NSE सीईओ आशीष कुमार चौहान बोले — आधुनिक जीवनशैली में योग अनिवार्य, मानसिक-शारीरिक दोनों समस्याओं में राहत
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कहा कि आज की तेज़ रफ्तार और स्क्रीन-केंद्रित जीवनशैली में योग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अनिवार्य हो गया है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि योग एकमात्र ऐसी विधा है जो बिना किसी बाहरी उपकरण के व्यक्ति को स्वस्थ और संतुलित रख सकती है।
योग दिवस का वैश्विक महत्व
चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया था। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इस दिन को उत्साह के साथ मनाती है, जो इस बात का प्रमाण है कि योग के लाभ किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं हैं।
गौरतलब है कि पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जाने लगा है — यह भारत की सॉफ्ट पावर का एक उल्लेखनीय उदाहरण बन चुका है।
स्क्रीन टाइम और आधुनिक समस्याएँ
NSE प्रमुख ने कहा कि मौजूदा दौर में स्क्रीन का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है और बड़ी संख्या में लोग घंटों तक स्क्रीन के सामने काम करते हैं। इससे आँखों पर दबाव, गर्दन व पीठ दर्द और मानसिक थकान जैसी समस्याएँ उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी समस्याओं से निपटने में योग प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
युवाओं को विशेष सलाह
चौहान ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 25 से 30 वर्ष की आयु तक शरीर में आमतौर पर गंभीर समस्याएँ सामने नहीं आतीं, इसलिए इस उम्र में योग को नज़रअंदाज़ करना भविष्य में महँगा पड़ सकता है। उनके अनुसार, यदि शुरुआत से ही योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचा जा सकता है।
NSE का IPO और कानूनी विवाद
योग दिवस की चर्चा के अलावा, NSE इन दिनों अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को लेकर भी चर्चा में है। एक्सचेंज की ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) हाल ही में सार्वजनिक हुई है, जिसमें कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं।
DRHP के 'आवश्यक कानूनी मामलों' वाले खंड के अनुसार, को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवाद अभी भी अनसुलझे हैं। NSE ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ इन मामलों को निपटाने के लिए ₹1,491.21 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव दिया है। ये मामले सर्वोच्च न्यायालय, SEBI और अन्य कानूनी मंचों पर विचाराधीन हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब NSE का IPO बाज़ार में दीर्घप्रतीक्षित घटना मानी जा रही है और निवेशकों की नज़रें इन कानूनी पेचीदगियों के निपटारे पर टिकी हैं।
आगे क्या
NSE के IPO की आगे की राह काफी हद तक SEBI के साथ को-लोकेशन विवाद के निपटारे पर निर्भर करेगी। वहीं, आशीष कुमार चौहान का योग संदेश यह रेखांकित करता है कि वित्तीय जगत के शीर्ष अधिकारी भी अब समग्र स्वास्थ्य को कॉर्पोरेट संस्कृति का हिस्सा मानने लगे हैं।