सर्बानंद सोनोवाल ने चार नदी प्रकाशस्तंभों की नींव रखी, अंतर्देशीय जलमार्ग को मिलेगी नई ताकत
सारांश
Key Takeaways
- चार नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी गई है।
- ये प्रकाशस्तंभ सौर ऊर्जा से संचालित होंगे।
- प्रकाशस्तंभों की कुल लागत लगभग 84 करोड़ रुपए है।
- ब्रह्मपुत्र जलमार्ग में 53 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।
- यह कदम पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देगा।
गुवाहाटी, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे चार नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी। यह पहल भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग नौवहन को एक नई मजबूती प्रदान करेगी।
यह देश में अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाशस्तंभों की स्थापना का पहला उदाहरण है।
इस आयोजन का आयोजन गुवाहाटी के लाचित घाट पर हुआ, जिसमें पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) के अंतर्गत आने वाले प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाश जहाज महानिदेशालय (डीजीएलएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने मिलकर इसे आयोजित किया।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ये चार प्रकाशस्तंभ - डिब्रूगढ़ जिले में बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) जिले में पांडू, नागांव जिले में सिलघाट (सभी दक्षिणी तट पर) और बिश्वनाथ जिले में बिश्वनाथ घाट (उत्तरी तट पर) - ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थित हैं। इन प्रकाशस्तंभों की कुल परियोजना लागत लगभग 84 करोड़ रुपए है।
प्रत्येक प्रकाशस्तंभ 20 मीटर ऊँचा होगा, जिसका भौगोलिक दायरा 14 समुद्री मील और प्रकाशीय दायरा 8-10 समुद्री मील होगा, और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसके अलावा, प्रत्येक स्थल पर एक संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों का खेल क्षेत्र, स्मारिका की दुकान और अन्य सुविधाएं होंगी, जो इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करेंगी।
राष्ट्रीय जलमार्ग 2 (एनडब्ल्यू-2) पर इन प्रकाशस्तंभों का निर्माण ब्रह्मपुत्र जलमार्ग में वित्तीय वर्ष 2024-25 में माल ढुलाई में 53 प्रतिशत की वृद्धि का कारण बनेगा। एनडब्ल्यू-2 पर माल ढुलाई में लगातार वृद्धि हो रही है और ब्रह्मपुत्र गलियारा अब असम के चाय, कोयला और उर्वरक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। नए प्रकाशस्तंभों की मदद से 24×7 सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित होगा, मौसम अवलोकन सेंसरों के समायोजन के साथ, जिससे नदी पर माल और यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में, अंतर्देशीय जलमार्ग ना केवल सड़क और रेल परिवहन का विकल्प हैं, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक शक्ति गुणक के रूप में कार्य कर रहे हैं। जलमार्ग से एक टन माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में बहुत कम है, कार्बन उत्सर्जन भी नगण्य है, और इससे हमारे राजमार्ग यातायात के लिए खुलते हैं। ब्रह्मपुत्र पर बने ये प्रकाशस्तंभ इस इरादे का प्रमाण हैं कि भारत की नदियां चौबीसों घंटे व्यापार के लिए खुली हैं।”
आधारशिला समारोह में असम सरकार के पर्यटन मंत्री रणजीत कुमार दास, परिवहन मंत्री चरण बोरो, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री जयंता मल्लाबरुआ, गुवाहाटी सांसद बिजुली कलिता मेधी और पूर्वी गुवाहाटी विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंत्रालय के सचिव विजय कुमार (आईएएस) और डीजीएलएल के महानिदेशक एन. मुरुगनंदम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।