3 अक्टूबर 2026
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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन: 'समावेशी विकास के बिना आर्थिक मजबूती अधूरी', GDP 7.8% की वृद्धि

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन: 'समावेशी विकास के बिना आर्थिक मजबूती अधूरी', GDP 7.8% की वृद्धि

सारांश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संदेश साफ़ था — 7.8% GDP वृद्धि तब तक अधूरी है जब तक उसका फायदा हर नागरिक तक न पहुँचे। कौटिल्य कॉन्क्लेव में उन्होंने JAM, DBT और महिला सशक्तिकरण को असली आर्थिक मजबूती की बुनियाद बताया।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 3 अक्टूबर 2026 को 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा — 'सिर्फ जीडीपी ही विकास का पैमाना नहीं।' उन्होंने कहा कि 'समावेशिता' अर्थव्यवस्था की आघात-सहनशीलता का एक प्रमुख माध्यम है।
वित्त वर्ष 2026-27 की Q1 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% रही, जबकि पिछले वर्ष की Q1 में यह 6.9% थी।
वास्तविक GDP ₹81.36 लाख करोड़ (स्थिर कीमतों पर), पिछले वर्ष ₹75.46 लाख करोड़ थी।
पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकले।
JAM आर्किटेक्चर और GST को समावेशी विकास के प्रमुख उदाहरण बताया।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित '5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' के उद्घाटन सत्र में स्पष्ट किया कि भारत की आर्थिक मजबूती का वास्तविक पैमाना केवल जीडीपी वृद्धि नहीं, बल्कि यह है कि विकास का लाभ देश के हर नागरिक और हर क्षेत्र तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि 'सिर्फ जीडीपी ही विकास का पैमाना नहीं हो सकता।'

मुख्य घटनाक्रम

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि मुश्किल हालात का सामना करने की असली क्षमता का पैमाना यह है कि 'हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नागरिक या कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे।' उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि समावेशिता केवल सामाजिक कल्याण का विषय नहीं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था की आघात-सहनशीलता को मजबूत करने का एक ठोस माध्यम भी है।

राधाकृष्णन ने कहा कि 'समावेशिता मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता का एक जरिया बन सकती है।' उनके अनुसार इस क्षमता को सिर्फ वित्तीय बाजारों या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल

उपराष्ट्रपति ने समावेशी एजेंडे में महिलाओं की भागीदारी को केंद्रीय भूमिका में रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित होने पर महिलाएँ अधिक से अधिक नेतृत्व की भूमिकाएँ निभा सकेंगी। उनके शब्दों में, 'हम महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं, उन्हें शिक्षा का अधिकार देना चाहते हैं और वे खुद को सशक्त बनाएंगी।'

यह ऐसे समय में आया है जब देश की श्रम-शक्ति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर नीतिगत बहस एक बार फिर तेज़ हुई है।

JAM आर्किटेक्चर और गरीबी उन्मूलन

राधाकृष्णन ने जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) आर्किटेक्चर को समावेशी विकास के सबसे प्रभावी उदाहरणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस ढाँचे ने बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेश और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को संभव बनाया। उन्होंने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को भारत का अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार भी बताया।

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी की रेखा से बाहर निकले हैं — एक आँकड़ा जो वैश्विक विकास चर्चाओं में भारत की साख को बढ़ाता है।

GDP वृद्धि के ताज़ा आँकड़े

उपराष्ट्रपति के संबोधन की पृष्ठभूमि में ताज़ा आर्थिक आँकड़े भी उल्लेखनीय हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी। स्थिर कीमतों पर वास्तविक GDP ₹81.36 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹75.46 लाख करोड़ के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है।

यह वृद्धि दर समावेशी विकास की नीतिगत चर्चाओं को और अधिक प्रासंगिक बनाती है — सवाल यह है कि क्या इस उच्च वृद्धि का लाभ वास्तव में हाशिये पर खड़े वर्गों तक पहुँच रहा है।

नीति-निर्माताओं के लिए संदेश

राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था से विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा में नीति-निर्माताओं को मुख्य विकास दर के साथ-साथ समावेशिता को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी। वित्तीय समावेश और कल्याणकारी लाभों के वितरण में सुधार, उनके अनुसार, यह दर्शाते हैं कि सामाजिक समावेश स्वयं एक अर्थव्यवस्था की झटके सहने की क्षमता को मजबूत करता है। आने वाले वर्षों में नीतिगत दिशा इसी कसौटी पर परखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी असमानता और बेरोज़गारी को लेकर बहस जारी है। JAM और DBT की सफलता निर्विवाद है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये उपकरण ग्रामीण और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में टिकाऊ आय सृजन में तब्दील हो रहे हैं। 25 करोड़ गरीबी-उन्मूलन का आँकड़ा प्रभावशाली है, परंतु इसे मापने की पद्धति और इसमें कल्याणकारी योजनाओं की प्रत्यक्ष भूमिका पर स्वतंत्र समीक्षा अभी भी अपेक्षित है। बिना जवाबदेही-तंत्र के, समावेशिता की बात नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित रहने का जोखिम बना रहता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कौटिल्य कॉन्क्लेव में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास का लाभ हर नागरिक और क्षेत्र तक पहुँचे, और सिर्फ जीडीपी विकास का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। उन्होंने समावेशिता को आर्थिक आघात-सहनशीलता का एक अनिवार्य माध्यम बताया।
5वाँ कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव क्या है?
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव एक प्रतिष्ठित आर्थिक विमर्श मंच है जहाँ नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ भारत की आर्थिक नीतियों पर विचार-विमर्श करते हैं। इस वर्ष का 5वाँ संस्करण 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
भारत की GDP वृद्धि दर Q1 FY27 में कितनी रही?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की 6.9 प्रतिशत से अधिक है। स्थिर कीमतों पर वास्तविक GDP ₹81.36 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
JAM आर्किटेक्चर का समावेशी विकास से क्या संबंध है?
JAM यानी जन धन-आधार-मोबाइल आर्किटेक्चर ने वित्तीय समावेश और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को बड़े पैमाने पर संभव बनाया है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इसे समावेशी विकास के सबसे ठोस उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
पिछले दशक में भारत में गरीबी उन्मूलन के क्या आँकड़े हैं?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के अनुसार, पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। यह आँकड़ा वैश्विक विकास चर्चाओं में भारत की नीतिगत सफलता का एक प्रमुख सूचक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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