एनएचआरसी ने 'केडी: द डेविल' के विवादास्पद गाने पर जारी किया नोटिस, दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- एनएचआरसी ने गाने के अश्लील बोलों पर ध्यान दिया है।
- गाना बच्चों और नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त माना गया है।
- आयोग ने दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
- संस्थाओं को शिकायत के आरोपों की जांच करनी होगी।
- आयोग की शक्तियां दीवानी न्यायालय की तरह हैं।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने फिल्म 'केडी: द डेविल' के हालिया रिलीज गाने पर गंभीर ध्यान दिया है। आयोग का कहना है कि इस गाने में अश्लील, यौन उत्तेजक और दोहरे अर्थ वाले बोल हैं, जो बच्चों और नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त हैं।
शिकायतकर्ता का मानना है कि यह गाना टेलीविजन, सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर व्यापक रूप से उपलब्ध है, जिससे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
एनएचआरसी की पीठ, जिसमें सदस्य प्रियंक कानूनगो शामिल हैं, ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन माना है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मुख्यधारा के मनोरंजन में ऐसे अश्लील गानों का बढ़ता चलन युवा दर्शकों में अनुचित व्यवहार और अभिव्यक्ति को सामान्य बना रहा है।
आयोग ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनएचआरसी ने संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर 'कार्रवाई रिपोर्ट' (एटीआर) मांगी है।
नोटिस प्राप्त करने वाले संस्थानों में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मीनिटी), सूचना और प्रसारण मंत्रालय और सरकारी मामले और सार्वजनिक नीति (गूगल इंडिया) शामिल हैं।
इन सभी को निर्देशित किया गया है कि वे शिकायत के आरोपों की जांच करें, गाने की सामग्री का अवलोकन करें और आयोग को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। रिपोर्ट की एक प्रति बेंच-एमपीकेगॉवडॉटइन पर ईमेल करने को भी कहा गया है। शिकायत की प्रति सभी संबंधित पक्षों को संलग्न की गई है।
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में आयोग को दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं और वह मानव अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठा सकता है। यदि दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट नहीं आती है, तो आयोग आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
शिकायतकर्ता ने आयोग से अनुरोध किया है कि संबंधित प्राधिकरणों से दिशा-निर्देश जारी करवाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी सामग्री पर रोक लगाई जा सके और नाबालिगों के नैतिक वातावरण की रक्षा की जा सके।