कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर राजनीति बंद हो: आर. अशोक बोले — एनजीटी आदेश पर केंद्र ने जारी की अधिसूचना
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 21 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लागू करने की अधिसूचना राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में जारी की है — यह केंद्र का अपना स्वैच्छिक निर्णय नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चेताया कि इस संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
विशेष सत्र में विपक्ष की दलीलें
बेंगलुरु में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर चर्चा के लिए बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस के मंत्रियों को यह प्रचार बंद करना चाहिए कि यह आदेश प्रधानमंत्री ने जारी किया है। उनके अनुसार, यह अधिसूचना अदालत के निर्देशों पर आधारित है।
उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह जमीनी स्तर पर विस्तृत सर्वेक्षण कराए और सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वकीलों की नियुक्ति करे।
केरल मॉडल अपनाने का सुझाव
अशोक ने कर्नाटक सरकार को केरल मॉडल अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि केरल सरकार ने जमीनी सर्वेक्षण के माध्यम से बागानों और मकानों की पहचान कर एक विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी और केंद्र सरकार को सौंपी थी, जिसकी बदौलत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) का दायरा कम कराने में सफलता मिली।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्नाटक सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती, तो एनजीटी केंद्र सरकार को रिपोर्ट सीधे लागू करने का निर्देश दे सकती है।
किसानों पर संभावित असर
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के 1,576 गाँवों और 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित किया गया है — जो सभी राज्यों में सर्वाधिक है। अशोक ने कहा कि सैटेलाइट चित्रों में खेतों और कॉफी बागानों को गलत तरीके से जंगल के रूप में दर्ज किया गया है, जिससे 10 जिलों के लाखों किसान प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण गाँवों में सड़क निर्माण, पुल मरम्मत और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं बाधित हो रही हैं। उनके शब्दों में, 'मानसून में यदि कोई पुल टूट जाता है तो उसकी मरम्मत तक नहीं हो सकती।'
पश्चिमी घाट का संरक्षण संदर्भ
पश्चिमी घाट छह राज्यों में फैले 1,64,280 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, प्रतिवर्ष 40 लाख टन कार्बन अवशोषित करता है और यहाँ 8 जैव विविधता हॉटस्पॉट तथा 325 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 2010 में गठित माधव गाडगिल समिति ने कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश की थी, जिसके विरोध में कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई और उसने 37 प्रतिशत यानी 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करने का सुझाव दिया।
अशोक ने यह भी बताया कि गोवा फाउंडेशन लगातार गाडगिल रिपोर्ट लागू करने की माँग कर रहा है और इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुका है। एनजीटी ने निर्देश दिया है कि 2017 की अधिसूचना में कोई बदलाव न किया जाए।
संजय कुमार समिति और आगे की राह
केंद्र सरकार ने अब संजय कुमार की अध्यक्षता में एक नई समिति गठित की है, जिसका कार्यकाल 2027 तक रहेगा। अशोक ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह जमीनी सर्वेक्षण रिपोर्ट शीघ्र तैयार कर केंद्र और एनजीटी को भेजे, अन्यथा कानूनी जटिलताएँ और गहरी हो सकती हैं।