अनुपम खेर का तीखा जवाब: 'दुनिया मेरे अतीत से सीखती है, फिर मुझे उसी पर शर्मिंदा करती है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अनुपम खेर ने 19 जून को इंस्टाग्राम पर एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत और भारतीयों को लेकर पश्चिमी देशों में प्रचलित रूढ़ियों और गलत धारणाओं पर सीधा प्रहार किया। वीडियो में खेर ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, वैश्विक योगदान और भारतीय पहचान को रेखांकित करते हुए उन आम आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया जो अक्सर भारतीयों के खिलाफ लगाए जाते हैं।
वीडियो की पृष्ठभूमि
खेर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि कुछ दिन पहले उन्हें व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला। उन्होंने कहा, 'मैंने उसे पढ़ा, मुस्कुराया और अलग रख दिया, लेकिन फिर दोबारा पढ़ा और उसमें लिखी कई बातें मेरे दिल को छू गईं।' उन्होंने स्वीकार किया कि इसी संदेश ने उन्हें यह वीडियो बनाने की प्रेरणा दी, क्योंकि पश्चिमी देशों में भारतीयों के बारे में धारणाएं कितनी आसानी से बना ली जाती हैं।
सिविक सेंस और नौकरियों पर पलटवार
वीडियो में खेर ने कहा, 'मैं एक भारतीय हूं और हर कोई कहता है कि मुझमें सिविक सेंस की कमी है। वे लोग चैंपियनशिप जीतने के बाद कारें पलट सकते हैं, सड़कों पर आग लगा सकते हैं और पूरे शहर में तोड़फोड़ कर सकते हैं, लेकिन जब मैं अपनी पहली विदेश यात्रा की खुशी में एयरपोर्ट पर नाचता हूं, तो अचानक खराब सिविक सेंस का चेहरा मैं बन जाता हूं।'
नौकरियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'वे अपनी फैक्ट्रियां दूसरे देशों में ले जाते हैं, टैक्स बचाने के लिए मुनाफा इधर-उधर करते हैं और रातोंरात पूरी इंडस्ट्री को ऑटोमेट कर देते हैं। मैं पढ़ाई करता हूं, प्रतियोगिता में सफल होता हूं, वीजा हासिल करता हूं, 18 घंटे काम करता हूं, कई बार एक साथ कई नौकरियां करता हूं और फिर भी कहा जाता है कि मैं नौकरियां चुरा रहा हूं।'
संस्कृति और विरासत का बचाव
भारत की सांस्कृतिक गहराई को रेखांकित करते हुए खेर ने कहा, 'मैं उस सभ्यता से आता हूं जिसने उस समय सितारों की गिनती की, जब दुनिया का बड़ा हिस्सा नक्शे बनाना सीख रहा था। मैं उन भाषाओं में बोलता हूं जो कई देशों से भी पुरानी हैं। मैं सैकड़ों परंपराओं का उत्सव मनाता हूं, फिर भी कहा जाता है कि मेरी कोई संस्कृति नहीं है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'दुनिया बारूद, नफरत और विभाजन की गंध से भरी है। मैं अपनी दादी की रसोई से मसालों की खुशबू लेकर चलता हूं और किसी तरह वही लोगों को खलती है।' 'वसुधैव कुटुंबकम्' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के अतीत ने दुनिया को योग, गणित, दर्शन और ध्यान दिया, फिर भी उसी अतीत पर शर्मिंदा होने को कहा जाता है।
वीडियो का संदेश
खेर ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो किसी को कुछ साबित करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को एक महत्वपूर्ण बात याद दिलाने के लिए है। उन्होंने लिखा, 'हम भारतीय बेहद अलग-अलग हैं — विविध हैं, कभी-कभी विरोधाभासी हैं, भावुक हैं, मजबूत हैं, अव्यवस्थित भी हैं, दयालु भी हैं और एक अदृश्य धागे से जुड़े हुए हैं।' पोस्ट के अंत में उन्होंने दर्शकों से आग्रह किया, 'इसे देखिए, मुस्कुराइए, सोचिए और शायद भारतीय होने पर थोड़ा गर्व महसूस कीजिए।'
सामाजिक प्रतिक्रिया और प्रासंगिकता
यह वीडियो ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासियों की पहचान और उनके योगदान को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि खेर लंबे समय से सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनका यह वीडियो भारतीय पहचान के उस व्यापक विमर्श का हिस्सा है जो डायस्पोरा समुदायों में तेजी से प्रासंगिक होता जा रहा है।