मैन्युफैक्चरिंग जीवीए में 10.88% सीएजीआर की वृद्धि, FY23–FY26 के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा को दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि संशोधित राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा है। यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने सदन के पटल पर रखी।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध आंकड़े कुल जीवीए में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी में किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत नहीं देते। गौरतलब है कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है और यह संशोधित श्रृंखला फरवरी 2026 में जारी की गई थी।
सरकार की पहलें और संरचनात्मक सुधार
राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को सुदृढ़ करने और बाहरी झटकों के प्रति इसकी संवेदनशीलता घटाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीमें, पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या), सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन, क्रिटिकल मिनरल्स और एमएसएमई को बढ़ावा देने की पहल, सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं की योजना, व्यापार सुगमता में सुधार तथा नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनआईसीडीपी)।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री ने कहा, 'इन सभी पहलों का मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना, रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाना है।'
आर्थिक सर्वेक्षण की अंतर्दृष्टि
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मध्यम और उच्च-तकनीकी उद्योग अब भारत की मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू एडेड में 46.3 प्रतिशत का योगदान करते हैं — जो अधिक आधुनिक उत्पादन संरचना की ओर क्रमिक बदलाव का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
क्या होगा आगे
मैन्युफैक्चरिंग जीवीए की यह वृद्धि दर उत्साहजनक है, लेकिन कुल जीवीए में हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बदलाव न होना नीति-निर्माताओं के लिए एक खुली चुनौती बनी हुई है। आने वाले वर्षों में PLI और एनआईसीडीपी जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन यह तय करेगा कि क्या भारत वास्तव में एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में उभर सकता है।