21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर राजनीति बंद हो: आर. अशोक बोले — एनजीटी आदेश पर केंद्र ने जारी की अधिसूचना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर राजनीति बंद हो: आर. अशोक बोले — एनजीटी आदेश पर केंद्र ने जारी की अधिसूचना

सारांश

कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र में BJP नेता आर. अशोक ने स्पष्ट किया कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की अधिसूचना एनजीटी का आदेश है, न कि केंद्र की पहल। 10 जिलों के लाखों किसान प्रभावित हैं और केरल मॉडल अपनाने की सलाह दी गई है।

मुख्य बातें

अशोक ने 21 सितंबर 2026 को विधानसभा के विशेष सत्र में कहा कि कस्तूरीरंगन अधिसूचना एनजीटी के आदेश का अनुपालन है, केंद्र का स्वैच्छिक निर्णय नहीं।
कर्नाटक के 1,576 गाँवों और 20,668 वर्ग किलोमीटर को ईएसए घोषित किया गया — सभी राज्यों में सर्वाधिक।
सैटेलाइट चित्रों में खेत और कॉफी बागान गलती से 'जंगल' दर्ज; 10 जिलों के लाखों किसान प्रभावित।
अशोक ने केरल मॉडल अपनाने और सर्वोच्च न्यायालय में विशेषज्ञ वकीलों की नियुक्ति की सलाह दी।
केंद्र सरकार ने संजय कुमार की अध्यक्षता में नई समिति गठित की, कार्यकाल 2027 तक।
पश्चिमी घाट 1,64,280 वर्ग किलोमीटर में फैला है और 40 लाख टन कार्बन अवशोषित करता है।

कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 21 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लागू करने की अधिसूचना राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में जारी की है — यह केंद्र का अपना स्वैच्छिक निर्णय नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चेताया कि इस संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

विशेष सत्र में विपक्ष की दलीलें

बेंगलुरु में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर चर्चा के लिए बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस के मंत्रियों को यह प्रचार बंद करना चाहिए कि यह आदेश प्रधानमंत्री ने जारी किया है। उनके अनुसार, यह अधिसूचना अदालत के निर्देशों पर आधारित है।

उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह जमीनी स्तर पर विस्तृत सर्वेक्षण कराए और सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वकीलों की नियुक्ति करे।

केरल मॉडल अपनाने का सुझाव

अशोक ने कर्नाटक सरकार को केरल मॉडल अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि केरल सरकार ने जमीनी सर्वेक्षण के माध्यम से बागानों और मकानों की पहचान कर एक विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी और केंद्र सरकार को सौंपी थी, जिसकी बदौलत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) का दायरा कम कराने में सफलता मिली।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्नाटक सरकार समय रहते ठोस कदम नहीं उठाती, तो एनजीटी केंद्र सरकार को रिपोर्ट सीधे लागू करने का निर्देश दे सकती है।

किसानों पर संभावित असर

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के 1,576 गाँवों और 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित किया गया है — जो सभी राज्यों में सर्वाधिक है। अशोक ने कहा कि सैटेलाइट चित्रों में खेतों और कॉफी बागानों को गलत तरीके से जंगल के रूप में दर्ज किया गया है, जिससे 10 जिलों के लाखों किसान प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण गाँवों में सड़क निर्माण, पुल मरम्मत और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं बाधित हो रही हैं। उनके शब्दों में, 'मानसून में यदि कोई पुल टूट जाता है तो उसकी मरम्मत तक नहीं हो सकती।'

पश्चिमी घाट का संरक्षण संदर्भ

पश्चिमी घाट छह राज्यों में फैले 1,64,280 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, प्रतिवर्ष 40 लाख टन कार्बन अवशोषित करता है और यहाँ 8 जैव विविधता हॉटस्पॉट तथा 325 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 2010 में गठित माधव गाडगिल समिति ने कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश की थी, जिसके विरोध में कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई और उसने 37 प्रतिशत यानी 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करने का सुझाव दिया।

अशोक ने यह भी बताया कि गोवा फाउंडेशन लगातार गाडगिल रिपोर्ट लागू करने की माँग कर रहा है और इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुका है। एनजीटी ने निर्देश दिया है कि 2017 की अधिसूचना में कोई बदलाव न किया जाए।

संजय कुमार समिति और आगे की राह

केंद्र सरकार ने अब संजय कुमार की अध्यक्षता में एक नई समिति गठित की है, जिसका कार्यकाल 2027 तक रहेगा। अशोक ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह जमीनी सर्वेक्षण रिपोर्ट शीघ्र तैयार कर केंद्र और एनजीटी को भेजे, अन्यथा कानूनी जटिलताएँ और गहरी हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या दोनों सबसे अधिक कर्नाटक में हैं। सैटेलाइट डेटा की त्रुटियाँ कोई नई बात नहीं — पर उन्हें ठीक कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, जो इसे केंद्र बनाम राज्य की राजनीतिक लड़ाई बनाकर टालती रही है। 2027 तक चलने वाली संजय कुमार समिति के नतीजों पर किसानों का भविष्य टिका है — और इस विमर्श में उनकी आवाज़ सबसे कम सुनाई दे रही है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट क्या है और यह कर्नाटक को क्यों प्रभावित करती है?
कस्तूरीरंगन समिति ने पश्चिमी घाट के 37 प्रतिशत यानी 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित करने की सिफारिश की थी। कर्नाटक में इस रिपोर्ट के अंतर्गत 1,576 गाँव और 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है, जो सभी प्रभावित राज्यों में सर्वाधिक है।
केंद्र सरकार ने कस्तूरीरंगन अधिसूचना क्यों जारी की?
भाजपा नेता आर. अशोक के अनुसार, यह अधिसूचना राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में जारी की गई है, न कि केंद्र सरकार की अपनी पहल पर। एनजीटी ने निर्देश दिया है कि 2017 की अधिसूचना में कोई बदलाव न किया जाए।
कर्नाटक के किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
सैटेलाइट चित्रों में खेत और कॉफी बागान गलती से जंगल के रूप में दर्ज हो गए हैं, जिससे 10 जिलों के लाखों किसानों की भूमि-उपयोग संबंधी अनुमतियाँ और विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। सड़क निर्माण, पुल मरम्मत और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हैं।
केरल मॉडल क्या है और कर्नाटक इसे कैसे अपना सकता है?
केरल सरकार ने जमीनी सर्वेक्षण कर बागानों और मकानों की पहचान की और एक विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी व केंद्र सरकार को सौंपी, जिससे उसके ईएसए का दायरा कम कराने में सफलता मिली। आर. अशोक ने कर्नाटक को यही रास्ता अपनाने और विशेषज्ञ वकीलों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की सलाह दी है।
संजय कुमार समिति क्या है और आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार ने संजय कुमार की अध्यक्षता में एक नई समिति गठित की है, जिसका कार्यकाल 2027 तक है। आर. अशोक ने चेताया है कि यदि कर्नाटक राज्य सरकार ने शीघ्र जमीनी सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार नहीं की, तो एनजीटी केंद्र को रिपोर्ट सीधे लागू करने का आदेश दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले