सीएफआई के 25 साल: प्रेसिडेंट एमवी सतीश ने गिनाईं उपलब्धियाँ, जीएसटी फैसलों को बताया स्वागत योग्य
सारांश
मुख्य बातें
कंस्ट्रक्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन के अध्यक्ष एमवी सतीश ने 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में संगठन की यात्रा, सरकार के साथ सहयोग की रणनीति, जीएसटी सुधारों और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख माँगों पर विस्तार से बात की। सतीश ने जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के फैसलों को उद्योग के लिए सकारात्मक बताया और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी को अपेक्षित कदम करार दिया।
सिल्वर जुबली पर सीएफआई की यात्रा
एमवी सतीश ने कहा कि संगठन अपनी सिल्वर जुबली मना रहा है और अब तक का सफर संतोषजनक रहा है। उन्होंने बताया कि सीएफआई ने हमेशा सरकार के साथ टकराव की बजाय सहयोग की नीति अपनाई, जिससे निर्माण क्षेत्र के अनेक ज्वलंत मुद्दों का समाधान संभव हुआ। सरकार की ओर से भी संगठन की बात सुनने और उस पर प्रतिक्रिया देने का प्रयास किया गया, जिसे सतीश ने इस साझेदारी की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान उद्योग को राहत देने से जुड़े मुद्दों पर सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया का विशेष उल्लेख किया। यह रेखांकित करते हुए कि संकट के वक्त नीति-निर्माताओं तक पहुँच बनाना कितना महत्वपूर्ण है, सतीश ने इसे सीएफआई की संगठनात्मक परिपक्वता का प्रमाण बताया।
प्रीकास्ट तकनीक और ठेकेदारों की माँगें
सतीश ने बताया कि सीएफआई ने सरकार के सामने कई तकनीकी विषय भी रखे, जिनमें प्रीकास्ट निर्माण प्रणाली को बढ़ावा देने की माँग प्रमुख थी। बाद में सरकारी टेंडर की शर्तों में प्रीकास्ट से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए, जिससे इस तकनीक के विस्तार की संभावना प्रबल हुई। ठेकेदारों की उचित और वास्तविक माँगों पर भी सरकारी स्तर पर विचार जारी है।
जीएसटी काउंसिल के फैसले: उद्योग की प्रतिक्रिया
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश ने कहा कि संगठन के नज़रिए से अधिकतर फैसले स्वागत योग्य हैं। विशेष रूप से उन्होंने अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रॉसिक्यूशन देनदारी की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किए जाने का फैसला उद्योग के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक है और इससे संबंधित पक्षों को राहत मिल सकती है।
हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट और इनपुट टैक्स सर्विसेज से जुड़े कुछ प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन अभी बाकी है। इन बिंदुओं की गहन समीक्षा के बाद ही उनके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर कोई निश्चित राय बनाना उचित होगा।
RBI की दर वृद्धि और आवासीय बाज़ार पर असर
RBI द्वारा नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी पर सतीश ने कहा कि यह कदम उद्योग जगत के लिए अपेक्षित था। उनके अनुसार भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आने वाले समय में आसान मौद्रिक नीति की स्थिति बने रहने की संभावना नहीं है और पैसे की उपलब्धता अब पहले जैसी सुलभ नहीं रहेगी।
आवासीय संपत्तियों की कीमतों के भविष्य पर उन्होंने कोई निश्चित अनुमान देने से परहेज़ किया, लेकिन यह संकेत ज़रूर दिया कि मौद्रिक परिवेश अब पहले की तुलना में कम अनुकूल रहेगा। उद्योग को इस बदली हुई वित्तीय वास्तविकता के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि सीएफआई देश के निर्माण ठेकेदारों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है और इसके 25 वर्ष पूरे होना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सतीश के अनुसार संगठन आगे भी सरकार के साथ नीतिगत संवाद जारी रखेगा और जीएसटी के शेष प्रावधानों की समीक्षा के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा।