पंजाब में किसानों ने खरीदीं 21,019 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें, सुपर सीडर सबसे लोकप्रिय
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के किसानों ने चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) की 21,019 मशीनें खरीदी हैं, जो पराली जलाने पर अंकुश लगाने की दिशा में राज्य की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में यह जानकारी दी और बताया कि सुपर सीडर किसानों के बीच सर्वाधिक पसंदीदा उपकरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी के साथ हुई यह बड़े पैमाने की खरीद, फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति राज्य के दृष्टिकोण में आए बुनियादी बदलाव को दर्शाती है।
मशीनों की श्रेणीवार खरीद
पाँच सबसे अधिक बिकने वाली मशीनों की सूची में सुपर सीडर शीर्ष पर रहा, जिसकी 14,274 इकाइयाँ किसानों ने खरीदीं। दूसरे स्थान पर मल्चर रहा जिसकी 1,721 इकाइयाँ, और तीसरे स्थान पर हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी हल रहा जिसकी 1,346 इकाइयाँ बिकीं। जीरो टिल ड्रिल और बेलिंग मशीन क्रमशः चौथे और पाँचवें स्थान पर रहे, जिनकी बिक्री 1,123 और 927 यूनिट रही। इसके अतिरिक्त, पुआल रेक की भी उल्लेखनीय माँग रही और 874 यूनिट की बिक्री दर्ज की गई।
सब्सिडी ढाँचा और सरकारी सहायता
मंत्री खुदियां ने बताया कि व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC), किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियाँ और पंचायतें 80 प्रतिशत सब्सिडी के लिए पात्र हैं। राज्य सरकार के इन प्रयासों को 2026-27 के लिए ₹576 करोड़ की एक व्यापक कार्य योजना का समर्थन प्राप्त है।
पराली जलाने में 90 प्रतिशत की कमी
इन पहलों के परिणामस्वरूप पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या लगभग 90 प्रतिशत घटकर 2022 के 49,922 मामलों से 2025 में 5,114 रह गई। इस प्रगति को देखते हुए पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन रणनीति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। गौरतलब है कि पराली जलाना उत्तर भारत में, विशेष रूप से दिल्ली-NCR में, सर्दियों के वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक रहा है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय एजेंसियाँ भी कड़ी नज़र रखती हैं।
कृषि और पर्यावरण लाभ
मंत्री ने बताया कि सुपर सीडर और जीरो-टिल ड्रिल किसानों को धान के अवशेषों में सीधे गेहूँ बोने में सक्षम बनाते हैं, जिससे समय की बचत होती है और मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है। बेलर और रेक बिजली उत्पादन और पशु चारे जैसे उपयोगों के लिए पराली के संग्रहण में सहायक हैं, जिससे किसान अवशेष को बोझ की बजाय एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने लगे हैं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की किसान-कल्याण प्रतिबद्धता को दोहराते हुए खुदियां ने कहा कि राज्य पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और न्यायिक निकाय लगातार पंजाब और हरियाणा पर पराली जलाने पर अंकुश लगाने का दबाव बना रहे हैं। CRM मशीनों की बढ़ती खरीद यह संकेत देती है कि जमीनी बदलाव अब केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं है।