एसजीबी 2019-20 सीरीज III का प्रीमैच्योर रिडेम्पशन शुरू, ₹3,449 का निवेश बना ₹15,310
सारांश
मुख्य बातें
सॉवेरन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज III के निवेशकों के लिए 14 अगस्त 2026 से प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रिडेम्पशन मूल्य ₹15,310 प्रति यूनिट निर्धारित किया है — जो इसके ₹3,449 प्रति यूनिट के इश्यू प्राइस से लगभग चार गुना अधिक है। यह बॉन्ड मूल रूप से 14 अगस्त 2019 को जारी किया गया था।
रिडेम्पशन मूल्य कैसे तय होता है
RBI के नियमों के अनुसार, SGB का रिडेम्पशन मूल्य इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस के साधारण औसत पर आधारित होता है। यह औसत रिडेम्पशन तिथि से ठीक पहले के तीन कारोबारी दिनों का लिया जाता है। SGB की एक यूनिट की वैल्यू लगभग एक ग्राम सोने के बराबर होती है।
प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की शर्तें
RBI के SGB नियमों के तहत, बॉन्ड जारी होने की तारीख से पाँच वर्ष बाद, ब्याज भुगतान की तारीख पर प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का विकल्प मिलता है। 2019-20 सीरीज III के लिए यह पाँच वर्ष की अवधि अब पूरी हो चुकी है, इसलिए निवेशक सोमवार से इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
SGB की विशेषताएँ और लाभ
SGB को नवंबर 2015 में केंद्र सरकार ने RBI के सहयोग से शुरू किया था। इसका उद्देश्य देश में फिजिकल गोल्ड की माँग को कम करना था। विशेषज्ञों के अनुसार, SGB को अब तक की सबसे बेहतर गोल्ड निवेश योजनाओं में गिना जाता है, क्योंकि इसमें मूल निवेश पर 2.5% वार्षिक ब्याज भी मिलता है — जो सोने की कीमत में वृद्धि से अलग और अतिरिक्त लाभ है।
कैपिटल गेन टैक्स में बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2026 से SGB रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन छूट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। फाइनेंस बिल, 2026 के अनुसार, कैपिटल गेन पर कर-छूट केवल तभी मिलेगी जब निवेशक बॉन्ड को ओरिजिनल इश्यू तिथि से लेकर पूर्ण मैच्योरिटी तक अपने पास रखे। सरकार के बजट 2026 के FAQ में स्पष्ट किया गया है कि पाँच साल के लॉक-इन के बाद भी प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर यह कर-छूट लागू नहीं होगी। यह बदलाव उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो आज रिडेम्पशन ले रहे हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊँचाई के करीब हैं, जिससे SGB निवेशकों को असाधारण रिटर्न मिल रहा है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे रिडेम्पशन से पहले नए कैपिटल गेन टैक्स नियमों के निहितार्थ को अपने वित्तीय सलाहकार से समझ लें।