अनुपम खेर का बुजुर्गों के सम्मान पर संदेश: 'युवाओं के पास रफ्तार, बड़ों के पास तजुर्बा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अनुपम खेर ने 14 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए युवा पीढ़ी को बुजुर्गों का सम्मान करने का स्पष्ट और भावपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने समाज में बुजुर्गों को 'इर्रेलिवेंट' या 'रिडनडन्ट' कहे जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई और कहा कि अनुभव किसी ऑनलाइन टूल से नहीं मिलता।
क्या कहा अनुपम खेर ने
वीडियो में अनुपम खेर ने कहा, 'दोस्तों, आज के समय में एक नया शब्द बहुत सुनने को मिलता है — 'इर्रेलिवेंट' या 'रिडनडन्ट'। मजेदार बात ये है कि ये शब्द बुजुर्गों के लिए बहुत सुनने को मिलता है। मैं सोचता हूं कि क्या उम्र बढ़ते ही बुजुर्गों का सॉफ्टवेयर पुराना हो जाता है। क्या उम्र बढ़ने के बाद भगवान नोटिफिकेशन भेजते हैं — 'आपकी सेवा की अब आवश्यकता नहीं है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'ऐसे लोगों से मेरा छोटा सा सवाल है — क्या आपके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी भी आपके लिए 'इर्रेलिवेंट' की श्रेणी में हैं? दुनिया का इतिहास उठाकर देखिए कि कितने वैज्ञानिकों, लेखकों, कलाकारों और विचारकों ने 70 से 80 की उम्र में कमाल का काम किया है।'
अनुभव बनाम ऊर्जा: खेर का दर्शन
अभिनेता ने अपनी बात को और गहरा करते हुए कहा, 'जवानी आपको एनर्जी देती है, लेकिन उम्र आपको तजुर्बा देती है — और ये किसी ऑनलाइन टूल पर नहीं मिलता, न ही इसे कहीं से डाउनलोड किया जा सकता है। इसे जीना पड़ता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के पास रफ्तार है, तो बुजुर्गों के पास उस रास्ते का तजुर्बा है जिसकी समाज को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।
वीडियो के कैप्शन में अनुपम खेर ने लिखा, 'टाइमलेस गोल्डन एनर्जी। जवानी के पास जोश, रफ्तार और खुद को महत्वपूर्ण महसूस करने की एक अद्भुत ताकत है, लेकिन अनुभव अपने आप में एक पावरहाउस है।'
किन हस्तियों का दिया उदाहरण
खेर ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए कई विश्व-प्रसिद्ध हस्तियों के नाम गिनाए — नारायण मूर्ति, किरण मजूमदार-शॉ, नंदन नीलेकणी, आनंद महिंद्रा, मेरिल स्ट्रीप और जेम्स कैमरून — जो सभी 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं और आज भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंसान की काबिलियत की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।
समाज को क्या संदेश
वीडियो के अंत में अनुपम खेर ने कहा, 'कभी-कभी युवाओं को लगता है कि उन्हें सब पता है। लेकिन बुजुर्गों को पता है कि सब किसी को नहीं पता। यही उम्र सिखाती है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि बुजुर्ग समाज का बोझ नहीं, बल्कि एक 'चलता-फिरता इतिहास' हैं। उनका मानना है कि जवानी को नया रास्ता जल्दी मिल जाता है, लेकिन अनुभव को पता होता है कि आगे मोड़ कहाँ आने वाला है।