जब डायरेक्टर ने बेनी दयाल से कहा- 'आवाज़ गायक बनने लायक नहीं', एआर रहमान बने किस्मत की चाबी
सारांश
मुख्य बातें
अबू धाबी में जन्मे बेनी दयाल की वह आवाज़ आज लाखों श्रोताओं को मुग्ध करती है, लेकिन उनका सफर असाधारण चुनौतियों से भरा रहा है। एक समय ऐसा भी था जब एक संगीत निर्देशक ने उन्हें स्पष्ट कह दिया कि "तुम्हारी आवाज़ गायक बनने लायक नहीं है।" फिर एआर रहमान उनकी किस्मत की चाबी बनकर आए और उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। आज बेनी दयाल आठ भाषाओं में गाते हैं और भारतीय सिनेमा के सबसे मांगे जाने वाले गायकों में से एक हैं।
नृत्य से संगीत की ओर यात्रा
13 मई 1984 को अबू धाबी में जन्मे बेनी दयाल का बचपन नृत्य के रंगों में रंगा हुआ था। उन्होंने 14 साल तक भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम की प्रशिक्षण ली और कर्नाटक संगीत भी सीखा। स्कूल के दिनों में वे नृत्य प्रतियोगिताओं में नियमित विजेता रहे। तब किसी ने उन्हें गाते सुना और कहा कि वे नृत्य से भी बेहतर गाते हैं। इसी प्रशंसा ने उन्हें संगीत की ओर मोड़ा।
फिल्म 'दिल से' का प्रभाव
एक दिन जब बेनी को बस में 'दिल से' फिल्म का गाना सुनने को मिला, तो उन्हें अपनी दिशा स्पष्ट हो गई। उन्होंने तय कर लिया कि संगीत ही उनका भविष्य होगा। स्कूल के बाद उन्होंने चेन्नई जाना चाहा, लेकिन पिता पुणे में पढ़ाई के लिए настаивают थे। दो महीने की सन्नाटे की अवधि के बाद परिवार ने सहमति दी कि पहले शिक्षा पूरी करेंगे, फिर संगीत का पीछा करेंगे।
कॉलेज और पहली निराशाएँ
कॉलेज में बेनी ने एक बैंड बनाया और विभिन्न शैलियों में गाने गाए। हालांकि, व्यावसायिक संगीत में प्रवेश की राह अत्यंत कठिन साबित हुई। वे संगीत निर्देशकों और स्टूडियो के पास जाते और कोरस में गाने की गुजारिश करते, लेकिन सर्वत्र नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। एक प्रभावशाली संगीत निर्देशक ने तो सीधे कह दिया कि उनकी आवाज़ पेशेवर गायकी के लिए उपयुक्त नहीं है।
आर्थिक संकट और नौकरी
आर्थिक तंगी, पिता की बीमारी और पारिवारिक दायित्वों के दबाव में बेनी टूट चुके थे। उन्होंने एक वरिष्ठ की सलाह पर बीपीओ में मानव संसाधन विभाग की नौकरी कर ली। यह निर्णय उनके लिए एक मोड़ साबित हुआ, लेकिन किस्मत की कहानी अभी बाकी थी।
एआर रहमान का फोन कॉल
जब बेनी नौकरी के पहले दिन ऑफिस पहुँचे, तो उन्हें एआर रहमान का फोन आया। रहमान ने बेनी का एक धार्मिक गीत सुना था और उनकी आवाज़ से प्रभावित हुए थे। 2008 में तमिल फिल्म 'सक्काराकट्टी' के लिए 'चिन्नम्मा, चिलकम्मा' गाना बेनी को दिया गया — यह उनके जीवन का सबसे बड़ा ब्रेक था।
हिंदी सिनेमा में प्रवेश और सफलता
एआर रहमान ने न केवल बेनी को दक्षिण भारतीय सिनेमा में स्थापित किया, बल्कि हिंदी फिल्म उद्योग में भी लाए। फिल्म 'गजनी' का गाना 'कैसे मुझे तुम मिल गई' एक सुपरहिट बन गया और बेनी दयाल को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। यह गीत उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण क्षण साबित हुआ।
बहुभाषी प्रतिभा और निरंतर विकास
बेनी दयाल ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी, बांग्ला, गुजराती और मराठी सहित आठ भाषाओं में गाने गाए हैं। वे फ्रेंच और अरबी में भी गा सकते हैं। हिमेश रेशमिया, प्रीतम, सलीम-सुलेमान और अमित त्रिवेदी जैसे शीर्ष संगीतकारों के साथ उनका सहयोग रहा है। दिलचस्प बात यह है कि हर रिकॉर्डिंग से पहले उन्हें वह पुरानी शंका सताती है कि शायद उनकी आवाज़ इस गीत के लिए सही न हो। लेकिन वे संगीत को दिल से निकालते हैं और मन में कोई नकारात्मकता नहीं रखते।
व्यक्तिगत जीवन और वर्तमान गतिविधियाँ
2016 में बेनी दयाल ने मॉडल कैथरीन थंगम से विवाह किया। वे स्वतंत्र संगीत भी रचते हैं और देश-विदेश में लाइव प्रदर्शन करते हैं। उनकी यात्रा एक अनुस्मारक है कि असफलता और आलोचना सफलता की सीढ़ी हो सकती है, बशर्ते दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन हो।