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एसईसीएल का भारत के कोयला उत्पादन में 17% योगदान, वित्त वर्ष 2025-26 में 176.28 मिलियन टन उत्पादन

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एसईसीएल का भारत के कोयला उत्पादन में 17% योगदान, वित्त वर्ष 2025-26 में 176.28 मिलियन टन उत्पादन

सारांश

भारत ने लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन पार किया — और इस उपलब्धि में 17% हिस्सेदारी अकेले एसईसीएल की है। एक दशक में उत्पादकता दोगुनी और आपूर्ति में 46% वृद्धि के साथ, कोरबा की मेगा खदानें सही मायनों में भारत का ऊर्जा इंजन बन चुकी हैं।

मुख्य बातें

एसईसीएल ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल कोयला उत्पादन में 17% और सीआईएल के उत्पादन में 23% योगदान दिया।
कंपनी का उत्पादन 1985-86 के 34.2 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 176.28 मिलियन टन हो गया।
आउटपुट प्रति मैन शिफ्ट (ओएमएस) 2013-14 के 7.23 टन से बढ़कर 2025-26 में 16.47 टन हो गया — एक दशक में दोगुनी से अधिक वृद्धि।
कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) 122.03 मिलियन टन से बढ़कर 178.63 मिलियन टन पहुँची — 46% से अधिक की वृद्धि।
एसईसीएल ₹13,685 करोड़ के निवेश से 342.6 किलोमीटर रेल लाइन समेत दो नए रेल कॉरिडोर विकसित कर रही है।
भारत की 73% बिजली उत्पादन आवश्यकताएँ कोयले पर निर्भर; देश का कुल उत्पादन 1.04 अरब टन (अनंतिम) रहा।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल कोयला उत्पादन में लगभग 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की, जबकि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के कुल उत्पादन में इसका योगदान करीब 23 प्रतिशत रहा। केंद्र सरकार ने 12 सितंबर 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, एसईसीएल का कुल उत्पादन इस वित्त वर्ष में बढ़कर 176.28 मिलियन टन तक पहुँच गया।

एसईसीएल की उत्पादन यात्रा

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कोयला क्षेत्रों में परिचालन करने वाली सीआईएल की मिनी रत्न कंपनी एसईसीएल की स्थापना वर्ष 1985-86 में हुई थी, जब इसका उत्पादन केवल 34.2 मिलियन टन था। चार दशकों में यह आँकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 में 176.28 मिलियन टन तक पहुँच गया — जो स्थापना काल से पाँच गुना से अधिक की वृद्धि है।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 में एसईसीएल का उत्पादन 124.26 मिलियन टन था, जो 2025-26 तक 176.28 मिलियन टन हो गया। इसी अवधि में कंपनी की कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) 122.03 मिलियन टन से बढ़कर 178.63 मिलियन टन पहुँची — जो 46 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

उत्पादकता में ऐतिहासिक सुधार

खनन दक्षता का प्रमुख पैमाना माने जाने वाले आउटपुट प्रति मैन शिफ्ट (ओएमएस) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में यह मानक 7.23 टन था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 16.47 टन हो गया। अर्थात् एक दशक में प्रति शिफ्ट उत्पादकता दोगुनी से भी अधिक हो गई है — जो श्रम दक्षता में संरचनात्मक सुधार का संकेत है।

कंपनी वर्तमान में 13 राज्यों को कोयले की आपूर्ति कर रही है, जिससे यह देश के ऊर्जा वितरण नेटवर्क की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बन गई है।

कोरबा की मेगा खदानें: भारत का पावरहाउस

एसईसीएल के परिचालन का मुख्य केंद्र कोरबा स्थित तीन मेगा खदानें हैं — गेवरा, कुसमुंडा और दिपका। इन तीनों की संयुक्त क्षमता 185 मिलियन टन है। यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े कोयला खनन और बिजली उत्पादन केंद्रों में शुमार किया जाता है और इसे अक्सर 'भारत का पावरहाउस' कहा जाता है।

रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश

कोयले के निर्बाध परिवहन के लिए एसईसीएल इरकॉन इंटरनेशनल और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर दो महत्त्वाकांक्षी रेल परियोजनाएँ विकसित कर रही है — छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे कॉरिडोर और छत्तीसगढ़ ईस्ट-वेस्ट रेलवे कॉरिडोर

इन परियोजनाओं में लगभग ₹13,685 करोड़ का निवेश किया जा रहा है और इनके तहत करीब 342.6 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब कोयला परिवहन की बाधाएँ उत्पादन वृद्धि को पूरी तरह उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में अड़चन बन रही हैं।

राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका

कोयला मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में भारत की लगभग 73 प्रतिशत बिजली उत्पादन आवश्यकताएँ कोयले पर निर्भर हैं। इस पृष्ठभूमि में एसईसीएल की भूमिका केवल एक सार्वजनिक उपक्रम की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की आधारशिला की है। गौरतलब है कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन का आँकड़ा पार किया और देश का कुल उत्पादन 1.04 अरब टन (अनंतिम) दर्ज किया गया। आगे चलकर, रेल कॉरिडोर परियोजनाओं के पूर्ण होने पर उत्पादन और आपूर्ति के बीच की खाई और पाटी जा सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूकती है, वह यह है कि 73% बिजली उत्पादन कोयले पर निर्भर रहना और नए रेल कॉरिडोर में ₹13,685 करोड़ का निवेश — ये दोनों एक साथ यह संकेत देते हैं कि भारत की ऊर्जा संक्रमण की राह अभी भी जीवाश्म ईंधन पर गहरी टिकी है। उत्पादन क्षमता बढ़ाना तब तक अधूरी उपलब्धि है जब तक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और खदान-क्षेत्र के समुदायों पर असर का स्वतंत्र सत्यापन नहीं होता। 1 अरब टन का आँकड़ा ऊर्जा सुरक्षा की कामयाबी है, लेकिन 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य से इसकी दूरी पर बात होनी चाहिए।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसईसीएल का भारत के कोयला उत्पादन में कितना योगदान है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, एसईसीएल ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल कोयला उत्पादन में लगभग 17 प्रतिशत और कोल इंडिया लिमिटेड के कुल उत्पादन में करीब 23 प्रतिशत योगदान दिया। कंपनी का इस वित्त वर्ष में कुल उत्पादन 176.28 मिलियन टन रहा।
एसईसीएल की तीन मेगा खदानें कौन-सी हैं और उनकी क्षमता क्या है?
एसईसीएल की तीन मेगा खदानें छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित गेवरा, कुसमुंडा और दिपका हैं। इन तीनों की संयुक्त क्षमता 185 मिलियन टन है और इन्हें देश के सबसे बड़े कोयला खनन केंद्रों में गिना जाता है।
एसईसीएल की उत्पादकता में कितना सुधार हुआ है?
आउटपुट प्रति मैन शिफ्ट (ओएमएस) वर्ष 2013-14 में 7.23 टन था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 16.47 टन हो गया — यानी एक दशक में उत्पादकता दोगुनी से अधिक हो गई है। यह खनन दक्षता में संरचनात्मक सुधार का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
एसईसीएल किन रेल परियोजनाओं पर काम कर रही है?
एसईसीएल, इरकॉन इंटरनेशनल और छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे कॉरिडोर और छत्तीसगढ़ ईस्ट-वेस्ट रेलवे कॉरिडोर विकसित कर रही है। इन परियोजनाओं में लगभग ₹13,685 करोड़ का निवेश है और करीब 342.6 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जाएगी।
भारत के कुल कोयला उत्पादन का ताज़ा आँकड़ा क्या है?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन किया, और देश का कुल उत्पादन 1.04 अरब टन (अनंतिम) दर्ज किया गया। वर्तमान में भारत की लगभग 73 प्रतिशत बिजली उत्पादन आवश्यकताएँ कोयले पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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