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क्या आरबीआई ने रुपए को स्थिर रखने के लिए जून में स्पॉट फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की?

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क्या आरबीआई ने रुपए को स्थिर रखने के लिए जून में स्पॉट फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपए की स्थिरता को बनाए रखने के लिए जून में 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की? इस लेख में हम आरबीआई की इस रणनीति के पीछे के कारणों और इसके आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

मुख्य बातें

आरबीआई ने 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की है।
जून में रुपए पर दबाव बना रहा।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है।
मुद्रास्फीति में गिरावट जारी है।
एसएंडपी की रेटिंग में सुधार हुआ है।

मुंबई, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय बैंक के मासिक बुलेटिन के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जून में स्पॉट फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की।

केंद्रीय बैंक ने जून के दौरान 1.16 अरब डॉलर की खरीद और 4.83 अरब डॉलर की बिक्री की जानकारी दी। इसके पूर्व, बैंक ने मई में स्पॉट मार्केट से 1.76 अरब डॉलर की खरीदारी की थी।

जून में, अमेरिकी टैरिफ के प्रति अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से धन निकालने के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना रहा। रुपए के मूल्य में भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई ने डॉलर बेचने का विकल्प चुना।

इसी बीच, भारत के बाह्य क्षेत्र ने मजबूती दिखाई, चालू खाता घाटा मामूली रहा और विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात को पूरा करने के लिए पर्याप्त था।

वित्त मंत्रालय की 'मासिक आर्थिक समीक्षा' के अनुसार, टैरिफ समायोजन और बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के बाह्य क्षेत्र की मजबूती इसके स्थिर मैक्रोइकोनॉमिक परिवेश में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रही है।

बुलेटिन में कहा गया है कि मामूली मूल्यह्रास के बावजूद, जुलाई में प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में रुपया सबसे कम अस्थिर मुद्राओं में से एक रहा। अगस्त में, एसएंडपी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार की घोषणा के बाद, भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कुछ बढ़त दर्ज की।

भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में, आरबीआई ने कहा कि जुलाई में औद्योगिक गतिविधियाँ धीमी रहीं, जबकि सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार हुआ, जिससे विकास की गति बनी रही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में लगातार नौवें महीने मुख्य मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय स्थितियाँ अनुकूल और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के लिए सहायक रहीं।

एसएंडपी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार भविष्य में पूंजी प्रवाह और सॉवरेन यील्ड के लिए सकारात्मक संकेत है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भारत के विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 4.1 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि आईएमएफ के साथ देश की आरक्षित निधि 1.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.754 अरब डॉलर हो गई। ये आंकड़े भारत के बढ़ते वित्तीय बफर और बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता को दर्शाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हम मानते हैं कि आरबीआई का यह कदम रुपए की स्थिरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। जबकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। यह स्थिति हमें भविष्य के लिए आशा देती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने जून में कितनी राशि बेची?
आरबीआई ने जून में स्पॉट फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में 3.66 अरब डॉलर की बिक्री की।
क्या रुपए की स्थिति में सुधार होगा?
हालांकि अनिश्चितताएँ हैं, लेकिन आरबीआई के कदमों से रुपए की स्थिरता में मदद मिल सकती है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कैसा है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
क्या एसएंडपी की रेटिंग में सुधार का कोई असर होगा?
हाँ, एसएंडपी द्वारा रेटिंग में सुधार भविष्य में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दे सकता है।
क्या मुख्य मुद्रास्फीति में कमी आई है?
हाँ, जुलाई में लगातार नौवें महीने मुख्य मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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