17 अगस्त 2026
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भारत के ₹20 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य के लिए टैक्स सुधार अनिवार्य, इक्विरस रिपोर्ट में बड़े सुझाव

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भारत के ₹20 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य के लिए टैक्स सुधार अनिवार्य, इक्विरस रिपोर्ट में बड़े सुझाव

सारांश

इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट भारत के $20 ट्रिलियन लक्ष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप देती है — ईंधन को जीएसटी में लाओ, बॉन्ड-इक्विटी कर समान करो, टीडीएस घटाओ। इन तीन कदमों से ₹54 लाख करोड़ की फाइनेंसिंग क्षमता और ₹13.4 लाख करोड़ की वर्किंग कैपिटल बाज़ार में वापस आ सकती है।

मुख्य बातें

इक्विरस सिक्योरिटीज ने 16 अगस्त 2026 को 'इंडियाज रोड टू ए 20 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' रिपोर्ट जारी की।
ईंधन पर 18% जीएसटी लागू होने से अर्थव्यवस्था में ₹5.5 लाख करोड़ अतिरिक्त और लॉजिस्टिक्स लागत 9% से 7% तक घटने का अनुमान।
बॉन्ड मार्केट को चीन के स्तर तक विकसित करने पर ₹54 लाख करोड़ की अतिरिक्त फाइनेंसिंग क्षमता और उधारकर्ताओं को ₹2.2 लाख करोड़ सालाना बचत संभव।
निवेश आय पर टीडीएस फ्लैट 5% करने से ₹13.4 लाख करोड़ वर्किंग कैपिटल बाज़ार में वापस आने का अनुमान।
ईंधन जीएसटी से केंद्र के नेट एक्साइज़ राजस्व में सालाना ₹1.6 लाख करोड़ की कमी का जोखिम भी चिह्नित।

इक्विरस सिक्योरिटीज ने 16 अगस्त 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट 'इंडियाज रोड टू ए 20 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' में कहा है कि भारत को पूंजीगत बाज़ारों को गहरा करने, बॉन्ड मार्केट की पहुँच बढ़ाने और वित्तीय लागत घटाने के लिए व्यापक टैक्स सुधार लागू करने होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन, निवेश से होने वाली आय, कॉर्पोरेट बॉन्ड और इक्विटी मार्केट — इन चारों क्षेत्रों में कर-ढाँचे को तर्कसंगत बनाए बिना तेज़ आर्थिक विकास की राह कठिन बनी रहेगी।

ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने का सुझाव

रिपोर्ट में पेट्रोल-डीज़ल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत लाने की सिफारिश की गई है। इक्विरस के अनुसार, ईंधन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू करने से पूरी अर्थव्यवस्था में लगभग ₹5.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त राशि प्रवाहित हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस कदम से नॉन-सर्विसेज जीडीपी के अनुपात में लॉजिस्टिक्स लागत 9 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत पर आ सकती है और सालाना आर्थिक विकास दर में 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी संभव है। इसके साथ ही लगभग 60 अरब डॉलर के निर्यात लाभ का भी अनुमान लगाया गया है।

हालाँकि रिपोर्ट स्वीकार करती है कि इस कदम से केंद्र सरकार के नेट एक्साइज़ राजस्व में सालाना लगभग ₹1.6 लाख करोड़ की कमी आ सकती है — एक व्यापार-बंद जिसे नीति-निर्माताओं को सावधानीपूर्वक तौलना होगा।

बॉन्ड मार्केट की गहराई बढ़ाने की ज़रूरत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट फिलहाल जीडीपी का लगभग 18 प्रतिशत है, जबकि इक्विटी मार्केट जीडीपी का 130 प्रतिशत — यह असंतुलन कॉर्पोरेट फाइनेंसिंग को महँगा और सीमित बनाता है।

इक्विरस ने बॉन्ड और इक्विटी पर कर-नियमों को एक समान करने की वकालत की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बॉन्ड मार्केट का आकार चीन के स्तर तक पहुँच जाए, तो लगभग ₹54 लाख करोड़ की अतिरिक्त फाइनेंसिंग क्षमता उत्पन्न हो सकती है।

उधार लेने की लागत घटने से उधारकर्ताओं को सालाना लगभग ₹2.2 लाख करोड़ की प्रत्यक्ष बचत हो सकती है — जो मल्टीप्लायर प्रभाव से पहले ही जीडीपी का 0.63 प्रतिशत है। इक्विरस का अनुमान है कि मल्टीप्लायर असर से विकास दर में 0.9 से 1.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो सकती है।

टीडीएस में कटौती से वर्किंग कैपिटल की वापसी

ब्रोकरेज ने निवेश से होने वाली आय पर टीडीएस को घटाकर फ्लैट 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि शेष देनदारी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय चुकाई जा सके। इक्विरस के अनुसार, इस बदलाव से लगभग ₹13.4 लाख करोड़ की वर्किंग कैपिटल वित्तीय बाज़ारों में वापस आ सकती है।

व्यापक आर्थिक संदर्भ

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत $20 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। गौरतलब है कि पूँजी बाज़ारों की गहराई और वित्तीय समावेशन को लेकर नीतिगत बहस वर्षों से जारी है, लेकिन ईंधन को जीएसटी में शामिल करने जैसे कदम राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। रिपोर्ट में सुझाए गए सुधार यदि क्रमबद्ध तरीके से लागू हों, तो भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और निवेश आकर्षण दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे राज्यों के राजस्व हितों और केंद्र की एक्साइज़ निर्भरता के कारण बार-बार टाला गया है। ₹1.6 लाख करोड़ के संभावित राजस्व नुकसान को स्वीकार करना ईमानदारी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कोई सरकार चुनावी दबाव में यह व्यापार-बंद स्वीकार करेगी। बॉन्ड मार्केट की गहराई का अभाव भारतीय कॉर्पोरेट्स को बैंक-ऋण पर निर्भर रखता है, जो दीर्घकालिक पूँजी निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं — यह संरचनात्मक कमज़ोरी किसी एक बजट में नहीं सुधरेगी, बल्कि इसके लिए निरंतर नीतिगत प्रतिबद्धता चाहिए।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इक्विरस सिक्योरिटीज की यह रिपोर्ट किस बारे में है?
'इंडियाज रोड टू ए 20 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट 16 अगस्त 2026 को जारी हुई, जिसमें भारत को पूंजीगत बाज़ारों को मज़बूत करने और वित्तीय लागत घटाने के लिए ईंधन जीएसटी, टीडीएस कटौती और बॉन्ड-इक्विटी कर समानता जैसे सुधारों की सिफारिश की गई है।
ईंधन को जीएसटी में लाने से क्या फायदा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, 18% जीएसटी लागू होने से अर्थव्यवस्था में ₹5.5 लाख करोड़ अतिरिक्त आ सकते हैं और लॉजिस्टिक्स लागत 9% से घटकर 7% हो सकती है। इससे सालाना विकास दर में 0.3-0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी और लगभग 60 अरब डॉलर के निर्यात लाभ का अनुमान है।
भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट इक्विटी मार्केट से इतना छोटा क्यों है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट जीडीपी का महज 18% है, जबकि इक्विटी मार्केट 130% — यह असंतुलन कर-ढाँचे में भेदभाव और नियामकीय जटिलताओं के कारण है। बॉन्ड और इक्विटी पर कर-नियम एक समान करने से यह खाई पाटी जा सकती है।
टीडीएस को 5% करने से बाज़ार पर क्या असर पड़ेगा?
इक्विरस के अनुसार, निवेश आय पर टीडीएस फ्लैट 5% करने से लगभग ₹13.4 लाख करोड़ की वर्किंग कैपिटल वित्तीय बाज़ारों में वापस आ सकती है। इससे निवेशकों का अनुपालन बोझ घटेगा और बाज़ार में तरलता बढ़ेगी।
ईंधन जीएसटी से सरकार को राजस्व नुकसान कितना होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन को जीएसटी में लाने से केंद्र सरकार के नेट एक्साइज़ राजस्व में सालाना लगभग ₹1.6 लाख करोड़ की कमी आ सकती है। हालाँकि रिपोर्ट का तर्क है कि दीर्घकालिक आर्थिक लाभ इस अल्पकालिक नुकसान से कहीं अधिक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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