3 अक्टूबर 2026
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मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ आजादी के बाद सबसे ऊँची, भारत ने वैश्विक अस्थिरता संभाली: पनगढ़िया

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मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ आजादी के बाद सबसे ऊँची, भारत ने वैश्विक अस्थिरता संभाली: पनगढ़िया

सारांश

वित्त आयोग अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया का दावा — बीते तीन वित्त वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग की 10% से अधिक ग्रोथ आजादी के बाद सबसे ऊँची है। वित्त मंत्री सीतारमण ने Q1 FY27 में 7.8% GDP वृद्धि और 4.8% CPI के आँकड़े पेश किए — वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता का साझा संदेश।

मुख्य बातें

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने 3 अक्टूबर 2026 को KEC 2026 में कहा कि भारत ने वैश्विक अस्थिरता का बेहतर प्रबंधन किया है।
बीते तीन वित्त वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक — 1947 के बाद का उच्चतम स्तर।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि Q1 FY2026-27 में वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी।
अगस्त 2026 में CPI मुद्रास्फीति लगभग 4.8 प्रतिशत ; चालू खाते का घाटा GDP का 0.5 प्रतिशत ।
पनगढ़िया के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी।

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने 3 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत ने वैश्विक अस्थिरता का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है और देश का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र बीते तीन वित्त वर्षों में 10 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ा है — जो स्वतंत्रता के बाद का सर्वोच्च आँकड़ा है। नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC 2026) के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की।

पनगढ़िया का आर्थिक आकलन

KEC 2026 के साइडलाइन में बातचीत में पनगढ़िया ने कहा, 'मेरा लंबे समय से मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी।' उन्होंने स्वीकार किया कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बाद शुरुआत में उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका थी, लेकिन अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, 'महंगाई के स्थिर बने रहने के साथ अर्थव्यवस्था की गति भी बनी हुई है, जो दिखाता है कि भारत ने वैश्विक अस्थिरता का बहुत बेहतर ढंग से प्रबंधन किया है।' पनगढ़िया के अनुसार, कारोबारी अक्सर कुछ अनिश्चितताओं के लिए पहले से प्रावधान कर लेते हैं, इसलिए अनिश्चितताएँ एक या दो क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं, न कि पूरी अर्थव्यवस्था को।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की ऐतिहासिक वृद्धि

पनगढ़िया ने रेखांकित किया कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे उत्साहजनक तथ्य यह है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। बीते तीन वित्त वर्षों में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक रही है, जो 1947 के बाद का सर्वोच्च स्तर है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यापक पुनर्गठन हो रहा है और भारत को 'चीन-प्लस-वन' रणनीति के तहत वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत तक पहुँचाना सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य रहा है।

वित्त मंत्री सीतारमण के आँकड़े

उसी कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मज़बूत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी।

सीतारमण ने आगे बताया कि अगस्त 2026 में CPI मुद्रास्फीति लगभग 4.8 प्रतिशत रही और पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा GDP का मात्र 0.5 प्रतिशत था — जो समष्टि आर्थिक स्थिरता का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 से सरकार ने उन क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान दिया है जिन पर सतत विकास निर्भर करता है।

व्यापक संदर्भ और महत्त्व

KEC 2026 नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के नेताओं का प्रमुख मंच है। इस वर्ष के आयोजन में वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत की आर्थिक लचीलेपन की क्षमता केंद्र में रही।

पनगढ़िया का यह आकलन आने वाले महीनों में वित्त आयोग की सिफारिशों की दिशा का भी संकेत देता है, जिसमें राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और अनुदान का निर्धारण होता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मैन्युफैक्चरिंग की यह गति बनी रहती है, तो यह रोज़गार सृजन और निर्यात दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

आगे की राह

विश्लेषकों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए असली परीक्षा तब होगी जब वैश्विक माँग में और कमी आए या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलें। फिलहाल, पनगढ़िया और सीतारमण दोनों के बयान सरकार के उस आख्यान को पुष्ट करते हैं कि भारत वैश्विक उथल-पुथल में एक स्थिर और उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह देखना ज़रूरी है कि यह वृद्धि रोज़गार की गुणवत्ता और औपचारिक क्षेत्र में कितनी तब्दील हो रही है। GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अभी भी 25% के लक्ष्य से काफी दूर है। वित्त आयोग अध्यक्ष का यह आकलन आने वाली सिफारिशों की दिशा को भी प्रभावित करेगा — इसलिए इसे केवल एक टिप्पणी नहीं, एक नीतिगत संकेत के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद पनगढ़िया ने मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ के बारे में क्या कहा?
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि बीते तीन वित्त वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक रही है, जो 1947 के बाद का सर्वोच्च आँकड़ा है। उन्होंने यह बयान 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में KEC 2026 के दौरान दिया।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि कितनी रही?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने KEC 2026 में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी। इसके साथ ही अगस्त 2026 में CPI मुद्रास्फीति लगभग 4.8 प्रतिशत और चालू खाते का घाटा GDP का 0.5 प्रतिशत रहा।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 क्या है?
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC) नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के नेताओं का एक प्रमुख वार्षिक मंच है। इसका 5वाँ संस्करण 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक स्थिति केंद्रीय विषय रही।
भारत ने वैश्विक अस्थिरता का प्रबंधन कैसे किया?
पनगढ़िया के अनुसार, महंगाई स्थिर रहने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की गति बनी रही, जो दर्शाता है कि भारत ने मध्य पूर्व तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियों को बेहतर तरीके से संभाला। उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारी अनिश्चितताओं के लिए पहले से प्रावधान कर लेते हैं, इसलिए पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित नहीं होती।
16वाँ वित्त आयोग क्या करता है और पनगढ़िया इसमें क्या भूमिका निभाते हैं?
16वाँ वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बँटवारे तथा अनुदान की सिफारिश करने वाला संवैधानिक निकाय है। अरविंद पनगढ़िया इसके अध्यक्ष हैं और उनका आर्थिक आकलन आयोग की भावी सिफारिशों की दिशा को प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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