30 जुलाई 2026
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कर्नाटक सूखा घोषणा न हुई तो 3 अगस्त से 'चलो होला गड्ढे' आंदोलन: विपक्ष नेता आर. अशोक की चेतावनी

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कर्नाटक सूखा घोषणा न हुई तो 3 अगस्त से 'चलो होला गड्ढे' आंदोलन: विपक्ष नेता आर. अशोक की चेतावनी

सारांश

कर्नाटक विपक्ष नेता आर. अशोक ने बल्लारी दौरे के बाद कांग्रेस सरकार को अल्टीमेटम दिया — 3 अगस्त तक सूखा घोषित न हुआ तो 'चलो होला गड्ढे' आंदोलन शुरू होगा। जिले में 50 दिन बाद भी मात्र 38% बुआई, तुंगभद्रा में 36 टीएमसी पानी फिर भी किसानों को राहत नहीं।

मुख्य बातें

कर्नाटक विपक्ष नेता आर.
अशोक ने 3 अगस्त 2026 से ' चलो होला गड्ढे ' विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।
बल्लारी जिले में 50 दिन बाद भी कुल बुआई मात्र 38% ; कुरुगोडु तालुक में सबसे कम 5.32% ।
तुंगभद्रा जलाशय में 36 टीएमसी पानी उपलब्ध, लेकिन फसलों के लिए अभी तक जल-विमोचन नहीं।
अशोक ने किसानों को प्रति एकड़ ₹50,000 मुआवजा और प्रत्येक तालुक के लिए ₹50 करोड़ आवंटन की माँग की।
राज्य वित्त विभाग ने सूखा घोषणा पर वित्तीय दबाव की चेतावनी दी; सूखा घोषित किए बिना केंद्र से ₹10,000 करोड़ माँगे गए।
अशोक ने प्रति किसान ₹1 लाख तक कर्ज माफी का सुझाव दिया; मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार पर सीधा हमला।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 30 जुलाई को बल्लारी के करेकल गांव का दौरा कर फसल नुकसान का जायजा लेने के बाद राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी — यदि तत्काल सूखा घोषित नहीं किया गया, तो 3 अगस्त से 'चलो होला गड्ढे' (खेतों और जमीनों की ओर) नामक राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार किसानों की बदहाली के बावजूद सूखा घोषित करने में जानबूझकर देरी कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम

अशोक ने बताया कि बल्लारी जिले में कुल बुआई मात्र 38 प्रतिशत हुई है और 50 दिन बीत चुके हैं। तालुकवार स्थिति और भी चिंताजनक है — बल्लारी तालुक में 14.56%, कुरुगोडु में 5.32%, सिर्फ सिरुगुप्पा में 52.79%, संदूर में 67.33% और काम्पली में 34.91% बुआई हुई है। मक्का और कपास जैसी फसलें बोई तो गईं, लेकिन पौधे उगे ही नहीं।

अशोक ने कहा, 'भले ही सभी जिलों में सूखा पड़ा है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे घोषित नहीं किया है। अगर तुरंत सूखा घोषित नहीं किया गया तो हम सभी किसानों के खेतों में बैठकर धरना देंगे। कहीं भी छोटा-सा भी पौधा नहीं उगा है।'

सरकार की स्थिति और वित्तीय अड़चन

सूत्रों के अनुसार, राज्य के वित्त विभाग ने आंतरिक चेतावनी जारी की है कि आय कम होने के कारण सूखा घोषित होने पर तत्काल राहत देना वित्तीय दबाव बढ़ाएगा। इसके बावजूद अशोक ने कहा कि सूखा घोषित किए बिना ही केंद्र सरकार से ₹10,000 करोड़ की मांग की गई है, जो प्रक्रियागत रूप से गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले सूखे का सर्वेक्षण होना चाहिए, रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजी जानी चाहिए — तभी बीमा कंपनियाँ सक्रिय होंगी और केंद्रीय राहत मिलेगी।

किसानों की माँगें और मुआवजे का मुद्दा

अशोक ने माँग की कि प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए, हर तालुक के लिए ₹50 करोड़ का आवंटन हो, और पीने के पानी तथा पशुचारे का इंतजाम किया जाए। उन्होंने बताया कि किसानों ने प्रति एकड़ ₹30,000–₹40,000 और बीज के लिए ₹3,000 प्रति किलो खर्च किए थे, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। उन्होंने यह भी सुझाया कि तत्काल लागू किया जाए तो प्रति किसान ₹1 लाख तक का कर्ज माफ करना फायदेमंद होगा।

तुंगभद्रा जलाशय और पदयात्रा की घोषणा

तुंगभद्रा जलाशय में अभी 36 टीएमसी पानी उपलब्ध है, लेकिन उसे फसलों के लिए नहीं छोड़ा गया। अशोक ने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकाल में जब सिर्फ 26 टीएमसी पानी था, तब भी फसलों के लिए पानी छोड़ा गया था। इसके विरोध में सभी भाजपा नेता अंजनेय मंदिर से जलाशय तक पदयात्रा करेंगे।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में खेत, खजाना और जलाशय — तीनों खाली हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बल्लारी के कांग्रेस विधायक फाइव-स्टार होटलों में रह रहे हैं, जबकि जिले के किसान बुआई तक नहीं कर पाए। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के दौरे को 'महज प्रचार' करार देते हुए आरोप लगाया कि इसका असली मकसद मेकेदातु परियोजना का विरोध और कावेरी का पानी रोकना था। अशोक ने वीरपुर झील के जल प्रदूषण का भी मुद्दा उठाया और भरोसा दिलाया कि ये सभी मुद्दे विधानसभा सत्र में उठाए जाएंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून की अनियमितता से कई जिले प्रभावित हैं और किसान संगठन भी लंबे समय से सूखा राहत की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में 'चलो होला गड्ढे' आंदोलन की तीव्रता और सरकार की प्रतिक्रिया, दोनों पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक विफलता की स्पष्ट तस्वीर है। असली सवाल यह है कि वित्त विभाग की 'राजस्व कम है' वाली दलील किसानों के संकट से बड़ी कैसे हो सकती है? सूखा घोषित किए बिना केंद्र से ₹10,000 करोड़ माँगना प्रक्रियागत रूप से गलत है और इससे राहत मिलने की संभावना भी कम हो जाती है। कर्नाटक में कृषि संकट अब केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि नीतिगत जड़ता का नतीजा बनता दिख रहा है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चलो होला गड्ढे' विरोध प्रदर्शन क्या है?
'चलो होला गड्ढे' कर्नाटक भाजपा द्वारा घोषित वह आंदोलन है जिसमें नेता और कार्यकर्ता किसानों के खेतों में जाकर धरना देंगे। विपक्ष नेता आर. अशोक ने 3 अगस्त 2026 से यह प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है, यदि राज्य सरकार तत्काल सूखा घोषित नहीं करती।
कर्नाटक में सूखा घोषित क्यों नहीं किया गया?
राज्य के वित्त विभाग ने आंतरिक रूप से चेतावनी दी है कि आय कम होने के कारण सूखा घोषित होने पर तत्काल राहत देना वित्तीय दबाव बढ़ाएगा। अशोक के अनुसार, इसी कारण कांग्रेस सरकार घोषणा में देरी कर रही है, जबकि किसान बुआई तक नहीं कर पाए हैं।
बल्लारी जिले में बुआई की स्थिति कितनी गंभीर है?
50 दिन बीत जाने के बाद भी बल्लारी जिले में कुल बुआई मात्र 38% हुई है। कुरुगोडु तालुक में सबसे कम 5.32% बुआई हुई है, जबकि संदूर में 67.33% और सिरुगुप्पा में 52.79% बुआई हुई है। मक्का और कपास की फसलें बोई गईं लेकिन पौधे नहीं उगे।
किसानों के लिए क्या मुआवजे की माँग की गई है?
आर. अशोक ने माँग की है कि किसानों को प्रति एकड़ ₹50,000 मुआवजा दिया जाए, हर तालुक के लिए ₹50 करोड़ आवंटित हों, और पीने के पानी व पशुचारे का इंतजाम हो। उन्होंने प्रति किसान ₹1 लाख तक कर्ज माफी का सुझाव भी दिया।
तुंगभद्रा जलाशय का पानी किसानों को क्यों नहीं मिल रहा?
तुंगभद्रा जलाशय में 36 टीएमसी पानी उपलब्ध है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे फसलों के लिए नहीं छोड़ा है। अशोक ने बताया कि भाजपा कार्यकाल में जब केवल 26 टीएमसी पानी था, तब भी किसानों के लिए जल-विमोचन किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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