पब्लिक वाई-फाई बने भारत के ब्रॉडबैंड का अहम पूरक: BIF ने TRAI के परामर्श पत्र का किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
नीति थिंक-टैंक ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) ने 3 जून को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के उस दृष्टिकोण का स्वागत किया, जिसमें पब्लिक वाई-फाई को सस्ती और सर्वसुलभ ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई है। फोरम का कहना है कि भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए केवल मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।
मुख्य सिफारिशें और दृष्टिकोण
सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार पर TRAI के परामर्श पत्र के जवाब में BIF ने कहा कि पब्लिक वाई-फाई इंटरनेट सेवाओं को अधिक किफायती बना सकता है, इनडोर कनेक्टिविटी को बेहतर कर सकता है, स्पेक्ट्रम की दक्षता बढ़ा सकता है और मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते ट्रैफिक का बोझ कम कर सकता है।
फोरम ने TRAI से एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति की सिफारिश करने का आग्रह किया, जिसमें बुनियादी ढाँचे का विस्तार, बड़े स्तर पर इकोसिस्टम का विकास, तकनीकी आधुनिकीकरण तथा उपयोगकर्ताओं में जागरूकता और अपनाने को बढ़ावा देना शामिल हो।
PM-WANI को मिले व्यापक मंच से जोड़ने का सुझाव
BIF ने सुझाव दिया कि PM-WANI को भारतनेट, राज्य स्तरीय फाइबर नेटवर्क, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और अन्य सार्वजनिक डिजिटल परिसंपत्तियों के साथ जोड़ा जाए, ताकि देशभर में वाई-फाई हॉटस्पॉट की स्थापना तेज़ हो सके।
फोरम ने कहा कि PM-WANI को मज़बूत करने के लिए कुछ बड़े सुपर PDOA (पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर), स्केलेबल PDOA और ऐप प्रदाताओं का इकोसिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, जिससे अलग-अलग हॉटस्पॉट्स को एक विश्वसनीय, इंटरऑपरेबल और निवेश के अनुकूल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में बदला जा सके।
BIF अध्यक्ष का बयान
ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन ने कहा कि पब्लिक वाई-फाई देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं में से एक है, जिसमें ‘डिजिटल खाई’ को कम करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि PM-WANI ने वर्षों से चले आ रहे नियामकीय प्रतिबंधों को हटाकर भारत के पब्लिक वाई-फाई इकोसिस्टम को खोल दिया है और इसे बड़े स्तर तक पहुँचने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
रामचंद्रन ने यह भी कहा कि ऐसा इकोसिस्टम विकसित होना चाहिए, जहाँ दूरसंचार सेवा प्रदाता (TSP) और इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) पब्लिक वाई-फाई को प्रतिस्पर्धी सेवा के बजाय ब्रॉडबैंड विस्तार के एक पूरक अवसर के रूप में देखें।
तकनीकी रोडमैप और इंटरऑपरेबिलिटी
फोरम ने निर्बाध रोमिंग, ऑथेंटिकेशन और नेटवर्क खोज (डिस्कवरी) के लिए खुले इंटरऑपरेबिलिटी मानक विकसित करने की सिफारिश की, ताकि वाई-फाई का उपयोग मोबाइल ब्रॉडबैंड जितना आसान और सहज बन सके। साथ ही वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के लिए राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया गया, जिसके लिए सस्ते उपकरणों की उपलब्धता, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन और इमारतों को तकनीकी रूप से तैयार करने की व्यवस्था ज़रूरी बताई गई।
दूरदराज़ क्षेत्रों और स्थानीय निकायों की भूमिका
BIF ने कहा कि जहाँ बाज़ार-आधारित सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं या पर्याप्त नहीं हैं, वहाँ सार्वजनिक वित्तपोषण का उपयोग किया जा सकता है, और विशेष रूप से दूरदराज़ और कम विकसित क्षेत्रों में पब्लिक वाई-फाई के विस्तार पर ध्यान दिया जाना चाहिए। फोरम ने यह भी सुझाव दिया कि नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका केवल अनुमति देने तक सीमित न रहे, बल्कि वे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने में सक्रिय भागीदार बनें।
आगे की राह में TRAI के परामर्श पत्र पर मिले सुझावों के आधार पर अंतिम सिफ़ारिशें तय होंगी, जो भारत के पब्लिक वाई-फाई विस्तार की दिशा निर्धारित कर सकती हैं।