क्या <b>दिल्ली शब्दोत्सव 2026</b> में अखिलेंद्र मिश्रा ने हिंदी सिनेमा के लेखकों को सलाह दी?
सारांश
Key Takeaways
- सिनेमा समाज का आईना होता है।
- अच्छी फिल्में बनाने के लिए पढ़ाई जरूरी है।
- आज के गानों की गुणवत्ता में गिरावट आई है।
- समाज को सिनेमा के प्रभाव को समझना चाहिए।
- अभिनेताओं को हर मुद्दे पर अपनी राय रखनी चाहिए।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फिल्मों और टीवी में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाने वाले अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 'लगान' में निभाया गया उनका लोहार का किरदार आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। दिल्ली शब्दोत्सव में राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में उन्होंने एक अभिनेता की असली परिभाषा साझा की। उन्होंने बताया कि एक अभिनेता समाज का आईना होता है।
अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि अभिनेता का मतलब केवल सेल्फी लेना या ऑटोग्राफ देना नहीं है, बल्कि उनके समाज के प्रति कुछ जिम्मेदारियाँ भी होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज का सिनेमा साहित्य से दूर होता जा रहा है और यदि हम पढ़ेंगे नहीं, तो हम अच्छी फिल्में कैसे बनाएंगे? हिंदी सिनेमा में कई लेखक ऐसे हैं, जिन्हें हिंदी शब्दों का ज्ञान नहीं है। वे अंग्रेजी में स्क्रिप्टिंग कर रहे हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा में बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं।
हिंदी सिनेमा में गानों और संगीत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल अच्छे गाने सुनने को नहीं मिलते और हालात ऐसे हैं कि पुराने गानों को रीमिक्स करके गाया जा रहा है। पहले के गानों में सुर, लय और ताल होती थी, लेकिन आजकल के गानों के बोल समझ में नहीं आते। यही कारण है कि पुराने गानों के बोल आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
समाज और सिनेमा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले समाज में जो हो रहा है, उसे प्रदर्शित करने वाली फिल्में बनती थीं, लेकिन अब जो सिनेमा दिखा रहा है, वही समाज में हो रहा है। समाज को यह तय करने की आवश्यकता है कि किस फिल्म को देखना है और बच्चों को क्या दिखाना है, क्योंकि सिनेमा का सबसे ज्यादा प्रभाव आज के युवाओं पर पड़ रहा है। अब समाज को जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
शाहरुख और बांग्लादेश विवाद पर बॉलीवुड सितारों की जिम्मेदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आप रोटी खाने के लिए मुंह खोलते हैं, तो बोलने के लिए भी खोलें। उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर अभिनेताओं को अपनी राय रखनी चाहिए।