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सेबी ने लॉन्च किए दो साइबर सुरक्षा पोर्टल, प्रतिभूति बाजार में घटना रिपोर्टिंग होगी मजबूत

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सेबी ने लॉन्च किए दो साइबर सुरक्षा पोर्टल, प्रतिभूति बाजार में घटना रिपोर्टिंग होगी मजबूत

सारांश

सेबी ने प्रतिभूति बाजार में साइबर सुरक्षा की खाई पाटने के लिए दो पोर्टल लॉन्च किए। संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल FSB के FIRE प्रारूप पर आधारित है, जबकि साइबर सुरक्षा पोर्टल हितधारकों के बीच जानकारी साझा करने का केंद्रीय मंच बनेगा — यह कदम वैश्विक साइबर मानकों से तालमेल की दिशा में अहम है।

मुख्य बातें

सेबी ने 18 अगस्त 2025 को प्रतिभूति बाजार के लिए दो नए साइबर सुरक्षा पोर्टल लॉन्च किए।
संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल FSB के FIRE प्रारूप के अनुरूप है, जिससे सीमा-पार रिपोर्टिंग आसान होगी।
साइबर सुरक्षा पोर्टल हितधारकों के बीच जानकारी, कमजोरियों की चेतावनियाँ और नीतिगत उपाय साझा करने का केंद्रीय मंच होगा।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा कि साइबर खतरे संगठनात्मक और राष्ट्रीय सीमाओं से परे हो सकते हैं।
पोर्टलों की प्रभावशीलता संस्थानों द्वारा सूचना साझाकरण और त्वरित प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने 18 अगस्त 2025 को प्रतिभूति बाजार के संपूर्ण इकोसिस्टम में साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए दो नए डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए। नई दिल्ली में आयोजित साइबर डिफेंस सेमिनार में की गई यह घोषणा वित्तीय क्षेत्र में साइबर खतरों से निपटने की दिशा में एक बड़ा नियामकीय कदम है।

मुख्य घटनाक्रम

सेबी ने दो पहलों की शुरुआत की है — संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल और नया साइबर सुरक्षा पोर्टल। संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक व्यवस्थित, समयबद्ध और सुसंगत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह पोर्टल वित्तीय स्थिरता बोर्ड (FSB) के घटना रिपोर्टिंग एक्सचेंज प्रारूप (FIRE) के अनुरूप है, जिससे सीमा-पार रिपोर्टिंग में आने वाली बाधाएँ कम होंगी।

दूसरा पोर्टल — साइबर सुरक्षा पोर्टल — सभी हितधारकों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी, कमजोरियों की चेतावनियाँ, नीतिगत उपाय और घटनाओं से मिले अनुभव साझा करने के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में काम करेगा।

सेबी चेयरमैन की चेतावनी

पांडे ने सेमिनार में स्पष्ट किया कि साइबर खतरे संगठनात्मक और नियामकीय सीमाओं से परे होते हैं और इनका असर आपस में जुड़े संस्थानों — यहाँ तक कि राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी — हो सकता है। उन्होंने कहा, 'किसी एक संगठन से शुरू होने वाली साइबर घटना वेंडरों, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, थर्ड पार्टी या अन्य जुड़े संस्थानों के जरिए फैल सकती है।' इसलिए साइबर रेजिलिएंस को केवल व्यक्तिगत संस्थानों तक सीमित न रखकर पूरे वित्तीय इकोसिस्टम में मजबूत करना ज़रूरी है।

गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमलों की संख्या में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके मद्देनजर यह कदम विशेष महत्व रखता है।

पोर्टल की प्रभावशीलता पर जोर

पांडे ने स्पष्ट किया कि ये महज तकनीकी मंच नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थान सूचना साझा करने, घटनाओं से सीखने और त्वरित प्रतिक्रिया देने में इनका कितना प्रभावी उपयोग करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी एक संस्थान पर हुए साइबर हमले से मिली सीख दूसरे संस्थानों की सुरक्षा में सहायक होनी चाहिए।

आम जनता और बाजार पर असर

प्रतिभूति बाजार में करोड़ों निवेशकों का पैसा लगा है और साइबर सुरक्षा की कमज़ोरियाँ सीधे उनके निवेश और डेटा को खतरे में डाल सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब SEBI-पंजीकृत ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस और डिपॉजिटरी सभी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अत्यधिक निर्भर हो चुके हैं। FIRE प्रारूप के अनुरूप रिपोर्टिंग से अंतर्राष्ट्रीय नियामकों के साथ समन्वय भी सुगम होगा।

क्या होगा आगे

सेबी से अपेक्षा है कि वह इन दोनों पोर्टलों के उपयोग के लिए सभी पंजीकृत मध्यस्थों को दिशानिर्देश जारी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि FIRE प्रारूप को अपनाने से भारत वैश्विक वित्तीय साइबर सुरक्षा मानकों के और करीब आएगा। आने वाले महीनों में इन पोर्टलों के क्रियान्वयन की समीक्षा नियामक के लिए एक अहम परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अनुपालन की गहराई में है — पोर्टल लॉन्च करना और उन्हें प्रभावी ढंग से उपयोग में लाना दो अलग बातें हैं। भारतीय वित्तीय संस्थानों में साइबर घटनाओं की कम रिपोर्टिंग एक ज्ञात समस्या रही है, जहाँ संस्थान प्रतिष्ठा के डर से घटनाओं को छुपाते हैं। FIRE प्रारूप को अपनाना अंतर्राष्ट्रीय मानकों से तालमेल की दिशा में सही है, परंतु बिना कड़े प्रवर्तन तंत्र और सीटी-ब्लोअर संरक्षण के, ये पोर्टल महज औपचारिकता बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने कौन से दो नए साइबर पोर्टल लॉन्च किए हैं?
सेबी ने संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल और नया साइबर सुरक्षा पोर्टल लॉन्च किए हैं। पहला पोर्टल साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग को व्यवस्थित और समयबद्ध बनाता है, जबकि दूसरा हितधारकों के बीच साइबर सुरक्षा जानकारी साझा करने का केंद्रीय मंच है।
FIRE प्रारूप क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
FIRE यानी घटना रिपोर्टिंग एक्सचेंज प्रारूप, वित्तीय स्थिरता बोर्ड (FSB) द्वारा विकसित एक मानकीकृत ढाँचा है। इसे अपनाने से भारतीय नियामक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग में एकरूपता ला सकेंगे और सीमा-पार रिपोर्टिंग की बाधाएँ कम होंगी।
इन पोर्टलों से प्रतिभूति बाजार के निवेशकों को क्या फायदा होगा?
इन पोर्टलों से साइबर घटनाओं की त्वरित पहचान और रिपोर्टिंग संभव होगी, जिससे निवेशकों के डेटा और निवेश को खतरे में डालने वाले हमलों पर जल्द काबू पाया जा सकेगा। साइबर सुरक्षा पोर्टल के जरिए संस्थान एक-दूसरे के अनुभव से सीखकर अपनी सुरक्षा और मजबूत कर सकेंगे।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने साइबर खतरों पर क्या कहा?
पांडे ने कहा कि साइबर खतरे संगठनात्मक और राष्ट्रीय सीमाओं से परे होते हैं और एक संस्थान से शुरू हुई घटना वेंडरों व थर्ड पार्टी के जरिए पूरे इकोसिस्टम में फैल सकती है। उन्होंने जोर दिया कि साइबर रेजिलिएंस पूरे वित्तीय तंत्र में सामूहिक रूप से मजबूत की जानी चाहिए।
क्या ये पोर्टल सभी वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य होंगे?
सेबी की ओर से अभी तक अनिवार्यता पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं। अपेक्षा है कि सेबी जल्द ही सभी पंजीकृत मध्यस्थों — ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस और डिपॉजिटरी — के लिए उपयोग संबंधी निर्देश जारी करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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