21 अक्टूबर 2026
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पंजाब में किसानों ने खरीदीं 21,019 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें, सुपर सीडर सबसे लोकप्रिय

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पंजाब में किसानों ने खरीदीं 21,019 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें, सुपर सीडर सबसे लोकप्रिय

सारांश

पंजाब में किसानों ने इस सीजन 21,019 CRM मशीनें खरीदीं — सुपर सीडर सबसे आगे। 50-80% सब्सिडी और ₹576 करोड़ की कार्य योजना के बल पर पराली जलाने की घटनाएँ 2022 से 90% घटकर 2025 में 5,114 रह गईं।

मुख्य बातें

पंजाब के किसानों ने चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) की 21,019 मशीनें खरीदीं।
सुपर सीडर सबसे लोकप्रिय रहा — 14,274 इकाइयाँ बिकीं; इसके बाद मल्चर ( 1,721 ) और हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी हल ( 1,346 ) का स्थान रहा।
व्यक्तिगत किसानों को 50% और CHC, FPO, पंचायतों को 80% सब्सिडी दी जा रही है।
राज्य सरकार की ₹576 करोड़ की कार्य योजना ( 2026-27 ) इन पहलों को समर्थन दे रही है।
पराली जलाने की घटनाएँ 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं — लगभग 90% की कमी।

पंजाब के किसानों ने चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) की 21,019 मशीनें खरीदी हैं, जो पराली जलाने पर अंकुश लगाने की दिशा में राज्य की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में यह जानकारी दी और बताया कि सुपर सीडर किसानों के बीच सर्वाधिक पसंदीदा उपकरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी के साथ हुई यह बड़े पैमाने की खरीद, फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति राज्य के दृष्टिकोण में आए बुनियादी बदलाव को दर्शाती है।

मशीनों की श्रेणीवार खरीद

पाँच सबसे अधिक बिकने वाली मशीनों की सूची में सुपर सीडर शीर्ष पर रहा, जिसकी 14,274 इकाइयाँ किसानों ने खरीदीं। दूसरे स्थान पर मल्चर रहा जिसकी 1,721 इकाइयाँ, और तीसरे स्थान पर हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी हल रहा जिसकी 1,346 इकाइयाँ बिकीं। जीरो टिल ड्रिल और बेलिंग मशीन क्रमशः चौथे और पाँचवें स्थान पर रहे, जिनकी बिक्री 1,123 और 927 यूनिट रही। इसके अतिरिक्त, पुआल रेक की भी उल्लेखनीय माँग रही और 874 यूनिट की बिक्री दर्ज की गई।

सब्सिडी ढाँचा और सरकारी सहायता

मंत्री खुदियां ने बताया कि व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC), किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियाँ और पंचायतें 80 प्रतिशत सब्सिडी के लिए पात्र हैं। राज्य सरकार के इन प्रयासों को 2026-27 के लिए ₹576 करोड़ की एक व्यापक कार्य योजना का समर्थन प्राप्त है।

पराली जलाने में 90 प्रतिशत की कमी

इन पहलों के परिणामस्वरूप पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या लगभग 90 प्रतिशत घटकर 2022 के 49,922 मामलों से 2025 में 5,114 रह गई। इस प्रगति को देखते हुए पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन रणनीति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। गौरतलब है कि पराली जलाना उत्तर भारत में, विशेष रूप से दिल्ली-NCR में, सर्दियों के वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक रहा है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय एजेंसियाँ भी कड़ी नज़र रखती हैं।

कृषि और पर्यावरण लाभ

मंत्री ने बताया कि सुपर सीडर और जीरो-टिल ड्रिल किसानों को धान के अवशेषों में सीधे गेहूँ बोने में सक्षम बनाते हैं, जिससे समय की बचत होती है और मिट्टी की नमी संरक्षित रहती है। बेलर और रेक बिजली उत्पादन और पशु चारे जैसे उपयोगों के लिए पराली के संग्रहण में सहायक हैं, जिससे किसान अवशेष को बोझ की बजाय एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने लगे हैं।

आगे की राह

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की किसान-कल्याण प्रतिबद्धता को दोहराते हुए खुदियां ने कहा कि राज्य पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और न्यायिक निकाय लगातार पंजाब और हरियाणा पर पराली जलाने पर अंकुश लगाने का दबाव बना रहे हैं। CRM मशीनों की बढ़ती खरीद यह संकेत देती है कि जमीनी बदलाव अब केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि मशीनों की खरीद वास्तविक उपयोग में कितनी तब्दील होती है — अतीत में सब्सिडी-संचालित खरीद और जमीनी इस्तेमाल के बीच बड़ी खाई देखी गई है। 2022 से 2025 के बीच पराली जलाने में 90% की गिरावट एक मज़बूत संकेत है, लेकिन 5,114 घटनाएँ अभी भी दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता पर असर डालने के लिए पर्याप्त हैं। ₹576 करोड़ की कार्य योजना तभी टिकाऊ होगी जब मशीन-उपयोग की स्वतंत्र निगरानी और सैटेलाइट डेटा से क्रॉस-वेरिफिकेशन सुनिश्चित हो।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें क्या होती हैं?
CRM मशीनें वे कृषि उपकरण हैं जो किसानों को धान की पराली को जलाने की बजाय उसे खेत में मिलाने, संग्रहित करने या अगली फसल बोने में उपयोग करने में सक्षम बनाती हैं। इनमें सुपर सीडर, जीरो टिल ड्रिल, मल्चर, बेलर और रेक जैसे उपकरण शामिल हैं।
पंजाब सरकार CRM मशीनों पर कितनी सब्सिडी दे रही है?
व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC), किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियाँ और पंचायतें 80 प्रतिशत सब्सिडी के लिए पात्र हैं। यह सहायता 2026-27 के लिए ₹576 करोड़ की कार्य योजना के तहत दी जा रही है।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कितनी कमी आई है?
आँकड़ों के अनुसार, पराली जलाने की घटनाएँ 2022 के 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गई हैं — यानी लगभग 90 प्रतिशत की कमी। इस उपलब्धि के लिए पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
सुपर सीडर मशीन किसानों के लिए इतनी उपयोगी क्यों है?
सुपर सीडर किसानों को धान के अवशेषों में सीधे गेहूँ बोने में सक्षम बनाती है, जिससे खेत की तैयारी में लगने वाला समय और लागत दोनों कम होती है। इससे मिट्टी की नमी भी संरक्षित रहती है और पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
पराली जलाने से वायु प्रदूषण पर क्या असर पड़ता है?
पराली जलाना उत्तर भारत में, विशेष रूप से दिल्ली-NCR में, सर्दियों के गंभीर वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है। CRM मशीनों के बढ़ते उपयोग से पराली जलाने की घटनाओं में कमी आने से इस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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