9 अक्टूबर 2026
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सीएफआई के 25 साल: प्रेसिडेंट एमवी सतीश ने गिनाईं उपलब्धियाँ, जीएसटी फैसलों को बताया स्वागत योग्य

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सीएफआई के 25 साल: प्रेसिडेंट एमवी सतीश ने गिनाईं उपलब्धियाँ, जीएसटी फैसलों को बताया स्वागत योग्य

सारांश

कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया अपनी सिल्वर जुबली पर उपलब्धियाँ गिन रहा है — सरकार के साथ सहयोग की नीति, प्रीकास्ट को टेंडर में जगह, और GST में राहत। अध्यक्ष सतीश का संदेश साफ है: बदलते मौद्रिक माहौल में उद्योग को नई वास्तविकता के साथ चलना होगा।

मुख्य बातें

कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अपने 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
अध्यक्ष एमवी सतीश ने जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के फैसलों को उद्योग के लिए स्वागत योग्य बताया।
प्रॉसिक्यूशन देनदारी सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किए जाने को निर्माण क्षेत्र के लिए सकारात्मक बदलाव बताया गया।
RBI की नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी को सतीश ने पहले से अपेक्षित कदम करार दिया।
सरकारी टेंडर में प्रीकास्ट निर्माण प्रावधान शामिल होना सीएफआई की प्रमुख नीतिगत उपलब्धि बताई गई।
इनपुट टैक्स क्रेडिट और इनपुट टैक्स सर्विसेज के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा अभी बाकी है।

कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन के अध्यक्ष एमवी सतीश ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में संगठन की यात्रा, सरकार के साथ सहयोग की रणनीति, जीएसटी सुधारों और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख माँगों पर विस्तार से बात की। सतीश ने जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के फैसलों को उद्योग के लिए सकारात्मक बताया और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी को अपेक्षित कदम करार दिया।

सिल्वर जुबली पर सीएफआई की यात्रा

एमवी सतीश ने कहा कि संगठन अपनी सिल्वर जुबली मना रहा है और अब तक का सफर संतोषजनक रहा है। उन्होंने बताया कि सीएफआई ने हमेशा सरकार के साथ टकराव की बजाय सहयोग की नीति अपनाई, जिससे निर्माण क्षेत्र के अनेक ज्वलंत मुद्दों का समाधान संभव हुआ। सरकार की ओर से भी संगठन की बात सुनने और उस पर प्रतिक्रिया देने का प्रयास किया गया, जिसे सतीश ने इस साझेदारी की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान उद्योग को राहत देने से जुड़े मुद्दों पर सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया का विशेष उल्लेख किया। यह रेखांकित करते हुए कि संकट के वक्त नीति-निर्माताओं तक पहुँच बनाना कितना महत्वपूर्ण है, सतीश ने इसे सीएफआई की संगठनात्मक परिपक्वता का प्रमाण बताया।

प्रीकास्ट तकनीक और ठेकेदारों की माँगें

सतीश ने बताया कि सीएफआई ने सरकार के सामने कई तकनीकी विषय भी रखे, जिनमें प्रीकास्ट निर्माण प्रणाली को बढ़ावा देने की माँग प्रमुख थी। बाद में सरकारी टेंडर की शर्तों में प्रीकास्ट से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए, जिससे इस तकनीक के विस्तार की संभावना प्रबल हुई। ठेकेदारों की उचित और वास्तविक माँगों पर भी सरकारी स्तर पर विचार जारी है।

जीएसटी काउंसिल के फैसले: उद्योग की प्रतिक्रिया

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश ने कहा कि संगठन के नज़रिए से अधिकतर फैसले स्वागत योग्य हैं। विशेष रूप से उन्होंने अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रॉसिक्यूशन देनदारी की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किए जाने का फैसला उद्योग के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक है और इससे संबंधित पक्षों को राहत मिल सकती है।

हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट और इनपुट टैक्स सर्विसेज से जुड़े कुछ प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन अभी बाकी है। इन बिंदुओं की गहन समीक्षा के बाद ही उनके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर कोई निश्चित राय बनाना उचित होगा।

RBI की दर वृद्धि और आवासीय बाज़ार पर असर

RBI द्वारा नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी पर सतीश ने कहा कि यह कदम उद्योग जगत के लिए अपेक्षित था। उनके अनुसार भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आने वाले समय में आसान मौद्रिक नीति की स्थिति बने रहने की संभावना नहीं है और पैसे की उपलब्धता अब पहले जैसी सुलभ नहीं रहेगी।

आवासीय संपत्तियों की कीमतों के भविष्य पर उन्होंने कोई निश्चित अनुमान देने से परहेज़ किया, लेकिन यह संकेत ज़रूर दिया कि मौद्रिक परिवेश अब पहले की तुलना में कम अनुकूल रहेगा। उद्योग को इस बदली हुई वित्तीय वास्तविकता के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी।

आगे की राह

गौरतलब है कि सीएफआई देश के निर्माण ठेकेदारों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है और इसके 25 वर्ष पूरे होना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सतीश के अनुसार संगठन आगे भी सरकार के साथ नीतिगत संवाद जारी रखेगा और जीएसटी के शेष प्रावधानों की समीक्षा के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रावधानों पर अभी भी स्पष्टता का अभाव बताना यह संकेत देता है कि उद्योग की सभी माँगें अभी अधूरी हैं। RBI की दर वृद्धि को 'अपेक्षित' बताना रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए सतर्कता का संकेत है — सस्ते ऋण के युग के खत्म होने से आवासीय माँग पर दबाव आ सकता है, जो अब तक इस क्षेत्र की वृद्धि का बड़ा आधार रही है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) क्या है?
सीएफआई भारत के निर्माण ठेकेदारों का प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है, जो उद्योग की नीतिगत माँगों को सरकार के सामने रखता है। वर्ष 2026 में संगठन ने अपने 25 वर्ष पूरे किए।
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में निर्माण क्षेत्र को क्या राहत मिली?
बैठक में प्रॉसिक्यूशन देनदारी की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई, जिसे सीएफआई ने उद्योग के लिए सकारात्मक बताया। इनपुट टैक्स क्रेडिट और इनपुट टैक्स सर्विसेज से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा अभी जारी है।
RBI की 25 बेसिस प्वाइंट दर वृद्धि का निर्माण क्षेत्र पर क्या असर होगा?
सीएफआई अध्यक्ष एमवी सतीश के अनुसार यह कदम अपेक्षित था और अब पैसा पहले की तरह सुलभ नहीं रहेगा। भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आसान मौद्रिक नीति की स्थिति आगे भी बने रहने की संभावना कम है।
प्रीकास्ट निर्माण तकनीक को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाया?
सीएफआई की माँग पर सरकारी टेंडर की शर्तों में प्रीकास्ट निर्माण से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए, जिससे इस तकनीक को बढ़ावा मिलने की संभावना बनी। सतीश ने इसे संगठन की एक प्रमुख नीतिगत उपलब्धि बताया।
आवासीय संपत्तियों की कीमतें आगे बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी?
एमवी सतीश ने इस पर कोई निश्चित अनुमान देने से परहेज़ किया, लेकिन संकेत दिया कि मौद्रिक परिवेश अब पहले की तुलना में कम अनुकूल रहेगा। उद्योग को बदली हुई वित्तीय वास्तविकता के अनुरूप रणनीति बनानी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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