26 जून 2026
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सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लाइटहाउस की आधारशिला रखी, जलमार्ग को मिलेगा नया बल

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सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लाइटहाउस की आधारशिला रखी, जलमार्ग को मिलेगा नया बल

सारांश

गुवाहाटी में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने चार नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी, जिससे अंतर्देशीय जलमार्गों को मजबूती मिलेगी। यह पहल भारत के जल परिवहन को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्य बातें

ब्रह्मपुत्र नदी पर चार नए प्रकाशस्तंभों की स्थापना 84 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत 20 मीटर ऊंचाई और सौर ऊर्जा संचालित जलमार्गों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम वित्तीय वर्ष 2024-25 में माल ढुलाई में 53% वृद्धि का अनुमान

गुवाहाटी, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्‍ल्‍यू) सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर चार नदी प्रकाशस्तंभों का आधारशिला समारोह आयोजित किया। यह कदम देश के अंतर्देशीय जलमार्ग की नौवहन प्रणाली को सशक्त बनाएगा।

यह देश में अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाशस्तंभों की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस समारोह का आयोजन गुवाहाटी के लाचित घाट पर किया गया, जिसमें पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्‍ल्‍यू) के अंतर्गत आने वाले प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाश जहाज महानिदेशालय (डीजीएलएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) ने भाग लिया।

इन चार प्रकाशस्तंभों की स्थिति इस प्रकार है - डिब्रूगढ़ जिले में बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) जिले में पांडू, नागांव जिले में सिलघाट (सभी नदी के दक्षिणी तट पर) और बिश्वनाथ जिले में बिश्वनाथ घाट (उत्तरी तट पर स्थित एकमात्र स्थल)। ये सभी ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थित हैं। चारों प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है।

प्रत्येक प्रकाशस्तंभ की ऊंचाई 20 मीटर होगी, जिसकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील और प्रकाशीय सीमा 8-10 समुद्री मील होगी। ये प्रकाशस्तंभ पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। इसके अलावा, हर स्थान पर एक संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों का खेल क्षेत्र, स्मारिका दुकान और सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थान होगा, जिससे प्रत्येक प्रकाशस्तंभ एक पर्यटन स्थल के साथ-साथ कार्यात्मक समुद्री संपत्ति के रूप में विकसित होगा।

राष्ट्रीय जलमार्ग 2 (एनडब्‍ल्‍यू-2) पर इन प्रकाशस्तंभों के चालू होने से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 53 प्रतिशत की माल ढुलाई में वृद्धि का अनुमान है। एनडब्‍ल्‍यू-2 पर माल ढुलाई में निरंतर वृद्धि हो रही है, और ब्रह्मपुत्र गलियारा अब असम के चाय, कोयला और उर्वरक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखलाओं का अभिन्न अंग बन गया है। नए प्रकाशस्तंभ 24×7 सुरक्षित नौवहन को सक्षम बनाएंगे, मौसम अवलोकन सेंसरों को समायोजित करेंगे और नदी पर माल और यात्री दोनों की आवाजाही की सतत वृद्धि के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में, अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल सड़क और रेल परिवहन का विकल्प हैं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक शक्ति गुणक बन रहे हैं। जलमार्ग से एक टन माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में बहुत कम है और इससे हमारे राजमार्ग यातायात के लिए मुक्त रहते हैं। ये प्रकाशस्तंभ इस इरादे का प्रमाण हैं कि भारत की नदियां चौबीसों घंटे व्यापार के लिए खुली हैं।”

इस आधारशिला समारोह में असम सरकार के पर्यटन मंत्री रणजीत कुमार दास, परिवहन मंत्री चरण बोरो, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री जयंता मल्लाबरुआ, गुवाहाटी सांसद बिजुली कलिता मेधी और पूर्वी गुवाहाटी विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य मौजूद थे। इस अवसर पर बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार (आईएएस) और डीजीएलएल के महानिदेशक एन. मुरुगनंदम सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन प्रकाशस्तंभों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन प्रकाशस्तंभों का उद्देश्य अंतर्देशीय जलमार्गों की नौवहन प्रणाली को सशक्त बनाना और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना है।
प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत क्या है?
चारों प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत लगभग 84 करोड़ रुपये है।
प्रकाशस्तंभों की ऊंचाई कितनी होगी?
प्रत्येक प्रकाशस्तंभ की ऊंचाई 20 मीटर होगी।
ये प्रकाशस्तंभ किस ऊर्जा स्रोत से संचालित होंगे?
ये प्रकाशस्तंभ पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होंगे।
इस पहल का असम की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह पहल असम की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी, विशेष रूप से चाय और कोयला उद्योगों में।
राष्ट्र प्रेस
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