मां बगलामुखी के चरणों में सेलिना जेटली, भाई और बच्चों से मिलने की लगाई प्रार्थना
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री सेलिना जेटली इन दिनों अपने व्यक्तिगत जीवन के एक कठिन मोड़ से गुज़र रही हैं। इस संघर्षपूर्ण दौर में उन्होंने आध्यात्मिक शरण ली और मां बगलामुखी के दरबार में पहुँचकर अपने भाई से पुनर्मिलन, बच्चों से जुड़ाव और टूटे रिश्तों को वापस पाने की गुहार लगाई। 20 मई को उन्होंने इस आध्यात्मिक यात्रा का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया, जो उनके चाहने वालों के बीच तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया।
मंदिर में भावुक हुईं सेलिना
वीडियो में सेलिना जेटली माता के गर्भगृह के सामने हाथ जोड़े खड़ी नज़र आ रही हैं। उनकी आँखें नम थीं और चेहरे पर गहरी भावुकता साफ़ दिख रही थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार उन्होंने सिर पर पीले रंग की चुनरी ओढ़ रखी थी। उनके समीप पुजारी पूरी श्रद्धा के साथ मंत्रोच्चारण करते दिखे।
सेलिना ने क्या लिखा
इंस्टाग्राम पोस्ट में सेलिना ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए लिखा, 'मां बगलामुखी के गर्भगृह में बैठकर मैंने दिव्य मां के चरणों में प्रार्थना की। मैंने अपने भाई से दोबारा मिलने, बच्चों के साथ फिर से जुड़ने और उस रिश्ते को वापस पाने की गुहार लगाई, जिसे भाग्य को कभी अलग नहीं करना चाहिए।' उन्होंने यह भी लिखा कि वे यह पवित्र पूजा उन सभी लोगों के साथ साझा करती हैं जो मां बगलामुखी का आशीर्वाद, सुरक्षा, न्याय और अपने प्रियजनों को फिर से पाने की शक्ति चाहते हैं।
प्रशंसकों की प्रतिक्रिया
सेलिना की इस पोस्ट को उनके शुभचिंतकों की भरपूर सहानुभूति मिली है। कमेंट सेक्शन में लोग उनके लिए दुआएँ कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि उनकी तमाम परेशानियाँ जल्द दूर होंगी। हालाँकि, अभिनेत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे मां बगलामुखी के किस मंदिर में गई थीं।
मां बगलामुखी के प्रमुख मंदिर
मां बगलामुखी के तीन प्रमुख सिद्धपीठ माने जाते हैं — मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा, श्री बगलामुखी मंदिर बनखंडी और पीताम्बरा पीठ। इन मंदिरों में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पूजा-अनुष्ठान के लिए पहुँचते हैं।
कौन हैं मां बगलामुखी
मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। उन्हें 'स्तंभन शक्ति और शत्रुओं का नाश करने वाली देवी' के रूप में पूजा जाता है। उनके मंदिर तंत्र साधना, मनोकामना पूर्ति और न्यायिक व राजनीतिक विजय से जुड़ी मान्यताओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सेलिना की यह यात्रा आस्था और व्यक्तिगत संघर्ष के उस संगम को दर्शाती है, जहाँ से उबरने की उम्मीद वे माँ के दरबार से लेकर लौटी हैं।