शक्तिकांत दास: दशक के आर्थिक सुधारों ने भारत को बनाया वैश्विक झटकों से लचीला, GDP वृद्धि 7.8%
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने 4 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा कि पिछले एक दशक में किए गए संरचनात्मक आर्थिक सुधारों ने भारत को वैश्विक झटकों के सामने कहीं अधिक मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा किया है। पूर्व भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) गवर्नर और वित्त मंत्रालय के पूर्व आर्थिक मामलों के सचिव दास ने जोर देकर कहा कि ये सुधार तात्कालिक उपाय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए सुनियोजित कदम थे।
आर्थिक प्रदर्शन और वृद्धि दर
दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत घरेलू माँग और निवेश का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि भारत अब 8 प्रतिशत वृद्धि दर के बेहद करीब है। उल्लेखनीय है कि जुलाई-सितंबर 2025 से अप्रैल-जून 2026-27 तक लगातार चार तिमाहियों में 8 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत की आर्थिक क्षमता का प्रमाण है।
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार विखंडन, तकनीकी प्रतिबंध, ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और विकसित देशों में बढ़ते सार्वजनिक ऋण जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
प्रमुख सुधारों की भूमिका
दास ने लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण ढाँचे — जो 2016 में लागू हुआ — को एक मील का पत्थर बताया। उनके अनुसार इसी ढाँचे ने भारत को कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे बड़े वैश्विक संकटों से प्रभावी ढंग से उबरने में सक्षम बनाया।
वस्तु एवं सेवा कर (GST) को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए दास ने कहा कि इसने पूरे देश को एक एकीकृत बाज़ार में बदला, करों के दोहरे प्रभाव को कम किया और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण को गति दी। बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुद्धार को उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती की एक 'परिभाषित विशेषता' करार दिया।
बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
दास ने परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश की सराहना की। उन्होंने पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला और उड़ान जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्होंने आर्थिक बाधाओं को दूर कर निवेश-आधारित विकास की नींव मजबूत की।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत ने जीवाश्म ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन और परमाणु ऊर्जा के बीच एक संतुलित आधार विकसित किया है, जिससे बाहरी ऊर्जा झटकों का असर काफी हद तक कम हुआ है।
विनिर्माण पुनरुत्थान और भविष्य की राह
प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाओं, सेमीकंडक्टर निवेश, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। दास ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में पुनरुत्थान का साक्षी बन रहा है।
भविष्य की आर्थिक छलांग के लिए दास ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गहरे वित्तीय बाज़ार, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, सतत विकास और मानव पूंजी को पाँच मुख्य स्तंभ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल तेज़ वृद्धि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, टिकाऊ और लचीला विकास हासिल करना है।
आगे की दिशा
दास ने जोर देकर कहा कि सुधारों की गति बनाए रखना अनिवार्य है। उनके अनुसार, भारत की आने वाली आर्थिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश सुधार, निवेश, नवाचार और मानव संसाधन विकास को कितनी दृढ़ता से आगे बढ़ाता है। गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है और भारत उभरते बाज़ारों में सबसे तेज़ वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।