क्या पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष 2025 में 38.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई?

Click to start listening
क्या पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष 2025 में 38.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई?

सारांश

पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष 2025 में 38.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो विदेशी कामकाजी नागरिकों की मेहनत को दर्शाती है। हालांकि, बढ़ती निर्भरता पर अर्थशास्त्रियों ने चिंता व्यक्त की है। जानें इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव क्या हैं।

Key Takeaways

  • रेमिटेंस का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।
  • बढ़ती निर्भरता आर्थिक असंतुलन का संकेत है।
  • रेमिटेंस का अधिकांश हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में उपयोग होता है।
  • स्थानीय उद्योगों को मजबूती की आवश्यकता है।
  • समाज में रेमिटेंस के असमान वितरण से असमानता बढ़ रही है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशों में कार्यरत पाकिस्तानियों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर चुकी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, एफवाई25 में रेमिटेंस 38.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

रेमिटेंस में इस उछाल ने पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान की है और ऐसे समय में घरेलू खपत में वृद्धि की है, जब देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

हालांकि, डेली टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब विदेशों से भेजी गई रेमिटेंस देश के वस्तु निर्यात से भी अधिक हो चुकी है। एफवाई-25 में पाकिस्तान का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट केवल मामूली बढ़त के साथ लगभग 32.3 अरब डॉलर तक पहुंच सका।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिति पाकिस्तान की आर्थिक संरचना में गहरे असंतुलन की ओर इशारा करती है, जहां व्यापार और उद्योग से होने वाली कमाई की तुलना में विदेशों से भेजा गया धन कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा दैनिक खर्चों में लगाया जाता है, न कि दीर्घकालिक निवेश में। इससे अल्पकाल में परिवारों को सहारा मिलता है और अर्थव्यवस्था में गतिविधि बनी रहती है, लेकिन उद्योगों को मजबूती, निर्यात में विस्तार या उत्पादकता में सुधार नहीं हो पाता।

लंबे समय में रेमिटेंस पर अत्यधिक निर्भरता से वास्तविक विनिमय दर ऊंची बनी रह सकती है, जिससे घरेलू उत्पाद वैश्विक बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।

इस बढ़ती निर्भरता के सामाजिक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक विदेश में काम करने से परिवारों पर दबाव पड़ता है, खासकर बच्चों और जीवनसाथियों पर जो देश में रहते हैं। जिन क्षेत्रों में रेमिटेंस आय का प्रमुख स्रोत है, वहां युवा स्थानीय कौशल विकसित करने, व्यवसाय शुरू करने या देश में अवसर तलाशने के बजाय विदेश जाने को प्राथमिकता देने लगते हैं, जिससे स्थानीय आर्थिक गतिविधि कमजोर होती है।

इसके अलावा, रेमिटेंस का असमान क्षेत्रीय वितरण सामाजिक और आर्थिक असमानता को और बढ़ा सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी इसके असर देखे जा रहे हैं। रेमिटेंस पर निर्भर परिवार निजी स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जिससे सरकार पर सार्वजनिक सेवाओं में सुधार का दबाव कम हो जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे नीतिगत ढिलाई आ सकती है और आवश्यक संस्थागत सुधारों की गति धीमी पड़ सकती है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रेमिटेंस अत्यंत मूल्यवान है और यह विदेशों में रहने वाले लाखों पाकिस्तानियों की मेहनत और त्याग को दर्शाती है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि इसे आर्थिक सुधारों का स्थायी विकल्प नहीं बनने देना चाहिए।

Point of View

बल्कि घरेलू उद्योगों को भी मजबूत करे।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

रेमिटेंस क्या होती है?
रेमिटेंस वह धन है जो विदेशों में काम करने वाले लोग अपने देश के परिवारों को भेजते हैं।
पाकिस्तान में रेमिटेंस का महत्व क्या है?
पाकिस्तान में रेमिटेंस घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
क्या रेमिटेंस पर निर्भरता स्थायी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि रेमिटेंस पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक असंतुलन का कारण बन सकती है।
रेमिटेंस का सामाजिक प्रभाव क्या है?
रेमिटेंस के कारण परिवारों पर दबाव बढ़ता है, विशेषकर बच्चों और जीवनसाथियों पर, जो देश में रहते हैं।
पाकिस्तान के निर्यात में रेमिटेंस की तुलना कैसे है?
वर्तमान में, पाकिस्तान की रेमिटेंस निर्यात से अधिक हो गई है, जो आर्थिक असंतुलन का संकेत है।
Nation Press