पाकिस्तान में दवाओं की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि, रावलपिंडी में 500 प्रतिशत तक का इजाफा
सारांश
Key Takeaways
- दवाओं की कीमतों में वृद्धि 50%25 से 500%25 तक हुई है।
- कम आय वाले मरीज इलाज से वंचित हो रहे हैं।
- गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है।
- सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
- ईरान से गैस सप्लाई में कमी आई है।
इस्लामाबाद, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच, पाकिस्तान में दवाओं की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही है। स्थानीय समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलपिंडी के फार्मास्युटिकल हब, बोहोर बाजार में दवाओं की कीमतों में 50 प्रतिशत से लेकर 500 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, पेट की समस्याओं और खांसी जैसी बिमारियों के लिए आवश्यक दवाओं की कीमतें बढ़ गई हैं। मशहूर अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, खुले बाजार में इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 पाकिस्तानी रुपये (पीकेआर) से बढ़कर 4,720 पीकेआर हो गई है।
रविवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि विटामिन बी सप्लीमेंट्स का दाम 500 पीकेआर से बढ़कर 600 पीकेआर हो गया है। इसी तरह, बदहजमी और एसिडिटी की दवा के एक पैकेट की कीमत 530 पीकेआर से बढ़कर 620 पीकेआर हो गई है। न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स और विटामिन टैबलेट के एक पैक की कीमत 480 पीकेआर से बढ़कर 510 पीकेआर हो गई है।
थायरॉइड दवा की कीमत 85 पीकेआर से बढ़कर 290 पीकेआर हो गई है। वहीं, टाइफाइड के सामान्य इलाज की कीमत 805 पीकेआर से बढ़कर 930 पीकेआर हो गई है। कई अन्य जीवनरक्षक दवाओं की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
इस वृद्धि को “असहनीय” बताया जा रहा है। इंसुलिन डिवाइस की कीमत 2,000 से 5,000 पीकेआर के बीच पहुंचने के कारण कम आय वाले मरीज जरूरी इलाज से वंचित हो रहे हैं, और उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
इसी बीच, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पाकिस्तान में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की औसत कीमत 11.67 किलोग्राम वाले सिलेंडर के लिए 3,150-3,968 पीकेआर से बढ़कर 3,900-5,135 पीकेआर हो गई है।
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) द्वारा 26 मार्च को जारी 'सेंसिटिव प्राइस इंडेक्स' (एसपीआई) के आंकड़ों के आधार पर, पाकिस्तान के एक अन्य प्रमुख अख़बार 'डॉन' ने कहा कि सबसे अधिक कीमतें पंजाब प्रांत के शहरों में बढ़ी हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे-जैसे गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, एलपीजी से चलने वाले निजी वाहनों का किराया भी बढ़ गया है। इससे एलपीजी पर निर्भर कम और मध्यम आय वाले यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
संघर्ष के चलते एलपीजी की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के साथ, ईरान से गैस की सप्लाई में भी कमी आई है। पहले ईरान से रोजाना 10,000 से 12,000 टन गैस की सप्लाई होती थी, लेकिन ईद और नवरोज की छुट्टियों के कारण यह कम हो गई है। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की स्थायी समिति के संयोजक एम. अली हैदर के अनुसार, मार्च में लगभग 20,000 टन आयातित एलपीजी लेकर तीन जहाज पाकिस्तान पहुंचे हैं।