3 अक्टूबर 2026
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सीतारमण का कौटिल्य कॉन्क्लेव में ऐलान: भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत, Q1 GDP 7.8% रही

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सीतारमण का कौटिल्य कॉन्क्लेव में ऐलान: भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत, Q1 GDP 7.8% रही

सारांश

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऋण बोझ के बावजूद वित्त मंत्री सीतारमण ने Q1 में 7.8% GDP वृद्धि, 4.8% CPI और ₹12.22 लाख करोड़ के कैपेक्स बजट के आँकड़े पेश कर भारत की आर्थिक मजबूती का दावा किया — और चेताया कि 2029 तक वैश्विक सार्वजनिक ऋण GDP के 100% तक पहुँच सकता है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अक्टूबर 2026 को 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में भारत की आर्थिक स्थिरता की पुष्टि की।
वित्त वर्ष 2026 27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8% , CPI मुद्रास्फीति 4.8% और चालू खाते का घाटा GDP का 0.5% रहा।
वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2025 में GDP के 94% तक पहुँचा; 2029 तक 100% पहुँचने का अनुमान — द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार।
पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत; गैर खाद्य ऋण में 18.8% वार्षिक वृद्धि।
वित्त वर्ष 2026 27 का पूंजीगत व्यय बजट ₹12.22 लाख करोड़ ; प्रभावी कैपेक्स ₹17.15 लाख करोड़ (GDP का 4.4% )।
2014 से राष्ट्रीय राजमार्गों में 61% विस्तार, रेलवे मार्ग दोगुने और बंदरगाह क्षमता 60% बढ़ी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC 2026) में कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक अनिश्चितता का भारत सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम रहा है और देश की आर्थिक बुनियाद न केवल बरकरार है, बल्कि और मजबूत हुई है। "बदलाव के दौर में मजबूती: भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं" विषय पर आयोजित विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत इस उथल पुथल भरे दौर से उल्लेखनीय रूप से बेहतर स्थिति में निकला है।

वैश्विक ऋण संकट और भारत की स्थिति

वित्त मंत्री ने चेताया कि वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2025 में बढ़कर वैश्विक GDP के करीब 94 प्रतिशत तक पहुँच गया है और 2029 तक इसके 100 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है — यह स्तर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतिम बार देखा गया था। उन्होंने कहा, "मूल्य संबंधी झटके को मौद्रिक और राजकोषीय उपायों से कम किया जा सकता है, लेकिन मात्रा संबंधी झटका व्यापक आर्थिक प्रणालियों, वितरण तंत्र की पहुँच और खुद राज्य की क्षमता की परीक्षा लेता है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं चालू खाते के घाटे और मुद्रा अवमूल्यन की दोहरी मार झेल रही हैं।

मुख्य आर्थिक संकेतक

सीतारमण ने ताज़ा आँकड़े पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026 27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। अगस्त 2026 में CPI मुद्रास्फीति करीब 4.8 प्रतिशत रही, जबकि पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा GDP का मात्र 0.5 प्रतिशत रहा — जो समग्र बाह्य स्थिरता का संकेत है। गौरतलब है कि अगस्त 2026 तक के एक वर्ष में गैर खाद्य ऋण में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

चार बुनियादों पर टिकी मजबूती

वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक लचीलेपन को चार स्तंभों पर आधारित बताया। पहला स्तंभ — परिवार स्तर पर लचीलापन: जन धन आधार मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिये पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना जैसे कार्यक्रमों ने परिवारों की असुरक्षा के विभिन्न स्रोतों को दूर किया है।

दूसरा स्तंभ — उत्पादक अवसर: पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए गए हैं। आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना ने व्यवधान के दौर में उद्यमों को नकदी संकट से उबरने में मदद दी।

तीसरा स्तंभ — बुनियादी ढाँचा: वित्त वर्ष 2026 27 में अकेले पूंजीगत व्यय के लिए ₹12.22 लाख करोड़ का बजट रखा गया है। सीतारमण ने रेखांकित किया कि यह राशि 2004 05 से 2013 14 के पूरे दशक में केंद्र द्वारा खर्च किए गए ₹12.39 लाख करोड़ के लगभग बराबर है। प्रभावी पूंजीगत व्यय ₹17.15 लाख करोड़ है, जो GDP का 4.4 प्रतिशत है। 2014 के बाद से राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार करीब 61 प्रतिशत हुआ, परिचालन रेलवे मार्ग दोगुने से अधिक हो गए और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

चौथा स्तंभ — सुधारवादी नेतृत्व: वित्त मंत्री ने GST, दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों जैसे संरचनात्मक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुधारों को मजबूरी नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास का विषय मानते हैं।

आगे की राह

कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव जैसे मंचों पर दिए गए ये संकेत नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। 2029 तक वैश्विक सार्वजनिक ऋण के GDP के 100 प्रतिशत तक पहुँचने की आशंका के बीच, भारत की अपेक्षाकृत स्थिर वित्तीय स्थिति उसे एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाए रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यान्वयन की गति और राजकोषीय अनुशासन दोनों को एक साथ बनाए रखना आगे की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 7.8% GDP वृद्धि और 4.8% मुद्रास्फीति के बीच की खाई यह सवाल उठाती है कि यह विस्तार वास्तव में कितने लोगों तक पहुँच रहा है — खासकर जब पीएम मुद्रा योजना के 52 करोड़ ऋणों की औसत राशि और एनपीए दर जैसे आँकड़े सामने नहीं रखे गए। ₹12.22 लाख करोड़ के कैपेक्स बजट की तुलना पिछले दशक से करना प्रभावशाली राजनीतिक फ्रेमिंग है, लेकिन यह नहीं बताती कि उसमें से कितना वास्तव में खर्च हो चुका है और कितना बजटीय प्रतिबद्धता भर है। वैश्विक ऋण के 100% के खतरे की चेतावनी देना और साथ ही घरेलू राजकोषीय स्वास्थ्य का दावा करना — दोनों सही हो सकते हैं, पर इसकी सत्यापनीयता तभी होगी जब स्वतंत्र एजेंसियाँ इन आँकड़ों की पुष्टि करें।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अक्टूबर 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। उन्होंने Q1 FY2027 में 7.8% GDP वृद्धि, 4.8% CPI मुद्रास्फीति और GDP के 0.5% चालू खाते के घाटे के आँकड़े पेश किए।
भारत की Q1 FY2027 GDP वृद्धि दर क्या रही?
वित्त वर्ष 2026 27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह आँकड़ा वित्त मंत्री सीतारमण ने KEC 2026 में प्रस्तुत किया।
वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2029 तक कितना हो सकता है?
सीतारमण के अनुसार वैश्विक सार्वजनिक ऋण 2025 में GDP के करीब 94 प्रतिशत तक पहुँच गया और 2029 तक 100 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। यह स्तर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतिम बार देखा गया था।
भारत के वित्त वर्ष 2026 27 में पूंजीगत व्यय बजट कितना है?
वित्त वर्ष 2026 27 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹12.22 लाख करोड़ का बजट रखा गया है, जबकि प्रभावी पूंजीगत व्यय ₹17.15 लाख करोड़ (GDP का 4.4%) है। सीतारमण ने बताया कि यह राशि 2004 05 से 2013 14 के पूरे दशक के केंद्रीय कैपेक्स के लगभग बराबर है।
पीएम मुद्रा योजना के तहत अब तक कितने ऋण स्वीकृत हुए हैं?
वित्त मंत्री के अनुसार पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे स्वरोज़गार और छोटे उद्यमों को समर्थन मिला है।
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