भाग्यश्री की असली कहानी: कैसे 'राजकुमारी' ने अपने क्लास के बिगड़े शहजादे पर दिल हार दिया
सारांश
Key Takeaways
- भाग्यश्री का जन्म महाराष्ट्र के सांगली राजशाही परिवार में हुआ।
- उन्होंने अपनी कक्षा के हिमालय दासानी से प्यार किया।
- प्रोटोकॉल के बावजूद, भाग्यश्री ने अपने दिल की सुनी।
- उनकी प्रेम कहानी फिल्मी अंदाज में सामने आई।
- सच्चा प्यार कभी भी मुश्किलों से नहीं डरता।
मुंबई, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कहा जाता है कि किसी भी कार्य को करने के लिए मेहनत के साथ भाग्य का होना भी अनिवार्य है, लेकिन जिनके नाम में 'भाग्य' हो, उनके लिए चीजें अपने आप सरल हो जाती हैं।
हम यहां बात कर रहे हैं अभिनेत्री भाग्यश्री की, जिन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों में काम करेंगी और अपनी एक अलग पहचान बनाएंगी। भाग्यश्री 23 फरवरी को अपना 57वां जन्मदिन मनाने जा रही हैं। क्या आप जानते हैं कि अभिनेत्री को उनके जीवन का असली प्यार कैसे मिला?
फिल्मों में अपने भोले-पन से सबका दिल जीतने वाली भाग्यश्री असली जिंदगी में भी बहुत ही सरल थीं। उनका संबंध महाराष्ट्र के सांगली राजशाही परिवार से है। उनके पिता, विजय सिंह राव माधवराव पटवर्धन, को संगीत से गहरा लगाव था और उन्होंने कई फिल्मों में संगीत भी दिया। भाग्यश्री का जीवन प्रोटोकॉल के साथ व्यतीत हुआ; उन्हें हमेशा बताया गया कि किससे बात करनी है, किससे नहीं, कैसे बात करनी है, और कहां जाना है। लेकिन कौन जानता था कि प्रोटोकॉल के बीच पढ़ाई करने वाली भाग्यश्री को उनका प्यार उनकी क्लास में ही मिल जाएगा।
कम ही लोग जानते हैं कि भाग्यश्री और हिमालय दासानी एक ही कक्षा में पढ़ते थे। जहां भाग्यश्री शांत स्वभाव की थीं, वहीं हिमालय सबसे शरारती बच्चों में से एक थे। भाग्यश्री कक्षा की मॉनिटर थीं, और हिमालय की शरारतों के कारण अक्सर उनके बीच झगड़ा होता था, लेकिन दोनों को यह नहीं पता था कि यह झगड़ा प्यार में बदलने वाला है। स्कूल में एक-दूसरे से लड़ाई करते हुए, दोनों ने साथ में पढ़ाई भी की और स्कूल खत्म होने के बाद गणित में मदद के लिए एक-दूसरे का सहारा बने।
एक साक्षात्कार में भाग्यश्री ने खुलासा किया था कि वे गणित में कमजोर थीं और हिमालय से मदद लेती थीं। लेकिन एक दिन, हिमालय ने फोन पर प्रपोज कर दिया। जब मैंने यह बात अपने पिता को बताई, तो उन्होंने सख्त मना कर दिया, जबकि उस समय मुझे भी उनके प्रति भावनाएं थीं। अपने पिता की बात मानते हुए, भाग्यश्री ने हिमालय को उस वक्त रिजेक्ट कर दिया, लेकिन उनकी दोस्ती पर कोई असर नहीं पड़ा और कॉलेज में भी उन्होंने साथ पढ़ाई की।
फिल्म 'मैंने प्यार किया' की शूटिंग के दौरान भाग्यश्री और हिमालय के लिए मिलना मुश्किल हो गया। इस स्थिति में, भाग्यश्री ने अपने माता-पिता से उनकी और हिमालय की शादी की बात की, लेकिन वे राजी नहीं हुए। अंततः मजबूरी में दोनों ने बिना परिवार की अनुमति के शादी की। विजय सिंह राव माधवराव पटवर्धन अपनी बेटी के निर्णय से इतने नाराज थे कि शादी में भी नहीं आए।