अब घर बैठे सरेंडर करें अपना एलपीजी कनेक्शन, पीएनजी उपयोगकर्ताओं के लिए नया तरीका
सारांश
Key Takeaways
- पीएनजी उपयोगकर्ता अब घर बैठे अपने एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर कर सकते हैं।
- 'मायपीएनजी-डी पोर्टल' का उपयोग करें।
- कोई डीलरशिप पर जाने की आवश्यकता नहीं।
- सरकार का प्रयास स्वच्छ ईंधन तक पहुंच बढ़ाना है।
- 1,797 उपभोक्ताओं ने पहले ही कनेक्शन सरेंडर किया है।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव नीरज मित्तल ने शुक्रवार को घोषणा की कि जो उपभोक्ता पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का उपयोग कर रहे हैं, वे अब अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर या एलपीजी आईडी का इस्तेमाल करते हुए, बिना किसी डीलर के पास जाए, अपने एलपीजी कनेक्शन को घर बैठे ही सरेंडर कर सकते हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म, 'मायपीएनजी-डी पोर्टल' लॉन्च किया है, जिससे उनका एलपीजी कनेक्शन ऑनलाइन सरेंडर करना आसान हो जाएगा।
इस नई सेवा के बारे में जानकारी देते हुए मित्तल ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले से ही पीएनजी का उपयोग शुरू कर दिया है, उन्हें अब अपने कनेक्शन को सरेंडर करने के लिए एलपीजी डीलरों के पास नहीं जाना पड़ेगा।
अब यह प्रक्रिया केवल अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर या एलपीजी आईडी का उपयोग करके घर से ही की जा सकती है।
मित्तल ने कहा कि पीएनजी उपभोक्ता अब बिना किसी डीलरशिप के पास गए अपने एलपीजी कनेक्शन को आसानी से सरेंडर कर सकते हैं। आपको केवल अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर या एलपीजी आईडी की आवश्यकता है।
इस कदम का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और अधिक उपभोक्ताओं को स्वेच्छा से अपने एलपीजी कनेक्शन छोड़ने के लिए प्रेरित करना है, ताकि ये कनेक्शन उन परिवारों को दिए जा सकें जिनके पास अभी पीएनजी की सुविधा नहीं है।
सचिव के अनुसार, पोर्टल के लॉन्च होने के पहले दिन ही 1,797 उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।
उन्होंने इन उपभोक्ताओं को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया और अन्य लोगों से भी इस पहल का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने कहा, "आप भी अपने एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करें और उन लोगों की मदद करें जिनके पास पीएनजी की सुविधा नहीं है।"
सरकार का विश्वास है कि ऐसे कदम स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच बढ़ाने और एलपीजी कनेक्शनों के वितरण को बेहतर बनाने में सहायक होंगे, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अभी भी पारंपरिक ईंधन स्रोतों पर निर्भर हैं।