काजीरंगा में रिजॉर्ट निर्माण पर अदिवि शेष ने उठाए सवाल, असम सरकार से पर्यावरण समीक्षा की माँग
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण भारतीय अभिनेता अदिवि शेष ने 14 अक्टूबर 2026 को असम सरकार को एक खुला पत्र लिखकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण की दृष्टि से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में प्रस्तावित रिजॉर्ट निर्माण योजना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने माँग की कि वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन और स्थानीय समुदायों की आजीविका को किसी भी विकास निर्णय में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
अभिनेता की मुख्य माँगें
अदिवि शेष ने अपने पत्र में असम सरकार से तीन ठोस माँगें रखीं — प्रस्तावित रिजॉर्ट के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव की सावधानीपूर्वक समीक्षा, भूमि से संबंधित समस्त जानकारी को सार्वजनिक करना, और आवश्यकतानुसार एक स्वतंत्र पर्यावरणीय आकलन कराना। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी फैसले से पहले पर्यावरण, कानून और स्थानीय समुदायों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जाँच होनी चाहिए, जिसे बाद में पलटा न जा सके।
काजीरंगा की अनूठी जैव विविधता पर चिंता
अभिनेता ने एक सींग वाले गैंडे — जो काजीरंगा की वैश्विक पहचान है — के प्राकृतिक आवास पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर विशेष रूप से आगाह किया। उन्होंने कहा, 'एक सींग वाला गैंडा सिर्फ असम की पहचान नहीं है बल्कि यह हमारी शानदार जैव विविधता का प्रतीक है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।'
उन्होंने आगे कहा कि जब किसी जानवर का प्राकृतिक ठिकाना छिन जाता है या उसका आवागमन मार्ग बाधित होता है, तो पारिस्थितिक संतुलन पुनः स्थापित करना बेहद कठिन — और कई बार असंभव — हो जाता है।
विकास बनाम संरक्षण की बहस
अदिवि शेष ने एक तीखा प्रश्न उठाया: 'क्या जमीन के हर हिस्से को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए विकसित करना जरूरी है? क्या निर्माण से मिलने वाला तुरंत फायदा वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ने वाले दीर्घकालिक नुकसान से ज्यादा महत्वपूर्ण है?' उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल टूरिज्म का वास्तविक अर्थ प्रकृति को बिना हानि पहुँचाए उसका अनुभव करना है — न कि उस नैसर्गिक वातावरण को ही बदल देना, जो किसी स्थान को विशिष्ट बनाता है।
गौरतलब है कि काजीरंगा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यहाँ दुनिया के दो-तिहाई से अधिक एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। यह क्षेत्र पहले से ही बाढ़, अतिक्रमण और राजमार्ग निर्माण जैसे खतरों से जूझ रहा है।
स्थानीय समुदायों की आवाज़
अभिनेता ने यह भी रेखांकित किया कि काजीरंगा क्षेत्र में कई स्थानीय समुदाय रहते हैं, जिनकी जीवनशैली, आजीविका और परंपराएँ पीढ़ियों से इस भूमि और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'इन लोगों की आवाज, उनके अनुभव और चिंताओं को उन सभी फैसलों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, जिनका असर उनके आसपास के इलाके पर पड़ता है।' उनका तर्क था कि जो समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जी रहे हैं, उन्हें नीति-निर्धारण की प्रक्रिया से बाहर रखना संरक्षण के प्रयासों को कमज़ोर कर देता है।
आगे क्या होगा
अदिवि शेष का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में व्यावसायिक निर्माण को लेकर बहस तेज़ हो रही है। असम सरकार की ओर से अभी तक इस पत्र का कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और वन्यजीव विशेषज्ञों की नज़र अब इस बात पर होगी कि राज्य सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित परियोजना की पर्यावरणीय समीक्षा किस दिशा में जाती है।