सोना ₹1,292 महंगा होकर ₹1,49,430 प्रति 10 ग्राम; चांदी ₹2,21,109 प्रति किलो पार
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,292 प्रति 10 ग्राम बढ़कर ₹1,49,430 पर पहुँच गई, जो पिछले सप्ताह ₹1,48,138 प्रति 10 ग्राम थी। इसके साथ ही चांदी का भाव ₹280 की बढ़त के साथ ₹2,21,109 प्रति किलो हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत डॉलर और ऊँची बॉन्ड यील्ड के कारण दोनों कीमती धातुएँ इस हफ्ते सीमित दायरे में ही रहीं।
सोने के भाव में साप्ताहिक बदलाव
IBJA के अनुसार, 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,35,694 से बढ़कर ₹1,36,878 प्रति 10 ग्राम हो गई। 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,11,104 से बढ़कर ₹1,12,073 प्रति 10 ग्राम पर पहुँचा।
सोने का सबसे कम भाव इस सप्ताह 6 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹1,47,278 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि उच्चतम स्तर 9 अक्टूबर को सुबह के सत्र में ₹1,49,614 प्रति 10 ग्राम देखा गया।
चांदी में मामूली तेजी
चांदी की कीमत में तुलनात्मक रूप से कम उतार-चढ़ाव रहा। इस सप्ताह चांदी का उच्चतम भाव 5 अक्टूबर को शाम के सत्र में ₹2,24,157 प्रति किलो दर्ज हुआ। वहीं, न्यूनतम स्तर 7 अक्टूबर को शाम के सत्र में ₹2,20,866 प्रति किलो रहा।
गौरतलब है कि IBJA प्रतिदिन सुबह और शाम दो सत्रों में सोने-चांदी के सांकेतिक भाव जारी करता है, जो देशभर के बुलियन व्यापारियों और ज्वेलर्स के लिए संदर्भ दर का काम करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का हाल
वैश्विक स्तर पर सोने का भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुँच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों का यह स्तर घरेलू भाव पर भी दबाव और तेजी दोनों की संभावना बनाए रखता है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों सीमित रही तेजी
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में बनी रहीं। इसके पीछे मुख्य कारण बॉन्ड यील्ड का लगातार 5 प्रतिशत के आसपास बने रहना और कच्चे तेल का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिके रहना है। इसके अतिरिक्त, मजबूत अमेरिकी डॉलर ने भी दोनों धातुओं पर दबाव बनाए रखा।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ रुख करते हैं, लेकिन ऊँची यील्ड और मजबूत डॉलर सोने की चमक को कुछ हद तक धुंधला कर देते हैं। आने वाले सप्ताह में अमेरिकी आर्थिक आँकड़ों और फेडरल रिज़र्व के संकेतों पर नज़र रहेगी।