NSE CEO आशीष चौहान की सलाह: शेयर भाव नहीं, कारोबार की बुनियाद मज़बूत करें
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने 26 जून 2026 को निवेशकों और उद्यमियों को स्पष्ट संदेश दिया कि शेयर की दैनिक कीमतों पर नज़र रखने के बजाय लाभदायक और टिकाऊ कारोबार खड़ा करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दीर्घकाल में किसी भी कंपनी का वास्तविक बाज़ार मूल्य उसके ठोस कारोबारी प्रदर्शन से ही निर्धारित होता है।
मुख्य संदेश: कारोबार ही असली पहचान
मुंबई स्थित NSE परिसर में आयोजित जेआईटीओ इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन (JIIF) के स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए चौहान ने कहा, 'आपका असली बिजनेस आपके संचालन में है, शेयर की कीमत में नहीं। शेयर बाज़ार सिर्फ आपके कारोबार का प्रतिबिंब है, वह आपका कारोबार नहीं है।' यह बात उन्होंने विशेष रूप से स्टार्टअप संस्थापकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) संचालकों को संबोधित करते हुए कही।
पब्लिक लिस्टिंग: एक रणनीतिक अवसर
चौहान ने स्टार्टअप और MSME को सुझाया कि वे शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने को एक रणनीतिक विकास-अवसर के रूप में देखें। उनके अनुसार, पूंजी बाज़ार भारत के उद्यमियों की विकास यात्रा को गति देने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा, 'पब्लिक लिस्टिंग के ज़रिए संस्थापक बिना नियंत्रण छोड़े अपने कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटा सकते हैं। शुरुआत में प्रमोटर अपनी कंपनी की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बाज़ार में ला सकते हैं, जबकि 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रख सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर बाद में धीरे-धीरे और हिस्सेदारी जारी की जा सकती है।'
लिस्टिंग के फायदे
चौहान ने शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने के कई लाभ गिनाए — कारोबार विस्तार के लिए पूंजी की उपलब्धता, कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार, कंपनी की विश्वसनीयता में वृद्धि, प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने की क्षमता, और बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सुगमता। उन्होंने यह भी कहा कि सूचीबद्ध होने से भविष्य की उत्तराधिकार योजना और परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति-बंटवारे की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो जाती है।
मूल्यांकन का व्यावहारिक उदाहरण
चौहान ने एक ठोस उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि कोई कंपनी सालाना ₹2 करोड़ का मुनाफा कमा रही है, तो शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने के बाद उसका बाज़ार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइज़ेशन) ₹40 करोड़ से ₹50 करोड़ तक पहुँच सकता है। उनके अनुसार, यह मूल्यांकन निजी स्तर पर संभव नहीं होता और इससे प्रमोटर को नई पूंजी जुटाने, नए साझेदार जोड़ने और विस्तार करने के बेहतर अवसर मिलते हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत में स्टार्टअप और MSME की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और सरकार भी इन्हें पूंजी बाज़ार से जोड़ने के प्रयास कर रही है। चौहान की यह सलाह उन उद्यमियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो अल्पकालिक बाज़ार उतार-चढ़ाव से विचलित होकर दीर्घकालिक कारोबारी रणनीति से भटक जाते हैं। NSE प्रमुख का यह स्पष्ट आह्वान भारतीय उद्यमिता को एक नई दिशा देने की कोशिश है।