वैश्विक अनिश्चितता में भारत की तेज विकास दर बरकरार: PM के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत ने मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढाँचे के बल पर वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद ऊँची विकास दर बनाए रखने में सफलता पाई है। 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बात कही। उनके अनुसार, वैश्विक घटनाक्रम भले ही अस्थिर हों, लेकिन भारत की आर्थिक नींव इन झटकों को सहने में सक्षम साबित हुई है।
मुख्य बातें: क्या बोले पी.के. मिश्रा
मिश्रा ने कहा, 'हम अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने में सक्षम रहे हैं। हमने व्यापक व्यापार संबंध भी बनाए हैं, अधिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं और अधिक व्यापारिक संबंध स्थापित किए हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के लिए खुला रहना चाहता है, लेकिन साथ ही अत्यधिक बाहरी निर्भरता की कमज़ोरियों से भी बचना चाहता है।
उन्होंने कहा, 'सवाल यह नहीं है कि वैश्वीकरण खत्म हो गया है या नहीं, बल्कि यह है कि अर्थव्यवस्थाओं को झटकों और अत्यधिक निर्भरता के प्रति कम संवेदनशील बनाते हुए वैश्वीकरण के लाभों को कैसे बरकरार रखा जाए?'
जोखिम बनाम अनिश्चितता: एक नया विभाजन
शीर्ष नीति अधिकारी ने जोर देकर कहा कि आर्थिक फैसले हमेशा पूरी जानकारी के बिना लिए जाते हैं — इसमें जोखिम का तत्व सदैव मौजूद रहता है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में केवल 'जोखिम' नहीं, बल्कि 'अनिश्चितता' भी बढ़ती जा रही है — और दोनों के बीच का यह अंतर अब स्पष्ट रूप से सामने आ गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
होर्मुज स्ट्रेट और रणनीतिक संवेदनशीलता
होर्मुज स्ट्रेट संकट का उल्लेख करते हुए मिश्रा ने कहा कि महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग संवेदनशीलता के स्रोत बन जाते हैं और कभी-कभी टैरिफ का इस्तेमाल भी हथियार की तरह किया जाने लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य प्रतिबंधों का उपयोग रणनीतिक उद्देश्यों के लिए तेजी से बढ़ रहा है और ऊर्जा परिवर्तन को भी नए सिरे से मूल्यांकित किया जा रहा है।
भारत के मॉडल सेक्टर: इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, सेमीकंडक्टर
मिश्रा ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को 'खुलेपन और कम संवेदनशीलता' की नीति का सबसे अच्छा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि फार्मा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में भी यही रणनीति कारगर साबित हो रही है। गौरतलब है कि इन तीनों क्षेत्रों में भारत ने हाल के वर्षों में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) के ज़रिए घरेलू क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, पी.के. मिश्रा के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्गठन को एक अवसर के रूप में देख रही है। आने वाले समय में FTA वार्ताओं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहनों और ऊर्जा नीति में इस सोच की झलक और स्पष्ट होने की उम्मीद है।