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तमिलनाडु में पवन-सौर ऊर्जा की हर 7 सेकंड पर निगरानी की योजना, उत्पादकों ने ट्रायल रन की माँग उठाई

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तमिलनाडु में पवन-सौर ऊर्जा की हर 7 सेकंड पर निगरानी की योजना, उत्पादकों ने ट्रायल रन की माँग उठाई

सारांश

तमिलनाडु में 9,000 से अधिक पवन प्रतिष्ठानों और 12,000 मेगावाट क्षमता के साथ हर 7 सेकंड पर डेटा संग्रह का प्रस्ताव ग्रिड प्रबंधन में क्रांति ला सकता है — लेकिन उत्पादकों का कहना है कि बिना ट्रायल के सीधे पूर्ण कार्यान्वयन जोखिम भरा है और अनुपालन की कड़ी शर्तें व्यावहारिक बाधाओं को नज़रअंदाज़ करती हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु की बिजली कंपनी पवन और सौर ऊर्जा डेटा को हर 7 सेकंड में एकत्र करने की योजना बना रही है, जो वर्तमान 15 दिन–1 महीने के अंतराल से कहीं अधिक तीव्र है।
नई व्यवस्था तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड, 2026 के तहत एससीएडीए तकनीक से स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर से जोड़ेगी।
सौर उत्पादकों के लिए दिसंबर 2026 और पवन उत्पादकों के लिए 30 अप्रैल 2027 तक कनेक्टिविटी की समय-सीमा तय की गई है।
उत्पादकों ने माँग की है कि पहले 1,000 जनरेटरों के साथ पायलट परीक्षण हो, जैसा मूल प्रस्ताव में था।
गैर-अनुपालन पर 10% उत्पादन एनर्जी अकाउंटिंग से बाहर, 30 दिन बाद पूरा उत्पादन सेटलमेंट से बाहर और 45 दिनों बाद और कार्रवाई का प्रावधान है।
तमिलनाडु में लगभग 9,000 पवन प्रतिष्ठान हैं जिनकी कुल क्षमता करीब 12,000 मेगावाट है।

तमिलनाडु की बिजली कंपनी ने ग्रिड प्रबंधन को अधिक सटीक और त्वरित बनाने के लिए पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन के डेटा को हर सात सेकंड में एकत्र करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। हालाँकि, रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादकों ने इस प्रणाली को पूरे क्षेत्र में लागू करने से पहले ट्रायल रन की माँग की है, यह तर्क देते हुए कि मौजूदा बुनियादी ढाँचा अभी इस बदलाव के लिए तैयार नहीं है।

नई निगरानी प्रणाली की संरचना

प्रस्तावित प्रणाली में एससीएडीए (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) तकनीक के माध्यम से जनरेशन डेटा को सीधे स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर तक पहुँचाया जाएगा। इसका प्रमुख उद्देश्य रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देना और बिजली की माँग को बेहतर तरीके से संतुलित करना है।

गौरतलब है कि फिलहाल जनरेशन डेटा ऑटोमेटेड मीटर रीडिंग के ज़रिए 15 दिन से एक महीने के अंतराल पर इकट्ठा किया जाता है — यानी प्रस्तावित व्यवस्था डेटा संग्रह की गति में कई लाख गुना तेज़ी लाएगी।

समय-सीमा और अनुपालन निर्देश

बिजली कंपनी ने पवन ऊर्जा उत्पादकों को 30 अप्रैल 2027 तक कनेक्टिविटी का काम पूरा करने का निर्देश दिया है, ताकि मई में शुरू होने वाले विंड सीजन से पहले व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। वहीं सौर ऊर्जा उत्पादकों को दिसंबर 2026 तक आवश्यक कनेक्शन स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।

यह नियम तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड, 2026 का हिस्सा है, जिसके तहत रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटरों के लिए लोड डिस्पैच सेंटर के साथ रियल-टाइम कनेक्टिविटी बनाए रखना अनिवार्य किया गया है।

उत्पादकों की आपत्तियाँ और ट्रायल की माँग

हाल ही में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने यह आपत्ति जताई कि कंपनी ने इस वर्ष की शुरुआत में किए गए वादे के अनुसार ट्रायल रन आयोजित किए बिना ही इस योजना को आगे बढ़ा दिया। उत्पादकों के अनुसार, मूल प्रस्ताव में लगभग 1,000 पवन ऊर्जा जनरेटरों के साथ पहले पायलट परीक्षण करने और उसके बाद पूरे क्षेत्र में इसे लागू करने की योजना थी।

इस पायलट प्रोजेक्ट से तकनीकी दिक्कतों की पहचान, बुनियादी ढाँचे की आवश्यकताओं का आकलन और बार-बार डेटा ट्रांसमिशन के व्यावहारिक लाभों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद थी। अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पहले से प्रस्तावित ट्रायल को छोड़कर सीधे पूर्ण कार्यान्वयन की ओर क्यों बढ़ा जा रहा है।

गैर-अनुपालन पर दंड का प्रावधान

जून 2026 में घोषित अनुपालन ढाँचे के अनुसार, तय समय-सीमा चूकने वाले उत्पादकों के उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा शुरुआत में एनर्जी अकाउंटिंग से बाहर रखा जाएगा। 30 दिनों तक लगातार गैर-अनुपालन पर उनका पूरा उत्पादन सेटलमेंट से बाहर हो जाएगा, और 45 दिनों के बाद और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

क्षमता और आगे की राह

तमिलनाडु में वर्तमान में लगभग 9,000 पवन ऊर्जा प्रतिष्ठान हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता करीब 12,000 मेगावाट है। यह ऊर्जा परिवर्तन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण राज्य है और इस पैमाने पर रियल-टाइम निगरानी प्रणाली लागू करना देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रयास हो सकता है।

अधिकारियों का मानना है कि नई निगरानी प्रणाली से रिन्यूएबल एनर्जी का ग्रिड एकीकरण बेहतर होगा, पीक-आवर प्लानिंग में सुधार आएगा और महँगी बिजली खरीद पर निर्भरता कम होगी। उत्पादक और नीति-विशेषज्ञ अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या तकनीकी चुनौतियों को दूर किए बिना यह महत्वाकांक्षी समय-सीमा व्यवहार में पूरी हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें क्रियान्वयन की जल्दबाज़ी एक परिचित जोखिम उठाती है — महत्वाकांक्षी नीतिगत लक्ष्य और ज़मीनी तैयारी के बीच की खाई। 9,000 पवन प्रतिष्ठानों को एक साथ रियल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन के लिए तैयार करना किसी भी बड़े परिनियोजन से पहले पायलट परीक्षण की माँग करता है — यह माँग उत्पादकों ने तर्कसंगत आधार पर उठाई है। अनुपालन न होने पर उत्पादन को सेटलमेंट से बाहर करने की दंड-व्यवस्था जहाँ एक ओर प्रवर्तन को मज़बूत बनाती है, वहीं बिना तकनीकी सत्यापन के यह उत्पादकों पर अनुचित वित्तीय बोझ भी डाल सकती है। असली सवाल यह है कि यदि ट्रायल पहले से प्रस्तावित था तो उसे छोड़ने का कारण क्या है — यह पारदर्शिता ग्रिड कोड की विश्वसनीयता के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में हर 7 सेकंड पर ऊर्जा निगरानी की योजना क्या है?
तमिलनाडु की बिजली कंपनी एससीएडीए तकनीक के ज़रिए पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन डेटा को हर 7 सेकंड में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर तक भेजने की योजना बना रही है। यह तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड, 2026 के तहत अनिवार्य किया गया है और इसका उद्देश्य ग्रिड संतुलन व बिजली माँग प्रबंधन में सुधार लाना है।
रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादकों ने ट्रायल रन की माँग क्यों की है?
उत्पादकों का कहना है कि मूल प्रस्ताव में पहले 1,000 पवन जनरेटरों के साथ पायलट परीक्षण करने की योजना थी, जो बिना किसी स्पष्टीकरण के छोड़ दी गई। उनके अनुसार मौजूदा बुनियादी ढाँचा इतनी तेज़ डेटा ट्रांसमिशन के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और ट्रायल के बिना तकनीकी दिक्कतों की पहचान नहीं हो पाएगी।
इस नई प्रणाली की समय-सीमा क्या है?
सौर ऊर्जा उत्पादकों को दिसंबर 2026 तक और पवन ऊर्जा उत्पादकों को 30 अप्रैल 2027 तक आवश्यक कनेक्टिविटी स्थापित करनी है। पवन उत्पादकों के लिए यह समय-सीमा मई में शुरू होने वाले विंड सीजन को ध्यान में रखकर तय की गई है।
समय-सीमा न मानने पर क्या दंड है?
गैर-अनुपालन पर शुरुआत में उत्पादक के 10% उत्पादन को एनर्जी अकाउंटिंग से बाहर रखा जाएगा। 30 दिनों तक लगातार उल्लंघन होने पर पूरा उत्पादन सेटलमेंट से बाहर हो जाएगा और 45 दिनों के बाद अतिरिक्त कार्रवाई का प्रावधान है।
तमिलनाडु में रिन्यूएबल एनर्जी की कितनी क्षमता है और यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
तमिलनाडु में लगभग 9,000 पवन ऊर्जा प्रतिष्ठान हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 12,000 मेगावाट है। इतने बड़े पैमाने पर रियल-टाइम निगरानी से ग्रिड एकीकरण बेहतर होगा, पीक-आवर प्लानिंग में सुधार आएगा और महँगी बिजली खरीद पर निर्भरता घटेगी।
राष्ट्र प्रेस
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