सेबी का बड़ा प्रस्ताव: कॉरपोरेट बॉन्ड में खुदरा निवेशकों की पहुंच के लिए FICP ढांचा, टियर-2 और ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 23 अगस्त 2026 को कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक नए वितरण ढांचे का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्तावित ढांचा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) मॉडल की तर्ज पर तैयार किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य टियर-2, टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के निवेशकों को इन उत्पादों से जोड़ना है।
FICP ढांचा क्या है और यह कैसे काम करेगा
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स (FICP) को स्टॉक एक्सचेंजों के साथ पंजीकृत किया जाएगा और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPP) द्वारा नियुक्त किया जाएगा। ये पार्टनर निवेशकों को फिक्स्ड-इनकम उत्पादों की विशेषताओं और उनसे जुड़े जोखिमों को समझने, आवश्यक दस्तावेज पूरे करने और विनियमित प्लेटफॉर्म पर लेनदेन करने में सहायता प्रदान करेंगे।
सेबी का यह कदम उसी सफल वितरण मॉडल को फिक्स्ड-इनकम बाजार में लागू करने की कोशिश है, जिसने म्यूचुअल फंड को छोटे शहरों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि MFD नेटवर्क ने पिछले एक दशक में देश के दूरदराज के इलाकों में म्यूचुअल फंड निवेश को लोकप्रिय बनाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का विस्तार: आंकड़े क्या कहते हैं
सेबी के अनुसार, पिछले एक दशक में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में जबरदस्त उछाल आया है। वित्त वर्ष 2014-15 के अंत में बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड का आंकड़ा करीब ₹17.5 लाख करोड़ था, जो 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर ₹60 लाख करोड़ से अधिक हो गया। इनमें से सूचीबद्ध कॉरपोरेट बॉन्ड का मूल्य करीब ₹46 लाख करोड़ है, जो कुल बाजार का लगभग 76.6 प्रतिशत है।
इस वृद्धि के बावजूद डेट सिक्योरिटीज तक मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों की ही पहुंच बनी हुई है और खुदरा निवेशकों की भागीदारी सीमित रही है — यह वह संरचनात्मक खामी है जिसे सेबी इस नए ढांचे से दूर करना चाहता है।
RFQ प्लेटफॉर्म पर तेज उछाल, फिर भी पहुंच की चुनौती बरकरार
नियामक ने बताया कि मौजूदा OBPP व्यवस्था ने खुदरा निवेशकों को सूचीबद्ध डेट सिक्योरिटीज तक ऑनलाइन पहुंच देने में मदद की है। रिक्वेस्ट फॉर कोट (RFQ) प्लेटफॉर्म पर ट्रेड की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 2.76 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 17.84 लाख हो गई — यह करीब 546 प्रतिशत की वृद्धि है। सेबी ने कहा कि इस उछाल में OBPP के जरिए बढ़ती खुदरा भागीदारी का बड़ा योगदान रहा।
हालांकि, सेबी ने माना कि बड़े शहरी केंद्रों से बाहर के निवेशकों तक पहुंच बनाने में अभी भी एक संरचनात्मक कमी मौजूद है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और नियामक दोनों वित्तीय समावेशन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
FICP बनने के लिए क्या होंगी शर्तें
प्रस्ताव के अनुसार, निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करने वाले व्यक्ति और गैर-व्यक्तिगत संस्थाएं दोनों FICP बन सकेंगे। व्यक्तिगत आवेदकों के लिए भारतीय नागरिकता, न्यूनतम 18 वर्ष की आयु, 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना और NISM-सीरीज: फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज प्रमाणपत्र जैसी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं।
आगे क्या होगा
सेबी ने यह प्रस्ताव हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तैयार किया है और अब इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की जा सकती हैं। यदि यह ढांचा लागू होता है, तो यह भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और छोटे शहरों के निवेशकों के लिए फिक्स्ड-इनकम उत्पादों तक पहुंच का नया रास्ता खुलेगा।