क्या बिटकॉइन घोटाला मामले में कोर्ट ने राज कुंद्रा को समन जारी किया?
सारांश
Key Takeaways
- बिटकॉइन घोटाला में राज कुंद्रा को समन जारी किया गया है।
- ईडी ने 285 बिटकॉइन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- कुंद्रा ने लेनदेन में केवल मध्यस्थ होने का दावा किया है।
- जांच में कई महत्वपूर्ण सबूत सामने आए हैं।
- अदालत ने दोनों आरोपियों से जवाब मांगा है।
मुंबई, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने बिटकॉइन घोटाले में व्यवसायी राज कुंद्रा को समन जारी किया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है। इसी मामले में दुबई के व्यवसायी राजेश सतीजा को भी समन जारी किया गया है। दोनों आरोपियों को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
ईडी ने सितंबर 2025 में पीएमएलए के तहत दर्ज मामलों की विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश कर राज कुंद्रा और राजेश सतीजा को आरोपी घोषित किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुख्यात गेन बिटकॉइन पोंजी घोटाले के मास्टरमाइंड और प्रमोटर अमित भारद्वाज ने राज कुंद्रा को यूक्रेन में बिटकॉइन माइनिंग फार्म स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन प्रदान किए थे। हालांकि यह सौदा पूरा नहीं हुआ, लेकिन ईडी का दावा है कि 285 बिटकॉइन अभी भी राज कुंद्रा के पास हैं, जिनकी वर्तमान कीमत 150 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुंद्रा ने इस लेनदेन में केवल मध्यस्थ होने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
ईडी ने बताया कि 'टर्म शीट' नामक समझौता राज कुंद्रा और महेंद्र भारद्वाज के बीच हुआ था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि असली समझौता राज कुंद्रा और अमित भारद्वाज के बीच था। चार्जशीट में कहा गया है कि कुंद्रा का केवल मध्यस्थ होने का दावा मान्य नहीं है।
जांच एजेंसी का कहना है कि लेनदेन को सात साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज कुंद्रा को पाँच अलग-अलग किस्तों में मिले बिटकॉइन की सही संख्या याद है। इससे साबित होता है कि वे बिटकॉइन के असली लाभार्थी थे, न कि केवल मध्यस्थ।
ईडी ने आरोप लगाया कि 2018 से अब तक अनेक मौकों पर राज कुंद्रा उन वॉलेट एड्रेस की जानकारी नहीं दे सके, जिनमें 285 बिटकॉइन ट्रांसफर किए गए थे। कुंद्रा ने इसके लिए अपने आईफोन एक्स के क्षतिग्रस्त होने का कारण बताया। वहीं, ईडी ने इसे जानबूझकर सबूत नष्ट करने और अपराध से अर्जित धन को छिपाने का प्रयास बताया है।
अदालत ने अब मामले में समन जारी कर दोनों आरोपियों से जवाब मांगा है।