SBI चेयरमैन CS शेट्टी का बड़ा बयान: RBI MPC बैठक के बीच कहा- ब्याज दरों में स्थिरता ही अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी (चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी) ने 3 जून को नई दिल्ली में कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक के बीच फ़िलहाल ब्याज दरों में किसी बदलाव से बचना ही अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा। उनके अनुसार महंगाई पर निगरानी आवश्यक है, परन्तु इस समय दरों में स्थिरता आर्थिक गतिविधियों को संतुलित गति देगी और विकास को मज़बूती प्रदान करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए शेट्टी ने कहा कि बाज़ार की आम धारणा भी यही है कि RBI इस दौर में दरों में बदलाव नहीं करेगा। उनके मुताबिक दरों पर विराम आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
निवेशकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि शेयर बाज़ार के रोज़ाना उतार-चढ़ाव की बजाय भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढाँचे के व्यापक विस्तार के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
UPI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर
शेट्टी ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आज UPI के ज़रिए हर महीने करीब 20 अरब ट्रांज़ैक्शन हो रहे हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले SBI की है। उन्होंने दावा किया कि SBI के प्लेटफ़ॉर्म पर तकनीकी विफलता की दर मात्र 0.01 प्रतिशत है।
उन्होंने ‘जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी’ और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को वित्तीय समावेशन की रीढ़ बताते हुए कहा कि इन तंत्रों ने सरकारी योजनाओं की लीकेज को बड़े पैमाने पर खत्म किया है।
2030 तक ₹200 लाख करोड़ निवेश की ज़रूरत
SBI के आंतरिक आकलन का हवाला देते हुए शेट्टी ने कहा कि 2030 तक देश को लगभग ₹200 लाख करोड़ के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, MSME और नवाचार जैसे क्षेत्रों में लगभग ₹450 लाख करोड़ के निवेश की संभावनाएँ हैं।
उन्होंने ग्रामीण समृद्धि, शहरी विकास, शिक्षा-स्वास्थ्य निवेश और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को भारत की प्रगति का मुख्य स्तंभ बताया।
AI, कर्ज़ की माँग और M&A फाइनेंसिंग
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए शेट्टी ने कहा कि भले ही भारत के पास अभी दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियाँ नहीं हैं, परन्तु अपनाने (adoption) के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार बन सकता है। उन्होंने बताया कि SBI पर्सनल लोन सहित कई क्षेत्रों में AI-आधारित मॉडल का उपयोग कर रहा है और बैंक ने ‘रिस्पॉन्सिबल AI’ फ्रेमवर्क भी लागू किया है।
कर्ज़ की माँग पर उन्होंने कहा कि SME सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की माँग मज़बूत बनी हुई है और ECLGS के तहत भी बड़ी संख्या में उद्यमी बैंक से संपर्क कर रहे हैं। M&A फाइनेंसिंग के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि एक बड़ा सौदा पूरा हो चुका है, एक प्रक्रिया जारी है और जल्द ही एक और बड़े सौदे के पूरा होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
MPC के नतीजे आने वाले दिनों में दरों की दिशा तय करेंगे, लेकिन देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक के चेयरमैन का यह बयान संकेत देता है कि बैंकिंग क्षेत्र फ़िलहाल यथास्थिति को विकास-समर्थक मान रहा है।