क्या मर्दानी से थप्पड़ तक, 2014 के बाद हीरोइन की परिभाषा बदल गई है?
सारांश
Key Takeaways
- महिला सशक्तीकरण पर जोर देने वाली फिल्में बढ़ रही हैं।
- 'मर्दानी' और 'थप्पड़' जैसी फिल्में सामाजिक मुद्दों को उठाती हैं।
- फिल्में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करती हैं।
- बॉलीवुड में महिलाओं की भूमिका का महत्व बढ़ रहा है।
- इन कहानियों के माध्यम से समाज में बदलाव की आवश्यकता को समझाया जा रहा है।
मुंबई, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में बदलाव और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प आज 11 साल का हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को प्रारंभ किया गया 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान और इसके साथ जुड़ी 'सुकन्या समृद्धि योजना' ने देश भर में बालिकाओं के सशक्तीकरण की नई कहानी लिखी है।
भाजपा सरकार के आने के बाद न केवल महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं लागू की गईं, बल्कि बॉलीवुड ने भी महिला केंद्रित कहानियों के माध्यम से समाज को प्रेरित किया है।
2014 के बाद रिलीज हुई कई फिल्मों ने यह संदेश दिया है कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती हैं और अपने निर्णयों से समाज में परिवर्तन ला सकती हैं।
मर्दानी: रानी मुखर्जी की 'मर्दानी' फ्रैंचाइज़ी दर्शकों के दिलों में बस गई है। इस फ्रैंचाइज़ी का तीसरा भाग जल्द ही रिलीज होने वाला है। इसमें रानी ने शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाया है। 2014 में आई फिल्म 'मर्दानी' में शिवानी एक निडर पुलिस अधिकारी बनकर महिला उत्पीड़न और अपराध के खिलाफ लड़ाई लड़ती हैं। गोपी पुथरान द्वारा निर्देशित यह क्राइम थ्रिलर पुरुष प्रधान मानसिकता के खिलाफ है। रानी मुखर्जी ने अपने किरदार को पूरी भावनाओं के साथ जीवंत किया, जबकि विशाल जेठवा ने विलेन के रूप में सस्पेंस और डर को बढ़ाया।
हिचकी: 2018 में आई फिल्म 'हिचकी' में रानी मुखर्जी ने एक अनोखा किरदार निभाया। इस फिल्म में उन्होंने टीचर नैना माथुर का रोल किया, जो टॉरेट सिंड्रोम जैसी चुनौती का सामना करती हैं। 18 स्कूलों से रिजेक्ट होने के बाद भी नैना अपने सपनों को पूरा करने और बच्चों को पढ़ाने के अपने जुनून में लगी रहती हैं। सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा द्वारा निर्देशित यह कॉमेडी ड्रामा समाज को उन बीमारियों और मानसिक चुनौतियों के प्रति जागरूक करता है जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
डियर जिंदगी: 2016 में आई फिल्म में आलिया भट्ट और शाहरुख खान ने मानसिक स्वास्थ्य और खुद को समझने के महत्व पर आधारित कहानी प्रस्तुत की। आलिया का किरदार कायरा अपनी जिंदगी की उलझनों और डर से जूझती है और मनोचिकित्सक शाहरुख खान उसे खुश रहने का तरीका सिखाते हैं। गौरी शिंदे द्वारा निर्देशित यह फिल्म महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश देती है।
राजी: फिल्म राजी में आलिया भट्ट ने सहमत का किरदार निभाया, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय देश के लिए पाकिस्तान में जासूस बन जाती है। मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित यह थ्रिलर न केवल देशभक्ति की कहानी बताती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि महिलाएं अपने साहस और बुद्धिमानी से किसी भी मुसीबत में सफल हो सकती हैं। विक्की कौशल, जयदीप अहलावत और संजय सूरी ने भी अपने किरदारों से इसे सशक्त किया।
थप्पड़: अनुभव सिन्हा की फिल्म 'थप्पड़' ने घरेलू हिंसा और पारिवारिक दबाव की उन कहानियों को दर्शाया है जिनमें महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खड़ी नहीं हो पातीं। 2020 में आई इस फिल्म में तापसी पन्नू ने अमृता के किरदार में दिखाया कि कैसे एक छोटे से थप्पड़ ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसने अपने हक के लिए आवाज उठाई। फिल्म में कई महिलाओं के जीवन की कहानियां दिखाई गई हैं, जिससे यह समझाया गया है कि हर महिला अपने अधिकारों के प्रति संवेदनशील होती है।
द केरल स्टोरी: निर्देशक सुदीप्तो सेन की फिल्म 'द केरल स्टोरी' 2023 में रिलीज हुई। इस फिल्म की कहानी फातिमा उर्फ शालिनी (अदा शर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी सहेलियों के साथ नर्सिंग स्कूल में एडमिशन लेती है, पर वे कट्टरपंथी संगठनों के जाल में फंस जाती हैं। शालिनी को पहले पाकिस्तान और फिर सीरिया ले जाया जाता है। अदा शर्मा का किरदार डर, पीड़ा और बेचैनी के बावजूद अपनी पहचान और स्वतंत्रता की लड़ाई को मजबूती से दर्शाता है।