जब 10 साल की बच्ची ने मंच पर गाकर जीता सिनेमा जगत का दिल: जानें राजकुमारी की कहानी

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जब 10 साल की बच्ची ने मंच पर गाकर जीता सिनेमा जगत का दिल: जानें राजकुमारी की कहानी

सारांश

राजकुमारी दुबे, जिसने अपनी मधुर आवाज से सिनेमा जगत में अमिट छाप छोड़ी, की प्रेरणादायक यात्रा। जानें उनके संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में।

Key Takeaways

  • राजकुमारी की आवाज ने सिनेमा जगत में एक नई पहचान बनाई।
  • उन्होंने 10 साल की उम्र में मंच पर प्रस्तुति दी।
  • कई क्लासिक फिल्मों में गाने गाए।
  • संगीतकारों के साथ मिलकर अद्भुत गीत गाए।
  • उनकी यात्रा प्रेरणादायक है।

नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पुरानी हिंदी फिल्मों का संगीत सुनते ही कुछ आवाजें आज भी दिल को छू जाती हैं। इनमें से एक अद्भुत और यादगार आवाज थी राजकुमारी की, जिन्होंने सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में मंच पर गाकर निर्माताओं का दिल जीत लिया और सिनेमा जगत में 'राजकुमारी' के नाम से प्रसिद्ध हो गईं। 1930 से 1970 के दशक तक उन्होंने सैकड़ों गीत गाए और कई फिल्मों में अभिनय भी किया। उनकी आवाज आज भी 'बावरे नैन', 'महल', और 'पाकीजा' जैसे क्लासिक्स में गूंजती है।

राजकुमारी दुबे, जिन्हें हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा पार्श्व गायिकाओं में गिना जाता है जिनके गाने कभी पुरानी नहीं होती। संगीत और अभिनय की दुनिया में उन्होंने एक अद्वितीय छाप छोड़ी। प्रारंभ से ही संगीत के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें आगे बढ़ाया। केवल 10 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया और एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। जब प्रकाश पिक्चर्स के निर्माता विजय भट्ट और प्रकाश भट्ट ने उनकी मधुर आवाज सुनी, तो वे इतने प्रभावित हुए कि तुरंत उन्हें फिल्म के लिए अनुबंधित करने का निर्णय लिया।

राजकुमारी का जन्म 1924 में हुआ था। उन्होंने औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, लेकिन उनकी स्वाभाविक सुरीली आवाज और गायन में गहरी रुचि ने उन्हें आगे बढ़ाया। उन्होंने एचएमवी के लिए अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया। इसके बाद विभिन्न मंचों पर गायन करते हुए उनकी प्रतिभा चारों ओर फैली। प्रकाश पिक्चर्स ने उन्हें गुजराती फिल्म 'संसार लीला' और हिंदी फिल्म 'नई दुनिया' में काम करने का मौका दिया। फिल्म में उनका गाना 'अखियां गुलाबी जैसे मधु की है प्यालियां' काफी लोकप्रिय हुआ। 1933 में आई फिल्म 'आंख का तारा', 'तुर्की शेर' और 1934 में 'भक्त और भगवान', 'इंसाफ की टोपी' जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।

लल्लू भाई जैसे संगीतकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने कई यादगार गीत गाए। बाद में प्रकाश पिक्चर्स से उनका रिश्ता टूट गया, लेकिन उन्होंने प्ले बैक सिंगिंग की राह चुनी। रत्नमाला और शोभना समर्थ जैसी अभिनेत्रियों के लिए उन्होंने कई गाने गाए।

उनके सबसे प्रसिद्ध गीतों में 'सुन बैरी बालम सच बोल' (बावरे नैन), 'घबराना के जो हम सर को टकरायें' (महल), 'नजरिया की मारी', 'चुन चुन घुंघरवा', 'मुझे सच सच बता दो कब मेरे दिल में समाए थे' और 'हरे दिन तो बीता शाम हुई' शामिल हैं। संगीतकार रोशन ने उन्हें 'बावरे नैन' और 'अनहोनी' जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण गाने दिए। मुकेश के साथ उनके युगल गीत भी बहुत लोकप्रिय हुए।

राजकुमारी ने हिंदी के अलावा बांग्ला और पंजाबी में भी गीत गाए। 1950 के दशक में लता मंगेशकर के आगमन के बाद पार्श्व गायन की दुनिया बदल गई, लेकिन राजकुमारी की आवाज क्लासिक फिल्मों में हमेशा के लिए अमर हो गई। उन्होंने ओपी नैय्यर के साथ भी फिल्मों में अपनी आवाज दी।

उनका विवाह वाराणसी के वीके दुबे से हुआ था। जीवन के अंतिम वर्षों में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी गायकी ने लाखों दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया।

Point of View

NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

राजकुमारी दुबे का जन्म कब हुआ?
राजकुमारी दुबे का जन्म 1924 में हुआ था।
राजकुमारी ने किन फिल्मों में गाने गाए?
राजकुमारी ने 'बावरे नैन', 'महल', और 'पाकीजा' जैसी फिल्मों में गाने गाए।
राजकुमारी की पहली प्रस्तुति कब हुई?
राजकुमारी ने मात्र 10 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी।
राजकुमारी का विवाह किससे हुआ?
राजकुमारी का विवाह वाराणसी के वीके दुबे से हुआ था।
राजकुमारी की प्रसिद्ध आवाज क्यों है?
राजकुमारी की आवाज ने क्लासिक फिल्मों में अमिट छाप छोड़ी है।
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