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मोदी के 25 साल: इंडस्ट्री ने सराहा, IMC अध्यक्ष बोले — 'करिश्माई नेतृत्व ने दी स्थिरता'

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मोदी के 25 साल: इंडस्ट्री ने सराहा, IMC अध्यक्ष बोले — 'करिश्माई नेतृत्व ने दी स्थिरता'

सारांश

मोदी के सरकारी नेतृत्व के 25 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने वाइब्रेंट गुजरात से लेकर वैश्विक मंच तक की उनकी यात्रा को सराहा। साथ ही, आरबीआई की रेपो रेट बढ़ोतरी और एसबीआई के दिसंबर तक 6% के अनुमान ने कारोबारी लागत को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने उनकी सराहना की।
IMC चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर महेंद्र चौहान ने कहा कि मोदी के कार्यकाल ने नीतिगत स्थिरता और वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाई।
RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किया; उद्योग ने निकट भविष्य में कटौती न होने पर चिंता जताई।
SBI रिसर्च के अनुसार, दिसंबर तक रेपो रेट 50 आधार अंक और बढ़ सकता है; डॉ.
सौम्य कांति घोष ने 6% को उचित स्तर बताया।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही; विदेशी मुद्रा भंडार और सेवा निर्यात मज़बूत बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में — पहले गुजरात के मुख्यमंत्री, फिर प्रधानमंत्री — 25 वर्ष पूरे होने पर 7 अक्टूबर 2026 को भारतीय उद्योग जगत ने उनके नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उन्होंने देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उद्योग विशेषज्ञों ने इस मौके पर आरबीआई की रेपो रेट नीति पर भी अपनी राय रखी।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष प्रोफेसर महेंद्र चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक करिश्माई नेता हैं। उन्होंने कहा, 'जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत की, जिसने राज्य में निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही उन्होंने गिफ्ट सिटी की परिकल्पना को भी साकार किया।'

चौहान ने आगे कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने देश की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार दी है और वैश्विक मंच पर भारत की साख को मज़बूत किया है। उन्होंने कहा, 'जब भी मैं विदेश जाता हूँ, तो यह बात खुद महसूस होती है।'

चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री पद पर मोदी के लंबे कार्यकाल ने देश को नीतिगत स्थिरता प्रदान की है, जिससे कारोबारी जगत अधिक आत्मविश्वास के साथ निवेश संबंधी निर्णय ले पा रहा है।

रेपो रेट पर उद्योग की चिंता

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत करने पर प्रोफेसर चौहान ने कहा कि यह बढ़ोतरी बाज़ार की उम्मीदों के अनुरूप थी। हालाँकि, उन्होंने चेताया कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना को नकारना कारोबारी लागत बढ़ा सकता है।

चौहान ने आरबीआई से अपील की कि आगे का कोई भी नीतिगत कदम ठोस आर्थिक आँकड़ों के आधार पर उठाया जाए। उन्होंने इस संदर्भ में याद दिलाया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है, सेवा क्षेत्र के निर्यात में तेज़ी आई है और विदेशी मुद्रा भंडार भी मज़बूत बना हुआ है।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के रिसर्च विभाग ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि आरबीआई दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 50 आधार अंक तक और बढ़ा सकता है, हालाँकि यह काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि यदि वैश्विक हालात अस्थिर होते हैं, तो आरबीआई के लिए बेहतर होगा कि वह छोटी-छोटी बढ़ोतरी के बजाय एकमुश्त दर वृद्धि का विकल्प चुने।

विशेषज्ञ की राय

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि 'दिसंबर तक रेपो रेट को 6 प्रतिशत तक ले जाना सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सामने अब मुख्यतः दो ही विकल्प हैं — दरें बढ़ाना या उन्हें स्थिर रखना — और यह निर्णय बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित होगा।

आगे की राह

मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक प्रशासन के सफर को लेकर उद्योग जगत का यह सकारात्मक मूल्यांकन ऐसे समय में आया है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपेक्षाकृत मज़बूत बनी हुई है। आरबीआई की आगामी नीतिगत बैठकों में ब्याज दर का रुख स्पष्ट होने के साथ ही कारोबारी जगत की निवेश योजनाएँ भी आकार लेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस अवसर पर आरबीआई की रेपो रेट नीति पर की गई टिप्पणी एक महत्वपूर्ण संकेत देती है — उद्योग जगत नेतृत्व की तारीफ के साथ-साथ बढ़ती ब्याज दरों से उपजी कारोबारी लागत को लेकर सतर्क है। गौरतलब है कि 7.8% की जीडीपी वृद्धि के बावजूद, यदि दिसंबर तक रेपो रेट 6% तक पहुँचता है, तो निजी निवेश पर इसका प्रभाव नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। एसबीआई रिसर्च का 'एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी' का सुझाव आरबीआई की परंपरागत क्रमिक नीति से अलग है और यह देखना होगा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच MPC इस राय को कितनी तवज्जो देती है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी के 25 साल के कार्यकाल पर उद्योग जगत की क्या राय है?
उद्योग जगत ने मोदी के 25 वर्षीय नेतृत्व को सकारात्मक रूप से आंका है। IMC चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर महेंद्र चौहान ने कहा कि उनके करिश्माई नेतृत्व ने नीतिगत स्थिरता, निवेश आकर्षण और वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि की है।
वाइब्रेंट गुजरात और गिफ्ट सिटी का मोदी के कार्यकाल से क्या संबंध है?
जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की शुरुआत की, जिसने राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया। इसी दौर में उन्होंने गिफ्ट सिटी की परियोजना को भी आगे बढ़ाया, जो आज भारत का पहला वैश्विक वित्तीय और आईटी सेवा केंद्र है।
RBI ने रेपो रेट कितना बढ़ाया और इसका कारोबार पर क्या असर होगा?
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। उद्योग जगत को चिंता है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना न होने से कारोबारी लागत बढ़ सकती है।
SBI रिसर्च ने दिसंबर की मौद्रिक नीति को लेकर क्या अनुमान लगाया है?
SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 50 आधार अंक तक और बढ़ा सकता है, जो वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने दिसंबर तक रेपो रेट को 6% तक ले जाना उचित बताया है।
भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति क्या है?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही है। सेवा क्षेत्र के निर्यात में तेज़ी आई है और विदेशी मुद्रा भंडार भी मज़बूत बना हुआ है, जो समग्र आर्थिक स्थिरता का संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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