17 अगस्त 2026
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बंगाली सिनेमा के दिग्गज राजा सेन का निधन, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक 70 वर्ष की आयु में नहीं रहे

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बंगाली सिनेमा के दिग्गज राजा सेन का निधन, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक 70 वर्ष की आयु में नहीं रहे

सारांश

बंगाली सिनेमा के तीन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजा सेन अब नहीं रहे। 'दामू', 'आत्मियो स्वजन' और सुचित्रा मित्र डॉक्यूमेंट्री जैसी कृतियों से उन्होंने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सिनेमाई भाषा दी। 70 वर्ष की आयु में उनका जाना एक पूरे युग का अंत है।

मुख्य बातें

बंगाली फिल्म निर्देशक राजा सेन का कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
वे तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता थे — 'दामू' (सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म), 'आत्मियो स्वजन' (परिवार कल्याण) और सुचित्रा मित्र डॉक्यूमेंट्री (सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म)।
पत्नी पापिया सेन के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट और कई अंगों के काम न करने के कारण उनका निधन हुआ।
उनकी अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' 2019 में रिलीज हुई थी।
वे अपने पीछे पत्नी पापिया सेन और दो बेटियाँ सुभाश्री व श्रेयशी सेन छोड़ गए हैं।

बंगाली सिनेमा के तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक राजा सेन का रविवार, 17 अगस्त 2025 को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे। सुबह करीब 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से बंगाली फिल्म और सांस्कृतिक जगत में गहरे शोक की लहर है।

बीमारी और अंतिम दिन

राजा सेन की पत्नी पापिया सेन ने मीडिया को बताया कि निर्देशक लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। उन्होंने कहा, 'उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। धीरे-धीरे उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।'

जानकारी के अनुसार, राजा सेन को शुरुआत में पीठ में चोट लगने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति क्रमशः बिगड़ती गई — पहले फेफड़ों में समस्या, फिर हृदय पर दबाव और बाद में किडनी की जटिलताएँ सामने आईं। तीन दिन पहले उन्हें एसएसकेएम अस्पताल स्थानांतरित किया गया था, जहाँ उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

करियर और राष्ट्रीय पुरस्कारों की यात्रा

राजा सेन का जन्म 10 नवंबर 1955 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बंगाली टेलीविजन से की और जल्द ही एक संवेदनशील व सामाजिक सरोकार वाले फिल्मकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

1996 में रिलीज हुई उनकी पहली फीचर फिल्म 'दामू' ने उन्हें तुरंत राष्ट्रीय पहचान दिलाई। रघुवीर यादव, सत्य बनर्जी और सब्यसाची चक्रवर्ती अभिनीत इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उनकी फिल्म 'आत्मियो स्वजन' को परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।

उनका तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार मशहूर रवींद्र संगीत गायिका सुचित्रा मित्र पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री के लिए मिला, जिसे सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। यह तथ्य उनकी बहुआयामी प्रतिभा को रेखांकित करता है — वे फीचर फिल्म और डॉक्यूमेंट्री, दोनों में समान दक्षता रखते थे।

फिल्मोग्राफी और सांस्कृतिक योगदान

राजा सेन ने अपने करियर में 'चक्रव्यूह', 'देश', 'देबीपक्ष' और अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' (2019) सहित कई उल्लेखनीय फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी डॉक्यूमेंट्रियों में बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का विशेष प्रयास दिखता है — उन्होंने फिल्मकार तपन सिन्हा, रंगमंच के दिग्गज शंभु मित्र और कवि सुभाष मुखोपाध्याय जैसी महान हस्तियों के जीवन को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से अमर किया।

उनकी फिल्मों में बंगाल की संस्कृति, सामाजिक रिश्ते और मानवीय संवेदनाएँ केंद्र में रहती थीं। वे उन विरले निर्देशकों में से थे जो व्यावसायिक दबाव से परे रहकर सार्थक सिनेमा बनाते रहे।

परिवार और श्रद्धांजलि

राजा सेन अपने पीछे पत्नी पापिया सेन और दो बेटियाँ — सुभाश्री सेन और श्रेयशी सेन — छोड़ गए हैं। बंगाली फिल्म उद्योग और सांस्कृतिक जगत के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

राजा सेन का जाना बंगाली सिनेमा के उस अध्याय के समापन जैसा है, जो सामाजिक सरोकार और कलात्मक ईमानदारी को सर्वोपरि मानता था। उनकी फिल्में और डॉक्यूमेंट्रियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सत्यजित राय के बाद सामाजिक यथार्थवाद और सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण को व्यावसायिकता से ऊपर रखती थी। तीन राष्ट्रीय पुरस्कार उनकी विविधता के प्रमाण हैं — बाल फिल्म, पारिवारिक विषय और कला डॉक्यूमेंट्री, तीनों में उत्कृष्टता विरले ही देखी जाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि राजा सेन जैसे निर्देशकों की डॉक्यूमेंट्रियाँ — तपन सिन्हा और शंभु मित्र पर — बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति के अपूरणीय अभिलेख हैं, जिनका संरक्षण और प्रसार अभी भी अपर्याप्त है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा सेन कौन थे और उन्होंने बंगाली सिनेमा में क्या योगदान दिया?
राजा सेन कोलकाता के प्रतिष्ठित बंगाली फिल्म निर्देशक थे, जिन्होंने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। उन्होंने 'दामू', 'आत्मियो स्वजन' जैसी सामाजिक फिल्मों और सुचित्रा मित्र, तपन सिन्हा जैसी हस्तियों पर डॉक्यूमेंट्रियों के ज़रिए बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सिनेमाई रूप दिया।
राजा सेन का निधन कब और कहाँ हुआ?
राजा सेन का निधन कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में रविवार की सुबह करीब 10 बजे हुआ। वह 70 वर्ष के थे और तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।
राजा सेन की मृत्यु का कारण क्या था?
पत्नी पापिया सेन के अनुसार, राजा सेन को कार्डियक अरेस्ट हुआ था और धीरे-धीरे उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। शुरुआत में पीठ में चोट के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिसके बाद फेफड़े, हृदय और किडनी की जटिलताएँ सामने आईं।
राजा सेन को कौन-कौन से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे?
राजा सेन को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले — 'दामू' के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म, 'आत्मियो स्वजन' के लिए परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म, और रवींद्र संगीत गायिका सुचित्रा मित्र पर बनाई डॉक्यूमेंट्री के लिए सर्वश्रेष्ठ कला फिल्म का पुरस्कार।
राजा सेन की आखिरी फिल्म कौन सी थी?
राजा सेन की अंतिम फीचर फिल्म 'भालोबाशार गोल्पो' थी, जो 2019 में रिलीज हुई थी। इससे पहले उन्होंने 'चक्रव्यूह', 'देश' और 'देबीपक्ष' जैसी फिल्मों का भी निर्देशन किया था।
राष्ट्र प्रेस
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