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'बर्ड्स इन द डार्क' का 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रीमियर, हंसल मेहता ने की शशांक वालिया की तारीफ

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'बर्ड्स इन द डार्क' का 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रीमियर, हंसल मेहता ने की शशांक वालिया की तारीफ

सारांश

शशांक वालिया की ब्लैक एंड व्हाइट पंजाबी फिल्म 'बर्ड्स इन द डार्क' ने बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव तक का सफर तय किया — किसान क्रांति की पृष्ठभूमि में प्रेम और प्रतिरोध की यह कहानी अब वैश्विक मंच पर भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की आवाज़ बनेगी।

मुख्य बातें

शशांक वालिया निर्देशित पंजाबी फिल्म 'बर्ड्स इन द डार्क' (हनेरे दे पंछी) का प्रीमियर 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में होगा।
निर्माता हंसल मेहता ने 24 अगस्त को इंस्टाग्राम पर फिल्म से जुड़ाव और गर्व साझा किया।
फिल्म की कहानी किसान क्रांति की पृष्ठभूमि में एक पुलिस एजेंट और झूठे आरोप में फंसे व्यक्ति के बीच प्रेम-संघर्ष पर केंद्रित है।
फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट प्रारूप में बनी है; निर्माण में हंसल मेहता , साहिल और रीमा कौर शामिल हैं।
मेहता ने शशांक वालिया को लिजो जोस पेल्लिसेरी और जय मेहता की श्रेणी में रखा।

पंजाबी फिल्म 'बर्ड्स इन द डार्क' (हनेरे दे पंछी), जिसे शशांक वालिया ने निर्देशित किया है, 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपना वर्ल्ड प्रीमियर करने जा रही है। 24 अगस्त को फिल्म के निर्माता और जाने-माने निर्देशक हंसल मेहता ने इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए इस उपलब्धि पर गर्व जताया।

हंसल मेहता ने कैसे जुड़े इस फिल्म से

हंसल मेहता ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि मौली सिंह और अंकुर पाठक पिछले साल यह फिल्म उनके पास लेकर आए थे। उन्होंने लिखा, 'हमें तब नहीं पता था कि यह इतनी खास बनेगी, जब तक हमने चंडीगढ़ में शशांक के लैपटॉप पर फिल्म के पहले 40 मिनट नहीं देखे। मैं हैरान रह गया और गर्व भी।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी पहचान बना रहा है। बुसान फिल्म महोत्सव में प्रीमियर होना किसी भी भारतीय फिल्म के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

फिल्म की कहानी और विशेषताएँ

'बर्ड्स इन द डार्क' एक ब्लैक एंड व्हाइट पंजाबी फिल्म है, जो एक निराश पुलिस एजेंट और एक झूठे आरोप में फंसे व्यक्ति के बीच बढ़ती किसान क्रांति के दौरान उपजे अनोखे प्रेम और संघर्ष की कहानी कहती है। मेहता के अनुसार, फिल्म 'इंसाफ, चाहत, प्रतिरोध और जेंडर पर एक शांत टिप्पणी है — और प्यार पर एक कोमल चिंतन, जो हर बार देखने पर कुछ और दे जाती है।'

गौरतलब है कि यह फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट प्रारूप में बनाई गई है, जो इसे समकालीन भारतीय सिनेमा में एक अलग स्थान देती है।

निर्माण टीम और श्रेय

फिल्म का निर्माण हंसल मेहता, साहिल और रीमा कौर ने प्रोड्यूसर के तौर पर किया है। रीमा कौर ने फिल्म की एडिटिंग भी की है। मेहता ने अपनी पोस्ट में पूरी अभिनय और तकनीकी टीम को बधाई दी, जिन्होंने इसे 'एक जीती-जागती, सांस लेने वाली कला का काम' बनाया।

शशांक वालिया को मिली पहचान

हंसल मेहता ने शशांक वालिया की तुलना लिजो जोस पेल्लिसेरी और जय मेहता जैसे अग्रणी फिल्ममेकर्स से करते हुए उन्हें 'हमारे समय के सबसे अलग सोच वाले फिल्ममेकर्स में से एक' बताया। यह टिप्पणी उद्योग में वालिया की बढ़ती साख को रेखांकित करती है।

मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फिल्म के ज़रिए वे उन आवाज़ों को मंच दे रहे हैं जिन पर उन्हें भरोसा है कि 'आने वाले सालों में वे मायने रखेंगी।' बुसान प्रीमियर के बाद फिल्म की भारतीय रिलीज़ की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह संकेत है कि हिंदी मुख्यधारा से परे भारतीय सिनेमा की जड़ें और गहरी हो रही हैं। हंसल मेहता का शशांक वालिया को लिजो जोस पेल्लिसेरी की पंक्ति में रखना उद्योग के भीतर से आई एक महत्वपूर्ण स्वीकृति है। सवाल यह है कि क्या ऐसी फिल्मों को बुसान के बाद भारत में भी वह वितरण और दर्शक मिलेंगे जिनकी वे हकदार हैं — या ये केवल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों तक सीमित रह जाएंगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बर्ड्स इन द डार्क' फिल्म किस बारे में है?
यह एक ब्लैक एंड व्हाइट पंजाबी फिल्म है जो किसान क्रांति की पृष्ठभूमि में एक निराश पुलिस एजेंट और एक झूठे आरोप में फंसे व्यक्ति के बीच पनपे प्रेम और संघर्ष की कहानी कहती है। फिल्म इंसाफ, प्रतिरोध और जेंडर जैसे विषयों को शांत लेकिन गहरे अंदाज़ में उठाती है।
'बर्ड्स इन द डार्क' का बुसान में प्रीमियर कब होगा?
फिल्म का प्रीमियर 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में होना तय है। सटीक तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
हंसल मेहता का इस फिल्म में क्या योगदान है?
हंसल मेहता इस फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने साहिल और रीमा कौर के साथ मिलकर फिल्म का निर्माण किया है। रीमा कौर ने फिल्म की एडिटिंग भी की है।
शशांक वालिया कौन हैं?
शशांक वालिया 'बर्ड्स इन द डार्क' के निर्देशक हैं। हंसल मेहता ने उन्हें लिजो जोस पेल्लिसेरी और जय मेहता जैसे अग्रणी फिल्ममेकर्स के साथ 'हमारे समय के सबसे अलग सोच वाले फिल्ममेकर्स में से एक' बताया है।
क्या यह फिल्म भारत में रिलीज़ होगी?
बुसान प्रीमियर के बाद फिल्म की भारतीय रिलीज़ की तारीख अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। वितरण से जुड़ी जानकारी आने वाले समय में अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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