भारती एंटरप्राइजेज की BT में हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना पर ब्रिटिश सरकार का विरोध संभव: रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक सुनील भारती मित्तल की यूके के टेलीकॉम दिग्गज BT ग्रुप में हिस्सेदारी बढ़ाने की कथित योजना को ब्रिटिश सरकार के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे पर संप्रभु नियंत्रण बनाए रखने की चिंताओं के चलते भारती की किसी भी अतिरिक्त हिस्सेदारी वृद्धि का विरोध करने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम 28 मई 2026 को उन खबरों के कुछ दिन बाद सामने आया है जिनमें कहा गया था कि भारती एंटरप्राइजेज BT में अपनी हिस्सेदारी उस सीमा से थोड़ा नीचे तक बढ़ाने की संभावना तलाश रही है, जिससे अनिवार्य अधिग्रहण प्रस्ताव शुरू हो जाएगा।
मौजूदा हिस्सेदारी और पृष्ठभूमि
फिलहाल भारती एंटरप्राइजेज की BT ग्रुप में 24.95 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हालाँकि, भारती के एक प्रवक्ता ने पहले स्पष्ट किया था कि कंपनी अपनी मौजूदा हिस्सेदारी से संतुष्ट है और फिलहाल इसे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। इस ताज़ा रिपोर्ट पर मित्तल के प्रवक्ता और BT ग्रुप ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
मित्तल का BT बोर्ड से जुड़ाव
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में सुनील भारती मित्तल और भारती एयरटेल के वाइस चेयरमैन एवं एमडी गोपाल विट्टल गैर-स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में BT के बोर्ड में शामिल हुए थे। इससे भारती की BT में रणनीतिक भूमिका और गहरी हुई है।
मित्तल का उत्तराधिकार और नियंत्रण का लक्ष्य
इस महीने की शुरुआत में मित्तल ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा था कि वे अगले दशक में धीरे-धीरे नेतृत्व की जिम्मेदारियाँ अगली पीढ़ी को सौंपना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे मैं उस मुकाम पर पहुँचता हूँ जहाँ मैं अगली पीढ़ी और शेयरधारकों को बागडोर सौंपता हूँ, भारती टेलीकॉम को 51 प्रतिशत या 50 प्रतिशत से थोड़ी अधिक नियंत्रणकारी शेयरधारिता हासिल कर लेनी चाहिए।' यह बयान ब्रिटिश सरकार की चिंताओं के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
ब्रिटिश सरकार की चिंताएँ
BT ग्रुप ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण दूरसंचार बुनियादी ढाँचों में से एक है, जिसमें देश का व्यापक ब्रॉडबैंड नेटवर्क और रक्षा-संबंधी संचार सेवाएँ शामिल हैं। ऐसे में किसी विदेशी इकाई द्वारा नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की संभावना को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में विदेशी निवेश की जाँच-पड़ताल को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटिश सरकार भारती की किसी भी हिस्सेदारी वृद्धि की औपचारिक समीक्षा कर सकती है। भारती एंटरप्राइजेज और BT ग्रुप दोनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों और टेलीकॉम क्षेत्र में विदेशी निवेश नीति के लिहाज से एक अहम परीक्षण बन सकता है।