटना सामने आई, जिसमें कथित तौर पर 3,897 ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी डार्क वेब पर पाई गई। इसी प्रकार पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी ग्राहकों को AI-आधारित साइबर धोखाधड़ी, वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और फिशिंग हमलों के प्रति सतर्क रहने की सलाह जारी की। ये घटनाएँ स्पष्ट करती हैं कि साइबर जोखिम अब सैद्धांतिक नहीं, बल्कि तात्कालिक वास्तविकता है।

चौहान के इस संबोधन का महत्व इस तथ्य से और बढ़ जाता है कि NSE भारत का सबसे बड़ा इक्विटी एक्सचेंज है और इसकी प्रणालियों पर करोड़ों निवेशकों का विश्वास टिका हुआ है। आने वाले समय में पूंजी बाज़ार की साइबर सुरक्षा नीति की दिशा काफी हद तक इस तरह के सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिना दंडात्मक प्रावधान और सत्यापन-योग्य मानकों के यह प्रयास कागज़ी भी रह सकता है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE CEO आशीष चौहान ने AI साइबर हमलों को लेकर क्या चेतावनी दी?
आशीष कुमार चौहान ने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि AI-आधारित साइबर हमलों का जोखिम तेज़ी से बढ़ रहा है और किसी एक बाज़ार सदस्य की सुरक्षा कमज़ोरी पूरे पूंजी बाज़ार नेटवर्क की अखंडता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने ब्रोकरों से तत्काल अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताएँ मज़बूत करने का आह्वान किया।
ANMI टास्क फोर्स का क्या उद्देश्य होगा?
NSE CEO के सुझाव के अनुसार यह टास्क फोर्स संभावित साइबर खतरों की पहचान करेगी, विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करेगी और बाज़ार सहभागियों को जोखिमों से निपटने में व्यावहारिक सहायता प्रदान करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य बाज़ार की सामूहिक साइबर तैयारी को एकीकृत करना है।
क्वांटम कंप्यूटिंग पूंजी बाज़ार के लिए क्यों खतरनाक है?
चौहान के अनुसार क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य में मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा प्रणालियों और सुरक्षित संचार तंत्र को बाधित कर सकती है, जिन पर आज के सभी वित्तीय लेनदेन निर्भर हैं। इसीलिए बाज़ार सहभागियों को केवल वर्तमान खतरों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी अभी से तैयारी करनी होगी।
SBI डेटा ब्रीच और NSE की चेतावनी में क्या संबंध है?
इसी माह कथित तौर पर SBI के 3,897 ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी डार्क वेब पर मिली और PNB ने AI फ्रॉड, वॉयस क्लोनिंग व डीपफेक को लेकर एडवाइज़री जारी की। ये घटनाएँ NSE CEO की इस चेतावनी को तात्कालिक संदर्भ देती हैं कि वित्तीय क्षेत्र में साइबर खतरे अब सैद्धांतिक नहीं, बल्कि सक्रिय वास्तविकता हैं।
जिन ब्रोकरों के पास तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है, उनके लिए क्या सुझाव दिया गया?
चौहान ने सुझाया कि ऐसे ब्रोकरों के पास दो विकल्प हैं — या तो अपनी आंतरिक साइबर सुरक्षा क्षमता विकसित करें, या प्रमाणित बाहरी विशेषज्ञों की सेवाएँ लें। NSE ने कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के ज़रिए ब्रोकरों को सक्रिय सहायता देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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