18 जुलाई 2026
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क्या आरबीआई ग्राहकों की सुरक्षा के लिए अंतरिक लोकपाल को और शक्तियाँ देगा?

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क्या आरबीआई ग्राहकों की सुरक्षा के लिए अंतरिक लोकपाल को और शक्तियाँ देगा?

सारांश

आरबीआई ने वाणिज्य बैंकों के अंतरिक लोकपाल को अधिक शक्तियाँ देने का फैसला किया है, जिससे ग्राहकों की शिकायतों का समाधान प्रभावी रूप से हो सकेगा। जानें इस योजना के पीछे के उद्देश्यों और संभावित प्रभावों के बारे में।

मुख्य बातें

अंतरिक लोकपाल को अधिक शक्तियाँ देने का निर्णय।
ग्राहकों की शिकायतों के समाधान में सुधार।
द्वि-स्तरीय संरचना का कार्यान्वयन।
मास्टर निर्देश का मसौदा जल्द जारी होगा।
ग्रामीण सहकारी बैंकों को भी शामिल किया जाएगा।

मुंबई, 1 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को जानकारी दी कि ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बैंक ने वाणिज्य बैंकों के अंतरिक लोकपाल (आईओ) को कंपनसेशन पावर और शिकायतकर्ता तक पहुंच देने का निर्णय लिया है। इससे आईओ की भूमिका आरबीआई के लोकपाल की भूमिका के और करीब हो जाएगी।

केंद्रीय बैंक ने रेगुलेटेड संस्थाओं (आरई) जैसे बैंकों और एनबीएफसी में आईओ प्रणाली को संस्थागत रूप से स्थापित किया है, जिससे आंतरिक लोकपाल द्वारा अस्वीकृत शिकायतों की स्वतंत्र शीर्ष स्तरीय समीक्षा संभव हो सकेगी। इस कदम से आंतरिक लोकपाल की प्रभावशीलता में भी वृद्धि होगी।

इसके अलावा, आईओ को शिकायत भेजने से पहले शिकायत निवारण के लिए विनियमित संस्थाओं के भीतर एक द्वि-स्तरीय संरचना स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों की शिकायतों का सार्थक और समय पर समाधान प्रदान करना है, जिससे सेवा मानकों और उपभोक्ता विश्वास में सुधार होगा।

आरबीआई गवर्नर ने यह भी बताया कि मास्टर निर्देश का एक मसौदा जल्द ही जनता की प्रतिक्रिया के लिए जारी किया जाएगा।

रिजर्व बैंक द्वारा शुरू की गई एकीकृत लोकपाल योजना (आरबी-आईओएस) 12 नवंबर, 2021 को लागू की गई थी। यह योजना विनियमित संस्थाओं (आरई) के ग्राहकों को त्वरित, लागत प्रभावी और शीघ्र वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करती है।

मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान में इस योजना में शामिल विनियमित संस्थाओं में वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक, 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक जमा राशि वाले गैर-अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक, चयनित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और क्रेडिट सूचना कंपनियां शामिल हैं।

ग्रामीण सहकारी बैंकों के ग्राहकों को आरबीआई लोकपाल की व्यवस्था तक पहुंच प्रदान करने के लिए, राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को आरबीआई लोकपाल योजना के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जल्द ही एक अधिसूचना जारी की जाएगी।

अंत में, परिचालन अनुभव, हितधारकों की प्रतिक्रिया और ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के आधार पर, रिजर्व बैंक ने इस योजना की व्यापक समीक्षा की है। इस समीक्षा का उद्देश्य स्पष्टता बढ़ाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और समय-सीमा को कम करना है ताकि समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी निवारण को और बेहतर बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए मसौदा योजना जल्द ही रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने अंतरिक लोकपाल को क्यों शक्तियाँ दी हैं?
आरबीआई ने ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायतों के समाधान को प्रभावी बनाने के लिए अंतरिक लोकपाल को अधिक शक्तियाँ दी हैं।
क्या आईओ का कार्यक्षेत्र बढ़ने से ग्राहकों को लाभ होगा?
हाँ, आईओ के कार्यक्षेत्र के बढ़ने से ग्राहकों की शिकायतों का शीघ्र और उचित समाधान संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
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