खड़गे की PM मोदी पर टिप्पणी पर आर. अशोक का पलटवार: 'कांग्रेस की हताशा और गिरती राजनीतिक संस्कृति का प्रमाण'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 26 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणियों की तीखी आलोचना की। अशोक ने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियाँ कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति में आई गिरावट और पार्टी की बढ़ती हताशा का स्पष्ट संकेत हैं।
खड़गे की टिप्पणी पर BJP का पलटवार
आर. अशोक ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के परिवार के बारे में अपमानजनक बातें करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब राजनीतिक तर्कों और नीतिगत बहस के ज़रिये अपने विरोधियों को चुनौती देने में सक्षम नहीं रही, इसलिए वह व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रही है। 'लोग इस असभ्य राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे' — यह उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।
गन्ना किसानों का आंदोलन और सरकार पर आरोप
कर्नाटक में जारी गन्ना किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने बेलगावी में प्रस्तावित किसान बैठकों को 'महज दिखावा' करार दिया और कहा कि सरकार वास्तविक समस्याओं को सुलझाने की बजाय बैठकों के ज़रिये किसानों को शांत करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने राज्य सरकार से गन्ने का भाव ₹5,500 प्रति टन तय करने और चीनी कारखानों में वज़न तथा वसूली की गणना में अनियमितताओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर माँगें नहीं मानी गईं तो मंगलवार को राज्यव्यापी बंद रहेगा।
पिछले वादों पर सवाल और आँकड़ों का हवाला
अशोक ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 7 नवंबर को गन्ने का भाव ₹3,300 प्रति टन तय किया था, जिसमें चीनी कारखानों की ₹50 की सब्सिडी भी शामिल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कारखानों द्वारा अदालत में याचिका दायर करने के बाद भी राज्य सरकार किसानों को वह ₹50 का योगदान दिलाने में नाकाम रही।
इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग चीनी कारखाने एक ही गन्ने के लिए अलग-अलग वसूली दरें बता रहे हैं, और गलत तरीके से की गई बर्बादी की गणना से किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। अशोक ने यह भी कहा कि सरकार अन्य राज्यों की तरह राज्य द्वारा निर्धारित मूल्य (SAP) लागू करने में विफल रही है।
केंद्र की भूमिका और चीनी कारखानों पर बोझ
केंद्र सरकार के प्रयासों का बचाव करते हुए अशोक ने बताया कि NDA सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति का गठन किया है। उन्होंने 2026-27 सीज़न के लिए केंद्र द्वारा उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय करने और 2018 में चीनी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने का भी हवाला दिया।
उन्होंने चीनी कारखानों को प्रभावित करने वाली नीतियों पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को बिजली खरीद के लिए ₹22 प्रति यूनिट का भुगतान होता है, जबकि चीनी कारखानों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली बिजली की दर महज ₹2.80 प्रति यूनिट है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पानी का शुल्क ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दिया गया है, जो कारखानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
आगे क्या होगा
अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से गन्ना उत्पादकों की माँगों को तत्काल पूरा करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि लगातार देरी से आंदोलन और उग्र हो सकता है। गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर विपक्षी दबाव झेल रही है। यदि मंगलवार का राज्यव्यापी बंद हुआ, तो यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो सकता है।