कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से मालेनाडू किसानों को डर नहीं: कर्नाटक सरकार का भरोसा, 1,576 गांव दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री तथा शिवमोग्गा के प्रभारी मंत्री मधु बंगारप्पा ने 26 अगस्त 2026 को मालेनाडू क्षेत्र के किसानों को स्पष्ट आश्वासन दिया कि कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तावित पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) अधिसूचना कर्नाटक में लागू नहीं होगी। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी सातवीं ड्राफ्ट अधिसूचना के बाद किसानों में उपजी बेचैनी को देखते हुए यह बयान आया है।
केंद्र की अधिसूचना और राज्य का विरोध
केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट में कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों के आधार पर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करते हुए सातवीं ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के अनुसार, कर्नाटक के 1,576 गांवों को मिलाकर 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ईएसए के रूप में वर्गीकृत करने का प्रस्ताव है। इनमें अकेले शिवमोग्गा जिले के 484 गांव शामिल हैं।
बंगारप्पा ने एक वीडियो बयान में कहा कि यह अधिसूचना 'निंदनीय' है और राज्य सरकार इसे स्वीकार नहीं कर सकती। गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा पहले ही इस रिपोर्ट को खारिज करने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है और इसकी आधिकारिक सूचना केंद्र को दी जा चुकी है — इसके बावजूद केंद्र ने नई ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की।
किसानों की चिंता और सरकार का आश्वासन
प्रस्तावित ईएसए सीमा में आबादी वाले इलाकों और कृषि भूमि को शामिल किए जाने से मालेनाडू के किसानों में स्वाभाविक आशंका पैदा हुई है। बंगारप्पा ने स्पष्ट किया कि 'हमारी सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे मालेनाडू के किसानों के हितों पर असर पड़े। हम किसानों के साथ खड़े हैं और उनके हितों की रक्षा की जाएगी।'
उन्होंने यह भी बताया कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में इस विषय पर आधिकारिक बयान दे चुके हैं, जो राज्य के विरोध की स्थिति को और पुख्ता करता है।
विधायकों की भूमिका और राजनीतिक संदर्भ
बंगारप्पा ने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आर.वी. देशपांडे और विधायकों भीमन्ना टी. नाइक, टी.डी. राजेगौड़ा, एच.डी. थम्मैया तथा ए.एस. पोन्नान्ना ने विधानसभा के भीतर और बाहर यह मुद्दा उठाया था। यह ऐसे समय में आया है जब विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे केंद्र की अधिसूचना की निंदा करने के बजाय किसानों के बीच भ्रम फैला रहे हैं और मॉनसून सत्र में बाधा डाल रहे हैं, जिससे इस अहम मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो पा रही।
मुख्यमंत्री का रुख
बंगारप्पा ने बताया कि उन्होंने इस मसले पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की, जिन्होंने ड्राफ्ट अधिसूचना का विरोध करने के राज्य सरकार के फैसले की पुष्टि की और किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार केंद्र को अपनी आपत्तियाँ औपचारिक रूप से दर्ज कराएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय कर्नाटक की आपत्तियों को मानते हुए अधिसूचना में संशोधन करता है या अंतिम अधिसूचना जारी करने की दिशा में आगे बढ़ता है — जो पश्चिमी घाट के राज्यों और केंद्र के बीच एक बड़े टकराव को जन्म दे सकता है।