भारत ने वैश्विक संकटों का सामना करते हुए मजबूती से आगे बढ़ने की राह पकड़ी: शक्तिकांत दास

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भारत ने वैश्विक संकटों का सामना करते हुए मजबूती से आगे बढ़ने की राह पकड़ी: शक्तिकांत दास

सारांश

भारत ने वैश्विक संकटों में अद्वितीय लचीलापन दिखाया है। शक्तिकांत दास के अनुसार, हर संकट के बाद भारत ने खुद को और मजबूत बनाया है। जानिए इसके पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया है।
  • हर संकट के बाद भारत ने खुद को मजबूत बनाया है।
  • महंगाई को नियंत्रित करना आवश्यक है।
  • संतुलित नीतियों से अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।
  • डिजिटलीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी है।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने वैश्विक संकटों के समय में लगातार अद्वितीय लचीलापन (रेजिलिएंस) प्रदर्शित किया है, और यह केवल इनसे उबरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर बार खुद को और अधिक मजबूत बनाकर उभरा है। यह बात प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कही।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआईएमए नेशनल लीडरशिप कॉन्क्लेव में बोलते हुए, शक्तिकांत दास ने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय में भारत की यात्रा यह दर्शाती है कि देश कठिनाइयों के बावजूद निरंतर आगे बढ़ता रहा है।

उन्होंने कहा, "हर संकट के दौरान, देश ने केवल मुसीबतों का सामना नहीं किया, बल्कि हमेशा पहले से अधिक मजबूत होकर बाहर आया है।"

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तनाव का सामना कर रही है, जहाँ भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावट, और विभिन्न क्षेत्रों में असमान विकास देखा जा रहा है।

दास ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम इस समय नीचे की ओर अधिक झुके हुए हैं।" ऐसे माहौल में, उन्होंने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि देश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत केवल संकट का सामना करने में नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों में खुद को बदलने और सुधारने में भी है।

दास के अनुसार, मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, निरंतर नीति निर्णय, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, और मजबूत घरेलू मांग जैसे कारकों ने इस मजबूती को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

महंगाई को नियंत्रित रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर गरीबों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कम महंगाई से लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ती है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।

उन्होंने यह भी बताया कि संकट के दौरान भारत ने संतुलित नीतियों को अपनाया, जहाँ जरूरत पड़ने पर राजकोषीय और मौद्रिक कदम उठाए गए और समय पर उन्हें वापस भी लिया गया ताकि सिस्टम में असंतुलन न बने।

दास ने अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया, जिसमें तेज़ी से डिजिटलीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, और इलेक्ट्रॉनिक्ससेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में वृद्धि शामिल है।

उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अपने साझेदारी नेटवर्क को विविध बनाया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत ने वैश्विक संकटों के दौरान अपनी लचीलापन और आर्थिक मजबूती को प्रदर्शित किया है। शक्तिकांत दास की बातें इस महामारी और अन्य चुनौतियों में भारत की आशा और सकारात्मकता को दर्शाती हैं।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने संकटों का सामना कैसे किया?
भारत ने हर संकट के दौरान लचीलापन दिखाते हुए खुद को मजबूत बनाया है।
शक्तिकांत दास ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत ने संकटों में न केवल झेला है, बल्कि और मजबूत होकर उभरा है।
क्या भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है?
हां, परंतु भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के साथ इसे संभाला है।
महंगाई को नियंत्रित करने का क्या महत्व है?
महंगाई को नियंत्रित रखना गरीबों के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे उनकी खरीदने की क्षमता बढ़ती है।
भारत ने किस प्रकार की नीतियाँ अपनाई हैं?
भारत ने संतुलित नीतियों को अपनाया है, जिससे अर्थव्यवस्था में असंतुलन नहीं बना।
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