17 अगस्त 2026
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तीन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बंगाली निर्देशक राजा सेन का 70 वर्ष की आयु में निधन

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तीन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बंगाली निर्देशक राजा सेन का 70 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

बंगाली सिनेमा ने एक और दिग्गज खो दिया। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक राजा सेन का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 'दामू' से लेकर 'भालोबाशार गोल्पो' तक, उनका सफर बंगाल की संस्कृति और मानवीय रिश्तों को पर्दे पर जीवंत करने का अथक प्रयास था।

मुख्य बातें

बंगाली फिल्म निर्देशक राजा सेन का 16 अगस्त 2026 को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
पत्नी पापिया सेन के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट और बहु-अंग विफलता निधन का कारण बनी।
राजा सेन ने अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते — 'दामू' (सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म), 'आत्मियो स्वजन' (परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म) और सुचित्रा मित्र डॉक्यूमेंट्री (सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म)।
उनकी पहली फीचर फिल्म 'दामू' 1996 में आई थी; अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' 2019 में।
वे पत्नी पापिया सेन और दो बेटियाँ — सुभाश्री सेन व श्रेयशी सेन — छोड़ गए हैं।

बंगाली सिनेमा के प्रतिष्ठित फिल्म निर्देशक राजा सेन का रविवार, 17 अगस्त 2026 को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेता सेन को तीन दिन पूर्व अस्पताल में भर्ती कराया गया था और सुबह लगभग 10 बजे IST उन्होंने अंतिम सांस ली।

निधन का कारण और अंतिम दिन

उनकी पत्नी पापिया सेन ने बताया कि राजा सेन लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे और अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। पापिया सेन ने कहा, 'उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। धीरे-धीरे उनके कई अंगों ने काम करना बंद करना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।'

जानकारी के अनुसार, सेन को शुरुआत में पीठ में चोट लगने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति क्रमशः बिगड़ती गई — पहले फेफड़ों में जटिलता, फिर हृदय और बाद में किडनी से जुड़ी समस्याएँ सामने आईं, और अंततः बहु-अंग विफलता के कारण उनका निधन हुआ।

जीवन परिचय और करियर की शुरुआत

राजा सेन का जन्म 10 नवंबर 1955 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की नींव बंगाली टेलीविजन से रखी और शीघ्र ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। टेलीविजन में सफलता के बाद उन्होंने फीचर फिल्म निर्देशन की ओर रुख किया।

1996 में रिलीज़ हुई उनकी पहली फीचर फिल्म 'दामू' ने उन्हें तुरंत राष्ट्रीय पहचान दिलाई। रघुवीर यादव, सत्य बनर्जी और सब्यसाची चक्रवर्ती अभिनीत इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

राष्ट्रीय पुरस्कारों का सफर

राजा सेन ने अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अर्जित किए। 'दामू' के बाद उनकी फिल्म 'आत्मियो स्वजन' को परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। सामाजिक और पारिवारिक विषयों को संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारना उनकी खासियत थी।

तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें प्रख्यात रवींद्र संगीत गायिका सुचित्रा मित्र पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री के लिए सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म श्रेणी में प्राप्त हुआ। यह डॉक्यूमेंट्री बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उनके समर्पण का प्रमाण मानी जाती है।

विरासत और प्रमुख रचनाएँ

राजा सेन ने 'चक्रव्यूह', 'देश' और 'देबीपक्ष' सहित अनेक फीचर फिल्मों का निर्देशन किया। उन्होंने फिल्मकार तपन सिन्हा, रंगमंच के दिग्गज शंभु मित्र और कवि सुभाष मुखोपाध्याय जैसी विभूतियों पर भी महत्त्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री बनाईं। उनकी अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' 2019 में प्रदर्शित हुई थी।

राजा सेन अपने पीछे पत्नी पापिया सेन और दो बेटियाँ — सुभाश्री सेन और श्रेयशी सेन — छोड़ गए हैं। उनके निधन से बंगाली फिल्म और सांस्कृतिक जगत में शोक की गहरी लहर है।

बंगाली सिनेमा पर प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब बंगाली सिनेमा अपनी नई पहचान की तलाश में है। राजा सेन उन विरल निर्देशकों में से थे जिन्होंने व्यावसायिक दबाव के बावजूद सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों से कभी समझौता नहीं किया। गौरतलब है कि उनकी डॉक्यूमेंट्रियाँ बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने का एक अमूल्य दस्तावेज़ बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आज की पीढ़ी में दुर्लभ है। उनकी डॉक्यूमेंट्रियाँ महज़ फिल्में नहीं थीं — वे बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति के जीवित अभिलेख थे। यह विडंबना है कि जिस निर्देशक ने तपन सिन्हा और शंभु मित्र जैसी विभूतियों को सेलुलाइड पर अमर किया, उनके अपने जाने पर मुख्यधारा की हिंदी मीडिया में उचित स्थान नहीं मिलता। बंगाली सिनेमा को अब ऐसे निर्माताओं की ज़रूरत है जो सेन की इस विरासत को आगे ले जाएँ।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा सेन कौन थे और उनकी मृत्यु कैसे हुई?
राजा सेन बंगाली सिनेमा के प्रतिष्ठित फिल्म निर्देशक थे, जिन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे। 16 अगस्त 2026 को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में 70 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट और बहु-अंग विफलता के कारण उनका निधन हुआ।
राजा सेन को कितने और किन फिल्मों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
राजा सेन को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले — 'दामू' (1996) के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म, 'आत्मियो स्वजन' के लिए परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म, और रवींद्र संगीत गायिका सुचित्रा मित्र पर बनाई डॉक्यूमेंट्री के लिए सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म।
राजा सेन की आखिरी फिल्म कौन सी थी?
राजा सेन की अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' थी, जो 2019 में प्रदर्शित हुई थी। इससे पहले उन्होंने 'चक्रव्यूह', 'देश' और 'देबीपक्ष' जैसी फिल्में भी बनाई थीं।
राजा सेन को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया था?
पत्नी पापिया सेन के अनुसार, राजा सेन को शुरुआत में पीठ में चोट लगने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान फेफड़ों, हृदय और किडनी से जुड़ी जटिलताएँ बढ़ती गईं, जिसके बाद उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
राजा सेन के परिवार में कौन-कौन हैं?
राजा सेन अपने पीछे पत्नी पापिया सेन और दो बेटियाँ — सुभाश्री सेन और श्रेयशी सेन — छोड़ गए हैं। उनका जन्म 10 नवंबर 1955 को कोलकाता में हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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