26 अक्टूबर 2026
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खड़गे की PM मोदी पर टिप्पणी पर आर. अशोक का पलटवार: 'कांग्रेस की हताशा और गिरती राजनीतिक संस्कृति का प्रमाण'

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खड़गे की PM मोदी पर टिप्पणी पर आर. अशोक का पलटवार: 'कांग्रेस की हताशा और गिरती राजनीतिक संस्कृति का प्रमाण'

सारांश

BJP के आर. अशोक ने एक साथ दो मोर्चे खोले — खड़गे की PM मोदी पर टिप्पणी को 'राजनीतिक हताशा' बताया और कर्नाटक सरकार पर गन्ना किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। ₹5,500/टन की माँग और मंगलवार के संभावित बंद के बीच, राज्य सरकार दोतरफा दबाव में है।

मुख्य बातें

अशोक ने 26 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की PM मोदी पर टिप्पणी को 'हताशा और राजनीतिक संस्कृति में गिरावट' का प्रतीक बताया।
अशोक ने राज्य सरकार से गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने की माँग की।
केंद्र ने 2026-27 सीज़न के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है; नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में संयुक्त समिति गठित।
चीनी कारखानों को बिजली आपूर्ति पर ₹2.80 प्रति यूनिट मिलता है, जबकि निजी कंपनियों को ₹22 प्रति यूनिट — यह असमानता भी उठाई गई।
किसानों ने चेतावनी दी है कि माँगें न मानी गईं तो मंगलवार को राज्यव्यापी बंद रहेगा।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 26 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणियों की तीखी आलोचना की। अशोक ने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियाँ कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति में आई गिरावट और पार्टी की बढ़ती हताशा का स्पष्ट संकेत हैं।

खड़गे की टिप्पणी पर BJP का पलटवार

आर. अशोक ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के परिवार के बारे में अपमानजनक बातें करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब राजनीतिक तर्कों और नीतिगत बहस के ज़रिये अपने विरोधियों को चुनौती देने में सक्षम नहीं रही, इसलिए वह व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। 'लोग इस असभ्य राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे' — यह उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।

गन्ना किसानों का आंदोलन और सरकार पर आरोप

कर्नाटक में जारी गन्ना किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने बेलगावी में प्रस्तावित किसान बैठकों को 'महज दिखावा' करार दिया और कहा कि सरकार वास्तविक समस्याओं को सुलझाने की बजाय बैठकों के ज़रिये किसानों को शांत करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने राज्य सरकार से गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने और चीनी कारखानों में वज़न तथा वसूली की गणना में अनियमितताओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर माँगें नहीं मानी गईं तो मंगलवार को राज्यव्यापी बंद रहेगा।

पिछले वादों पर सवाल और आँकड़ों का हवाला

अशोक ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 7 नवंबर को गन्ने का भाव ₹3,300 प्रति टन तय किया था, जिसमें चीनी कारखानों की ₹50 की सब्सिडी भी शामिल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कारखानों द्वारा अदालत में याचिका दायर करने के बाद भी राज्य सरकार किसानों को वह ₹50 का योगदान दिलाने में नाकाम रही।

इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग चीनी कारखाने एक ही गन्ने के लिए अलग-अलग वसूली दरें बता रहे हैं, और गलत तरीके से की गई बर्बादी की गणना से किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। अशोक ने यह भी कहा कि सरकार अन्य राज्यों की तरह राज्य द्वारा निर्धारित मूल्य (SAP) लागू करने में विफल रही है।

केंद्र की भूमिका और चीनी कारखानों पर बोझ

केंद्र सरकार के प्रयासों का बचाव करते हुए अशोक ने बताया कि NDA सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति का गठन किया है। उन्होंने 2026-27 सीज़न के लिए केंद्र द्वारा उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय करने और 2018 में चीनी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का भी हवाला दिया।

उन्होंने चीनी कारखानों को प्रभावित करने वाली नीतियों पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को बिजली खरीद के लिए ₹22 प्रति यूनिट का भुगतान होता है, जबकि चीनी कारखानों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली बिजली की दर महज ₹2.80 प्रति यूनिट है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पानी का शुल्क ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दिया गया है, जो कारखानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

आगे क्या होगा

अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से गन्ना उत्पादकों की माँगों को तत्काल पूरा करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि लगातार देरी से आंदोलन और उग्र हो सकता है। गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर विपक्षी दबाव झेल रही है। यदि मंगलवार का राज्यव्यापी बंद हुआ, तो यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 प्रति टन की माँग और SAP लागू करने की बात BJP उस वक्त क्यों उठाती है जब केंद्र में उसकी सरकार ने खुद FRP को ₹365 प्रति क्विंटल पर रखा है — दोनों आँकड़ों के बीच की खाई पर कोई ध्यान नहीं देता। गन्ना किसानों की समस्याएँ राज्य और केंद्र दोनों की नीतिगत विफलताओं का परिणाम हैं; इसे सिर्फ सत्ता-पक्ष की लापरवाही बताकर बात खत्म करना वास्तविकता को सरलीकृत करना होगा।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. अशोक ने मल्लिकार्जुन खड़गे की किस टिप्पणी पर आपत्ति जताई?
आर. अशोक ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई उन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई, जिन्हें उन्होंने 'सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के परिवार के बारे में अपमानजनक' बताया। उनका कहना था कि यह कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और संस्कृति में गिरावट को दर्शाता है।
कर्नाटक में गन्ना किसानों की मुख्य माँगें क्या हैं?
किसान राज्य सरकार से गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने, चीनी कारखानों में वज़न और वसूली गणना की अनियमितताओं को रोकने और अन्य राज्यों की तर्ज पर राज्य द्वारा निर्धारित मूल्य (SAP) लागू करने की माँग कर रहे हैं। इन माँगों के पूरा न होने पर मंगलवार को राज्यव्यापी बंद की चेतावनी दी गई है।
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
केंद्र की NDA सरकार ने 2026-27 सीज़न के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है और नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति का गठन किया है। केंद्र ने 2018 में चीनी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी लागू किया था।
आर. अशोक ने कर्नाटक में DK शिवकुमार सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अशोक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार किसानों को गुमराह कर रहे हैं और बेलगावी में प्रस्तावित किसान बैठकें महज दिखावा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया द्वारा घोषित ₹3,300 प्रति टन के भाव में शामिल ₹50 की सब्सिडी भी किसानों को नहीं दिलाई जा सकी।
चीनी कारखानों पर बिजली और पानी के शुल्क को लेकर क्या विवाद है?
आर. अशोक के अनुसार निजी कंपनियों को बिजली खरीद के लिए ₹22 प्रति यूनिट मिलता है, जबकि चीनी कारखानों की आपूर्ति दर केवल ₹2.80 प्रति यूनिट है। साथ ही पानी का शुल्क ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दिया गया है, जिससे कारखानों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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